अहंकार मनुष्य को अंदर से खोखला कर देता है- सद्गुरु महाराज
दोहरीघाट, मऊ। मां सरयू के तट स्थित अंतरराष्ट्रीय मातेश्वरी महाधाम में शारदीय नवरात्र पर मातेश्वरी परिवार की ओर से आयोजित 10 दिवसीय आदिशक्ति अखंड महायज्ञ के आठवें दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। परिवार के संस्थापक सद्गुरु जी महाराज ने ध्यान-योग एवं प्रवचन के दौरान कहा कि अहंकार मनुष्य के पतन का प्रमुख कारण है। इससे बचने के लिए परम सत्ता का स्मरण करते हुए जीवन में विनम्रता अपनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गेहूं में घुन लगने से वह अंदर ही अंदर खोखला हो जाता है, उसी तरह अभिमान भी व्यक्ति की आंतरिक शक्ति को कमजोर कर देता है। अहंकार के साथ द्वेष जन्म लेता है, जो जीवन में अशांति बढ़ाता है। व्यक्ति को अपनी उपलब्धियों पर घमंड करने के बजाय दूसरों के प्रति सम्मान और सद्भाव रखना चाहिए। सद्गुरु जी महाराज ने भगवान विष्णु, नारद मुनि, मुकुट और खड़ाऊ से जुड़ा प्रसंग सुनाकर अभिमान के दुष्परिणाम समझाए। उन्होंने कहा कि मनुष्य कब अहंकार के वशीभूत हो जाए, इसका पता भी नहीं चलता। यही प्रवृत्ति क्रोध को बढ़ाती है और उसे उपहास का पात्र बना सकती है। रावण का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि दस विद्याओं का ज्ञाता और प्रकांड विद्वान होने के बावजूद उसका अंत हुआ। सुदर्शन, योगेश्वर, धर्मानंद पांडेय, अवधेश सिंह, नित्यानंद, भागीरथी, सुरेश, कृष्णा, किस्मती, रंजू, मालती, संगीता और बविता सहित अनेक श्रद्धालुओं ने प्रवचन का लाभ लिया। आयोजन स्थल पर आचार्य दिव्यानंद जी के नेतृत्व में सफाई अभियान चलाया जा रहा है। आचार्य गणेश जी महाराज की ओर से भोजन-प्रसाद वितरित किया जा रहा है, जबकि मां शक्ति अस्पताल, दोहरीघाट की तरफ से भक्तों को निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

