सर्वांगीण विकास ही शिक्षा का मूल लक्ष्य : हेमचंद्र

सर्वांगीण विकास ही शिक्षा का मूल लक्ष्य : हेमचंद्र

 

हरदोई। जनपद के अल्लीपुर स्थित पं. बाबूराम त्रिवेदी सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग में रविवार को शिक्षकों को विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय संगठन मंत्री हेमचंद्र उपस्थित रहे।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत, मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुआ। अतिथियों का रोली एवं बैच लगाकर अभिनंदन किया गया। मंच संचालन मैगलगंज के प्रधानाचार्य उत्तम मिश्र ने किया तथा जन शिक्षा समिति अवध प्रदेश के प्रदेश निरीक्षक मिथिलेश अवस्थी ने अतिथियों का परिचय कराया।

 

इस अवसर पर जन शिक्षा समिति अवध प्रदेश के उपाध्यक्ष एवं विद्यालय प्रबंधक शीर्षेन्दुशील त्रिवेदी ‘विपिन’ ने मुख्य अतिथि हेमचंद्र को अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। वहीं जन शिक्षा समिति अवध प्रदेश के मंत्री कौशल किशोर वर्मा का सम्मान लखनऊ संभाग के संभाग निरीक्षक श्याम मनोहर शुक्ल द्वारा किया गया।

 

कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षणार्थी आचार्यों द्वारा तैयार हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान विषयों की हस्तलिखित पत्रिकाओं का विमोचन भी अतिथियों द्वारा किया गया।

 

प्रथम एवं द्वितीय सत्र में क्षेत्रीय संगठन मंत्री हेमचंद्र ने “सर्वांगीण समग्र विकास की कल्पना” विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा दर्शन व्यक्ति के पंचकोशात्मक विकास पर आधारित है, जिसमें अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय तथा आनंदमय कोश का संतुलित विकास आवश्यक माना गया है। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि शरीर, प्राण, मन, बुद्धि और चित्त का समन्वित विकास करना है।

 

उन्होंने कहा कि भारतीय चिंतन के अनुसार जीवन अखंड है और संपूर्ण सृष्टि एक ही तत्व का विस्तार है। प्रेम, सेवा, त्याग, कर्तव्यबोध और परस्पर पूरकता भारतीय संस्कृति के मूल तत्व हैं। शिक्षा का पहला उद्देश्य बालक का सर्वांगीण विकास तथा दूसरा उद्देश्य मनुष्य को देवत्व की ओर अग्रसर करना है।

 

हेमचंद्र ने कहा कि शारीरिक दृष्टि से व्यक्ति सबल, प्राणिक दृष्टि से संयमी, मानसिक दृष्टि से सद्विचारी, बौद्धिक दृष्टि से सत्य का अन्वेषक तथा आध्यात्मिक दृष्टि से सेवाभावी होना चाहिए। उन्होंने बताया कि पंचकोशीय विकास के माध्यम से व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र, विश्व, सृष्टि और परमेष्टि तक की एकात्म भावना विकसित होती है, जो भारतीय शिक्षा का मूल आधार है।

 

कार्यक्रम में वर्गाधिकारी संतोष त्रिवेदी, सीतापुर संभाग निरीक्षक रणवीर सिंह, श्रावस्ती संभाग निरीक्षक कैलाश चंद्र वर्मा, साकेत संभाग निरीक्षक मिथिलेश सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं प्रशिक्षणार्थी आचार्य उपस्थित रहे।

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