उत्तर प्रदेश-जापान निवेश साझेदारी को नई रफ्तार, 12 हजार करोड़ से अधिक की परियोजनाओं से हजारों रोजगार के अवसर

 

उत्तर प्रदेश-जापान निवेश साझेदारी को नई रफ्तार, 12 हजार करोड़ से अधिक की परियोजनाओं से हजारों रोजगार के अवसर

लखनऊ, (आरएनएस )। उत्तर प्रदेश और जापान के बीच निवेश, तकनीक, नवाचार, विनिर्माण, कौशल विकास और औद्योगिक सहयोग को नई गति देने के उद्देश्य से बुधवार को नई दिल्ली में उत्तर प्रदेश-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव तथा केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश को जापानी उद्योगों के लिए दीर्घकालिक निवेश और औद्योगिक साझेदारी का प्रमुख केंद्र बनाने की प्रतिबद्धता जताई गई। इस अवसर पर एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड और स्पार्क मिंडा कॉरपोरेशन लिमिटेड की महत्वपूर्ण परियोजनाओं का वर्चुअल शिलान्यास भी किया गया।एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड द्वारा यीडा के सेक्टर-10 में ट्रैक्टर और निर्माण उपकरण निर्माण की परियोजना स्थापित की जा रही है। दो हजार करोड़ रुपये से अधिक की इस परियोजना से करीब चार हजार रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। परियोजना के प्रथम चरण में प्रतिवर्ष 60 हजार ट्रैक्टर और 15 हजार निर्माण उपकरणों के उत्पादन की क्षमता प्रस्तावित की गई है। दूसरी ओर, स्पार्क मिंडा कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा यीडा में दो बड़े विनिर्माण प्रोजेक्ट स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें कुल 10,166 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं से लगभग 6,440 रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश और जापान के बीच साझेदारी विश्वास, तकनीक, संस्कृति, निवेश और साझा दृष्टिकोण की मजबूत नींव पर आधारित है। भारत और जापान के संबंध केवल आर्थिक नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध भी हैं। भगवान बुद्ध की करुणा, जीवन अनुशासन और मध्य मार्ग की विचारधारा दोनों देशों को जोड़ती है। उन्होंने कहा कि भारत-जापान साझेदारी साझा विकास, साझा तकनीक और साझा समृद्धि की साझेदारी है।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में स्पष्ट नीति, स्वच्छ नीयत और दृढ़ संकल्प के साथ उत्तर प्रदेश लगातार विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। पिछले नौ वर्षों में प्रदेश के बजट, सकल राज्य घरेलू उत्पाद और प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। महिला श्रमबल की भागीदारी भी तीन गुना से अधिक हुई है। उत्तर प्रदेश एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है और भारत की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास आज बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक लागत और सुशासन का मजबूत आधार है। मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स एवं औद्योगिक गलियारे, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर तंत्र तथा डेटा सेंटर बुनियादी ढांचे का लगातार विस्तार हो रहा है। प्रदेश में 17 हवाई अड्डे, देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क, सात शहरों में मेट्रो नेटवर्क, भारत का पहला रैपिड रेल, पहला अंतर्देशीय जलमार्ग और दो समर्पित माल गलियारे निवेशकों को बेहतर संपर्क और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। वाराणसी में देश का पहला शहरी सार्वजनिक परिवहन रोप-वे भी विकसित किया जा रहा है।

योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां, 35 हजार से अधिक बड़े उद्योग और 22 हजार से अधिक स्टार्टअप प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति दे रहे हैं। प्रदेश में सूचना प्रौद्योगिकी, हरित हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण, रक्षा विनिर्माण सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए 36 क्षेत्रीय नीतियां लागू हैं। औद्योगिक निवेश के लिए 75 हजार एकड़ से अधिक का समर्पित औद्योगिक भूमि बैंक उपलब्ध है। एक्सप्रेस-वे के किनारे 27 औद्योगिक विनिर्माण एवं लॉजिस्टिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैंमुख्यमंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, एग्रीटेक, फिनटेक, डीपटेक, मेडटेक, रक्षा विनिर्माण, पर्यटन और खेल जैसे क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश निवेश और नवाचार के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। देश के मोबाइल फोन उत्पादन का 55 प्रतिशत और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का लगभग 60 प्रतिशत विनिर्माण उत्तर प्रदेश में हो रहा है। प्रदेश में नौ कृषि-जलवायु क्षेत्र हैं और देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में उत्तर प्रदेश का लगभग 21 प्रतिशत योगदान है।योगी ने उत्तर प्रदेश और जापान के बीच सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश भगवान बुद्ध से जुड़े कपिलवस्तु, सारनाथ, श्रावस्ती और कुशीनगर जैसे विश्व प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ स्थलों की भूमि है। काला नमक चावल, जिसे भगवान बुद्ध के प्रसाद से जोड़ा जाता है, उत्तर प्रदेश की एक जिला एक उत्पाद योजना का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जापान की गुणवत्ता, तकनीक, अनुसंधान क्षमता, विनिर्माण उत्कृष्टता और काइजेन कार्य संस्कृति तथा उत्तर प्रदेश के विशाल बाजार, कुशल मानव संसाधन, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक क्षमता का मेल दोनों पक्षों के लिए व्यापक अवसर पैदा कर सकता है।मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में जापान सिटी विकसित की जा रही है। यह नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके आसपास सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर विकसित हो रहे हैं। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा कार्गो, रखरखाव, मरम्मत एवं ओवरहॉल तथा लॉजिस्टिक्स हब के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने मार्च 2026 में प्लग एंड प्ले औद्योगिक शेड योजना भी शुरू की है।उन्होंने कहा कि निवेश के लिए अनुकूल वातावरण बनाने के उद्देश्य से निवेश मित्र 3.0 शुरू किया गया है। इसके माध्यम से विभिन्न विभागों की सेवाओं को एक मंच पर लाकर आवेदन से लेकर उत्पादन तक की प्रक्रिया की ऑनलाइन निगरानी की जा रही है। इससे स्वीकृति प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हुई है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे और गंगा एक्सप्रेस-वे जैसे बड़े प्रोजेक्ट निर्धारित समय से पहले पूरे किए गए हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सुरक्षित और स्थिर वातावरण के कारण आईबीएम इनोवेशन सेंटर, फॉक्सकॉन-एचसीएल, सेमीकंडक्टर संयंत्र, इलेक्ट्रिक बस संयंत्र और रक्षा विनिर्माण हब जैसी परियोजनाओं को बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा कि भारत-जापान के रणनीतिक दृष्टिकोण को अब उत्तर प्रदेश और जापानी उद्योगों के बीच निवेश, नवाचार, विनिर्माण और तकनीक की ठोस आर्थिक एवं औद्योगिक साझेदारी में बदलने का समय है। इस साझेदारी का अगला अध्याय कारखानों में तैयार होगा, प्रयोगशालाओं में नवाचार के रूप में विकसित होगा और विश्वविद्यालयों में इसके लिए प्रतिभाशाली मानव संसाधन तैयार होगा।योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास देश की सबसे बड़ी युवा कार्यशक्ति है। प्रदेश के युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षित करना और जापानी विनिर्माण संस्कृति से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। काइजेन, फाइव-एस, लीन मैन्युफैक्चरिंग, रोबोटिक्स, स्वचालन और प्रिसीजन इंजीनियरिंग जैसी जापानी औद्योगिक तकनीकों को कौशल प्रशिक्षण से जोड़कर नया कौशल तंत्र विकसित किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश और जापान के यामानाशी प्रीफेक्चर के बीच उच्चस्तरीय चर्चाओं में हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ तकनीक पर विशेष जोर दिया गया है। आईआईटी कानपुर, एचबीटीयू कानपुर, आईटी-बीएचयू और ट्रिपल आईटी गोरखपुर के माध्यम से दो हरित हाइड्रोजन उत्कृष्टता केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक केंद्र के लिए 50 करोड़ रुपये की धनराशि पहले ही जारी की जा चुकी है। सरकार का उद्देश्य अनुसंधान को पायलट परियोजनाओं, तकनीक के व्यावहारिक उपयोग और व्यावसायिक उत्पादन तक पहुंचाना है।मुख्यमंत्री ने एस्कॉर्ट्स कुबोटा परियोजना को भारत-जापान औद्योगिक सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण बताते हुए कहा कि इससे उत्तर प्रदेश में आधुनिक विनिर्माण और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने स्पार्क मिंडा-टोयो डेंसो साझेदारी को भी जापानी तकनीक और उत्तर प्रदेश के मजबूत विनिर्माण तंत्र के एकीकरण का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि जापानी कंपनियों के लिए प्रदेश में केवल उत्पादन इकाइयां स्थापित करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि अनुसंधान एवं विकास केंद्र, कौशल केंद्र और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला भी विकसित की जानी चाहिए।मुख्यमंत्री ने जापानी बाह्य व्यापार संगठन, इन्वेस्ट यूपी और भारतीय उद्योग परिसंघ के बीच प्रस्तावित त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन का स्वागत करते हुए कहा कि इससे जापानी निवेश को सुगम बनाने और जापानी कंपनियों को उत्तर प्रदेश में उपलब्ध अवसरों से जोड़ने की प्रक्रिया को संस्थागत आधार मिलेगा। उन्होंने जापानी बाह्य व्यापार संगठन से उत्तर प्रदेश के आर्थिक परिवर्तन में रणनीतिक साझेदार के रूप में और अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश भारत का विकास इंजन बनने के साथ-साथ दुनिया के निवेश का प्रमुख गंतव्य बन रहा है। भारत और जापान दो प्राचीन और महान राष्ट्र हैं। दोनों देशों के संबंध दो संस्कृतियों का संवाद, दो सभ्यताओं का संगम और दो संकल्पों का समन्वय हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने जापान को भगवान बुद्ध का संदेश दिया और जापान ने उस संदेश को अपनी संस्कृति में आत्मसात कर दुनिया के सामने करुणा और कर्म, शांति और शक्ति तथा परंपरा और प्रगति का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया।शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत और जापान प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग, समन्वय और साझेदारी में विश्वास करते हैं। जापान के साथ भारत की साझेदारी केवल निवेश की साझेदारी नहीं, बल्कि विकास, कूटनीति और गरिमा की साझेदारी है। उत्तर प्रदेश जापानी उद्योगों को केवल निवेशक नहीं, बल्कि विकास साझेदार के रूप में देखता है। ऐसा निवेश जो पूंजी के साथ क्षमता, तकनीक के साथ प्रतिभा और लाभ के साथ समृद्धि लेकर आए, वही दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करेगा।केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि उत्तर प्रदेश-जापान निवेश बैठक भारत-जापान और उत्तर प्रदेश-यामानाशी संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति को दुनिया ने स्वीकार किया है। देश छह से आठ प्रतिशत की सतत आर्थिक वृद्धि, नियंत्रित महंगाई और मजबूत आर्थिक आधार के साथ आगे बढ़ रहा है। सामाजिक, डिजिटल और भौतिक बुनियादी ढांचे में निवेश, समावेशी विकास, विनिर्माण, नवाचार तथा कानूनों और नियमों के सरलीकरण को भारत की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आधार बताया।उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि भारत और जापान के संबंध गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव, साझा मूल्यों, आपसी विश्वास और भविष्य के साझा दृष्टिकोण पर आधारित हैं। निवेश, तकनीक, विनिर्माण, कौशल, स्वच्छ ऊर्जा, स्वास्थ्य और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से निवेश और उद्यम के लिए देश के सबसे संभावनाशील राज्यों में शामिल हो रहा है।एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी शिंगो हानाडा ने उत्तर प्रदेश सरकार, भारत सरकार और इन्वेस्ट यूपी के सहयोग के लिए आभार जताते हुए प्रदेश की औद्योगिक क्षमता और भविष्य की संभावनाओं पर विश्वास व्यक्त किया। स्पार्क मिंडा कॉरपोरेशन के कार्यकारी निदेशक आकाश मिंडा ने कहा कि एक्सप्रेस-वे, माल एवं औद्योगिक गलियारे, विश्वस्तरीय लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक पार्क, कुशल मानव संसाधन, स्मार्ट टाउनशिप और नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे जैसी सुविधाएं उद्योगों के लिए मजबूत आधार तैयार कर रही हैं।आकाश मिंडा ने बताया कि मिंडा समूह उत्तर प्रदेश में 40 वर्षों से अधिक समय से कार्य कर रहा है और वर्तमान में नौ हजार से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान कर रहा है। समूह उन्नत तकनीक, मोटर पार्ट्स, इलेक्ट्रिक वाहन उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा डिजाइन एवं विकास केंद्रों के क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि जापान की विश्वस्तरीय तकनीक, वैश्विक गुणवत्ता और सटीक विनिर्माण क्षमता तथा उत्तर प्रदेश के विशाल बाजार, प्रतिभा, बुनियादी ढांचे और नीतिगत सहयोग का संयोजन मजबूत औद्योगिक साझेदारी का आधार बन सकता है।इस अवसर पर यामानाशी प्रीफेक्चर, जापान के गवर्नर कोटारो नागासाकी, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री सुनील कुमार शर्मा, औद्योगिक विकास राज्यमंत्री जसवंत सिंह सैनी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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नगर निगम की निर्माणाधीन परियोजनाओं की महापौर ने की समीक्षा, धीमे कार्यों पर ठेकेदार को फटकार

लखनऊ (आरएनएस )। महापौर सुषमा खर्कवाल ने बुधवार को लालबाग स्थित नगर निगम मुख्यालय में नगर आयुक्त गौरव कुमार के साथ बैठक कर निर्माण कार्यदायी संस्था सीएनडीएस द्वारा नगर निगम लखनऊ के लिए कराई जा रही विभिन्न महत्वपूर्ण विकास एवं निर्माण परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में महापौर ने सभी परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक के बाद उन्होंने निर्माणाधीन नगर निगम मुख्यालय का औचक निरीक्षण किया और मौके पर चल रहे निर्माण कार्यों की स्थिति का जायजा लिया।बैठक में महापौर ने सीएनडीएस द्वारा कराई जा रही विभिन्न परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति, निर्माण की गति तथा कार्यों में आ रही बाधाओं के बारे में अधिकारियों और कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधियों से जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं में निर्माण कार्य की गति धीमी है, उनमें तत्काल तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि नगर निगम की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही अथवा अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी कार्य गुणवत्ता मानकों का पालन करते हुए निर्धारित समय के भीतर पूरे किए जाएं।समीक्षा बैठक में नगर निगम लखनऊ के नवीन मुख्यालय भवन के निर्माण, अमौसी में मैंगो पार्क, किला मोहम्मदी नाला के रीमॉडलिंग एवं स्टॉर्म वाटर ड्रेन, आलमबाग से हैदर कैनाल तक गीतापल्ली नाले के डायवर्जन के लिए आरसीसी स्टॉर्म वाटर ड्रेन के निर्माण तथा विभिन्न पंपिंग स्टेशनों पर बाढ़ पंपिंग एवं जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने संबंधी कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई।इसके अलावा औरंगाबाद में वर्किंग वूमेन हॉस्टल, साहित्य पार्क तथा मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना 2025-26 के अंतर्गत जोन-7 में जोनल कार्यालय के निर्माण की स्थिति पर भी चर्चा की गई। महानगर क्षेत्र में कुकरैल नदी के किनारे अयोध्या मार्ग स्थित नगर निगम की भूमि पर प्रस्तावित अर्बन प्लाजा, डिजिटल लाइब्रेरी, बुक कैफे, फूड कोर्ट, रूफटॉप टैरेस रेस्टोरेंट, बेसमेंट पार्किंग सहित बहुउद्देशीय भवन और अन्य सुविधाओं के विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई।