हद हो गई है, कर्मचारी नहीं मशीन हो गए हैं माध्यमिक शिक्षक -संजय द्विवेदी*

*हद हो गई है, कर्मचारी नहीं मशीन हो गए हैं माध्यमिक शिक्षक -संजय द्विवेदी*

 

👉 अवकाश के दिनों में जनगणना, बीटीसी परीक्षा, टीजीटी परीक्षा, पुलिस भर्ती परीक्षा में ड्यूटी लगाने से भड़का माध्यमिक शिक्षक संघ

 

👉ग्रीष्मावकाश में अतिरिक्त कार्य लिए जाने के दिनों का अर्जित अवकाश स्वीकृत किया जाय

🖥️🖥️🖥️

लखनऊ। अवकाश के दिनों में जनगणना, बीटीसी परीक्षा, टीजीटी परीक्षा, पुलिस भर्ती परीक्षा, बीएड परीक्षा में ड्यूटी लगाने से उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने नाराजगी जताई है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ की प्रदेश मंत्री संजय द्विवेदी ने कहा है कि हद हो गई है शिक्षक कर्मचारी नहीं मशीन हो गए हैं। अवकाश के दिनों में उन्हें एक दिन भी चैन से बैठने नहीं दिया जा रहा है। यही हाल रहा तो प्रदेश के शिक्षक मानसिक रूप से डिप्रेशन का शिकार हो जाएंगे। शिक्षकों को अवकाश के दिनों में अतिरिक्त कार्य लिए जाने के दिनों का अर्जित अवकाश स्वीकृत किया जाय।

शिक्षा निदेशक माध्यमिक को लिखे पत्र में प्रदेश मंत्री संजय द्विवेदी ने कहा है कि माध्यमिक शिक्षा के वार्षिक कैलेंडर में शिक्षा निदेशक माध्यमिक ने 21 मई से 30 जून तक ग्रीष्मावकाश दिया है। लेकिन 22 मई से 20 जून तक पूरे प्रदेश के शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगा दी गई है। फिर ऐसे में ग्रीष्मावकाश के क्या मायने हैं। हमारे शिक्षकों को कहीं भी बाहर आने जाने पर रोक लगा दी गई है।

उन्होंने कहा कि काम के दबाव से माध्यमिक शिक्षक परेशान है। प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक भर्ती परीक्षा 3 व 4 जून को आयोजित हो रही है, उक्त परीक्षा में भी पूरे प्रदेश के माध्यमिक शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी गई है।पुलिस भर्ती एवं प्रोनति बोर्ड लखनऊ द्वारा आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा दिनांक 8, 9 व 10 जून को दो पारियों में संपन्न होनी है। पुलिस भर्ती परीक्षा में भी पूरे प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है।

उन्होंने बताया की उपरोक्त परीक्षाओं में ड्यूटी के निमित्त कतिपय जिला विद्यालय निरीक्षकों के द्वारा शिक्षकों को स्टेशन छोडने पर रोक लगा दी गई हैं।

इण्टर शिक्षा अधिनियम, 1921 के विनियमों के अध्याय-3 के विनियम 99 के अंतर्गत सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय के अध्यापकों को विभिन्न प्रकार के अवकाश उतनी ही अवधि के लिए तथा उन्हीं प्रतिबंधों के अधीन देय होते हैं, जितनी अवधि के लिए तथा जिन प्रतिबंधों के अधीन राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के अध्यापकों को उन पर लागू नियमों के अंतर्गत देय होते हैं।

राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के अध्यापकों को जो वेकेशन विभागीय होते हैं, उपार्जित अवकाश का विनियमन ऐसी दशा में जब उनको शासकीय कार्य के कारण संपर्ण या आंशिक दीर्घावकाश का उपभोग करने दिया गया हो।

*वित्तीय नियम संग्रह, खंड-2, भाग 2 से 4 के मल नियम 81 – ख (1) के द्वितीय प्रतिबंधात्मक खंड के प्रावधानों द्वारा होता है। यह प्रावधान निम्नवत है। “उसे स्वीकृत की जाने योग्य अर्जित छुट्टी की अवधि में से कार्य के प्रत्येक वर्ष के लिए जिसमेंवह पूरा दीर्घावकाश ले, 30 दिन घटा दिया जाएं। यदि सरकारी कार्य के कारण उसे किसी वर्ष पूरा दीर्घावकाश न मिल सके जैसा कि सहायक नियम 145 और 146 में उपबंधित है तो उसे स्वीकृत की जाने योग्य अर्जिंत छुट्टी में से 30 दिन का वह भाग घटा दिया जाएगा, जो उस अनुपात के बराबर हो जो अनुपात लिए गए वकाश के भाग का संपूर्ण दीर्घावकाश से हो।”*

उन्होंने बताया कि उपर्युक्त प्रावधानों के अंतर्गत बोर्ड परीक्षाओं मूल्यांकन, प्रशिक्षण, जनगणना आदि का कार्य ग्रीष्मावकाश मे लिए जाने के बदले पूर्व में शिक्षकों को अर्जित अवकाश दिए जाने कें आदेश समय-समय पर निर्यत किए गए हैं। आपसे अनुरोध है कि इस वर्ष 2026 में ग्रीष्मावकाश की अवधि में अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के जिन शिक्षकों य प्रधानाचायों से जनगणना तथा सार्वजनिक परीक्षाओं व उसके ब्रीफिंग आदि का कार्य लिया जा रहा है, उनके अवकाश लेखे में नियमानुसार अर्जित अवकाश जमा करने हेतु निर्देश जारी किया जाय।

 

 

🙏🙏🙏

*संजय द्विवेदी*

*प्रदेश मंत्री*

*उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ*

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *