सरगुजा) अजगर के मुंह में बनी गांठ का साढ़े तीन घंटे चला ऑपरेशन, विशेषज्ञों ने बचाई जान
सरगुजा, 14 अक्टूबर (आरएनएस)। वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय मामला सामने आया है। इंडियन रॉक पाइथन (अजगर) के मुंह के अंदर बनी असामान्य गांठ को सर्जरी के माध्यम से निकाला गया। करीब साढ़े तीन घंटे तक चले ऑपरेशन में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने गांठ को निकालने में सफलता हासिल की। सर्जरी के बाद अजगर को ड्रिप और आवश्यक चिकित्सकीय सहायता दी गई। फिलहाल उसके पूर्ण स्वास्थ्य लाभ के लिए निरंतर देखरेख की जरूरत है।
जानकारी के अनुसार, अंबिकापुर के वन्यजीव रेस्क्यूकर्ता सत्यम द्विवेदी ने रेस्क्यू के दौरान अजगर के मुंह में असामान्य सूजन देखी। शुरुआत में उन्हें आशंका हुई कि अजगर ने कोई शिकार निगल लिया होगा, जिसके कारण उसका मुंह फूला हुआ दिखाई दे रहा है। हालांकि, सूजन की स्थिति सामान्य नहीं लगने पर उन्होंने मुंह के अंदर गांठ या ट्यूमर होने की आशंका जताई। इसके बाद वन विभाग, सरगुजा से आवश्यक अनुमति लेकर अजगर को बेहतर उपचार के लिए बिलासपुर स्थित कानन पेंडारी ले जाया गया।
० विशेषज्ञों की निगरानी में हुई सर्जरी
कानन पेंडारी में वन्यजीव विशेषज्ञ एवं उप संचालक डॉ. चंदन ने अजगर की स्थिति का आकलन किया। बेहतर उपचार के लिए उसे पेट मेडिक्स के संचालक डॉ. पियूष दुबे के पास भेजा गया। डॉ. दुबे ने आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और अपने अनुभव की मदद से सर्जरी की। लगभग साढ़े तीन घंटे तक चले ऑपरेशन के दौरान अजगर के मुंह के अंदर बनी गांठ को निकाल दिया गया। बताया गया कि ऑपरेशन के दौरान अजगर की स्थिति गंभीर थी। सर्जरी के बाद उसे ड्रिप और जरूरी चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई। विशेषज्ञों के प्रयासों से उसका उपचार संभव हो सका। हालांकि, सर्जरी के बाद उसकी पूरी तरह स्वस्थ होने की स्थिति और आगे की चिकित्सकीय प्रगति को लेकर निरंतर निगरानी आवश्यक है।
० सरीसृपों के उपचार में अहम उपलब्धि
अजगर जैसे सरीसृपों का उपचार सामान्य पशु चिकित्सा से अलग चुनौतियां पेश करता है। ऐसे मामलों में बीमारी की पहचान, सुरक्षित तरीके से सर्जरी करना और ऑपरेशन के बाद उचित देखभाल बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस मामले में रेस्क्यूकर्ता, वन विभाग और विशेषज्ञ चिकित्सकों के समन्वय से अजगर को समय पर उपचार उपलब्ध कराया गया। यदि संबंधित विशेषज्ञों और वैज्ञानिक अभिलेखों से पुष्टि होती है कि इस प्रकार की सर्जरी देश में पहली बार की गई है, तो इसे सरीसृप चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा सकता है। फिलहाल इस मामले में देश में पहली सर्जरी होने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
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