अटल जी के मानस पुत्र अटल विश्व बंधुत्वेश्वरम से भारत को देंगे विश्व गुरु का रूप

 

अटल जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव द्विवेदी से वरिष्ठ पत्रकार आर एल पाण्डेय की बातचीत का प्रमुख अंश

प्रश्न – आपको अटल बिहारी वाजपेई जी के मंदिर बनवाने की कहां से प्रेरणा मिली ? उत्तर : अटल शब्द ब्रह्म का स्वरूप है मै अटल जी का मानस पुत्र हूं तो अटल विश्व बंधुत्वेश्वरम मंदिर के नाम से जाना जाएगा जिसमें अटल जी का नाम भी है और अटल एक ब्रह्म का स्वरूप भी है।
प्रश्न: इस मंदिर के निर्माण के पीछे क्या उद्देश्य है ÷
उत्तर ÷भारतवर्ष मे जातिवाद, वंशवाद द्वारा प्रतिभाये समाप्त की जा रही हैं उन प्रतिभाओं की रक्षा के लिए तथा प्रतिभाओं के द्वारा इसका शिलान्यास किया जाएगा विशेषकर जैसे भगवान राम ने नर और वानर ने मिलकर बंधुत्व का सेतु बांधा ठीक उसी प्रकार से नर और नारियों में जो प्रतिभाएं हैं एवं जो किन्नर देवता के रूप में इस कलयुग में रूप लिए आए हैं उन सभी के द्वारा शिलान्यास किया जाएगा. इस मंदिर में श्री राम जन्मभूमि अयोध्या जिसने भगवान राम बचपन में खेले हैं उन प्रभु राम अयोध्या की चरण धूलि इस मंदिर में पड़ेगी शिलान्यास में और सेतबंध रामेश्वरम का रुद्राभिषेक का जल भी पड़ेगा।प्रश्न इस मंदिर में किसकी मूर्ति रखी जाएगी इस मंदिर में भारत का संविधान एवं श्रीमद्भगवद्गीता की पूजा होगी भारत का संविधान शासन की लोकात्मा है । श्रीमद्भगवद्गीता कर्म योग एवं राष्ट्र राष्ट्र धर्म की शंख ध्वनि करता है जिसने भारत की परिभाषा दी गई है इस मंदिर में भारत के मनीषियों ने जो भारत का संविधान 392 विद्वानों ने लिखा उनका नाम पड़ेगा एवं 10 देशों के नाम अमेरिका जापान कनाडा आयरलैंड रूस फ्रांस जर्मनी यूएसए आदि भारतवर्ष के संविधान को साकार रूप देने में सहयोग किया उन सभी देशों के भी नाम इस मंदिर में पड़ेंगे इसके हर पत्थर पर राम और बंधुत्व लिखा होगा।प्रश्न ÷क्या यह मंदिर राजनीति के रूप में बनेगा उत्तर : नहीं, इस मंदिर का नाम अटल विश्व बंधुत्वेश्वरम है सेतबंध रामेश्वरम के निर्माण में नर वानर गिलहरी भालू आदि ने मिलकर सेतबंध रामेश्वरम की स्थापना की ठीक उसी प्रकार से इस मंदिर का शिलान्यास और निर्माण होगा भारतवर्ष के प्रत्येक प्रतिभाओं के द्वारा इसका शिलान्यास हेगा। भगवान राम को न कोई स्थापित कर सकता है न मिटा सकता है राम तो कण-कण में है राम तो एक क्षण क्षण में रामसत्ता का विषय नहीं राम संप्रभुता है ए मंदिर उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक अर्थात श्री राम जन्मभूमि अयोध्या से लेकर रामेश्वरम तक किसी भी भारतीय के साथ भेदभाव नहीं करने देगा जातिवाद विश्वास संप्रदाय वाद मुक्त होगा बंधुत्वेश्वरम मंदिरक्या किन्नर समाज मुख्यधारा में आने के लिए आपके साथ है उत्तर जी हां भारतवर्ष के किन्नर इस मंदिर का शिलान्यास करेंगे जिसके हर पत्थर पर राम और बंधुत्व लिखा होगा संपूर्ण विश्व में किन्नर बहिष्कृत है तिरस्कृत है समाज से वंचित हैं तो भारत इस मंदिर के निर्माण से विश्व गुरु के रूप में उजागर हो जाएगा क्योंकि संपूर्ण विश्व में किन्नरों शिलान्यास विश्व का पहला मंदिर होगा जिससे अन्य देशों के किन्नर भी समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे और प्रतिभा संपन्न लोग आगे बढ़ सकेंगे।

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