बैठक के बाद महापौर सुषमा खर्कवाल ने नगर आयुक्त गौरव कुमार के साथ निर्माणाधीन नगर निगम मुख्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने भवन के विभिन्न हिस्सों में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति देखी और अधिकारियों से कार्यों की समयसीमा तथा गुणवत्ता के संबंध में जानकारी ली। निर्माण कार्यों में हो रहे विलंब पर महापौर ने नाराजगी जताई और संबंधित ठेकेदार को कड़ी फटकार लगाते हुए तत्काल निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।महापौर ने कहा कि नगर निगम मुख्यालय सहित सभी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शहर के विकास से सीधे जुड़ी हैं। इन परियोजनाओं को लंबित रखने से जनता को अपेक्षित सुविधाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पाता। इसलिए निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि कार्यों की लगातार निगरानी करें और किसी भी स्तर पर सामने आने वाली बाधाओं का तत्काल समाधान कराते हुए निर्माण कार्य आगे बढ़ाएं।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्माणाधीन परियोजनाओं का नियमित निरीक्षण किया जाए तथा कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी स्थिति में समझौता न हो। साथ ही समयसीमा का विशेष ध्यान रखते हुए परियोजनाओं को निर्धारित अवधि में पूरा कराया जाए। महापौर ने कहा कि कार्यों की प्रगति की लगातार समीक्षा की जाएगी और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।बैठक एवं निरीक्षण के दौरान अपर नगर आयुक्त डॉ. अरविंद कुमार राव, मुख्य अभियंता सिविल महेश वर्मा, सीएनडीएस के महाप्रबंधक सौरभ श्रीवास्तव, परियोजना प्रबंधक शैलेंद्र सिंह, वीनस चौधरी तथा कार्यदायी ठेकेदार संदीप सिंह सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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बीबीएयू का 11वां दीक्षांत समारोह 29 अगस्त को, दो चरणों में होगा उपाधि वितरण

लखनऊ, (आरएनएस )। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) का 11वां दीक्षांत समारोह-2026 आगामी 29 अगस्त को आयोजित किया जाएगा। वर्ष 2023, 2024, 2025 एवं 2026 में उत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए आयोजित होने वाले इस दीक्षांत समारोह में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों एवं अभ्यर्थियों की सहभागिता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम को दो चरणों में आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य उपाधि एवं पुरस्कार वितरण की प्रक्रिया को व्यवस्थित, सुरक्षित और सुचारु रूप से संपन्न कराना है।विश्वविद्यालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार दीक्षांत समारोह का प्रथम चरण प्रातः 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में आयोजित किया जाएगा। इस चरण में पीएचडी उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों और गोल्ड मेडलिस्ट विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की जाएंगी। समारोह में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों को प्रॉक्टर कार्यालय द्वारा वैध दीक्षांत पास जारी किया जाएगा। बिना वैध पास के प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।मुख्य समारोह के दौरान मंच पर प्रत्येक वर्ष के विश्वविद्यालय टॉपर तथा आर.डी. सोनकर पुरस्कार प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को ही उपाधि प्रदान की जाएगी। अन्य पंजीकृत विद्यार्थियों को उनकी उपाधियां संबंधित विभागों में आयोजित होने वाले दूसरे चरण के कार्यक्रम में प्रदान की जाएंगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों से निर्धारित समय के अनुसार अपने संबंधित कार्यक्रमों में उपस्थित होने की अपील की है।दीक्षांत समारोह का द्वितीय चरण दोपहर 2 बजे से विद्यार्थियों के संबंधित विभागों में शुरू होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया है कि उपाधि प्राप्तकर्ताओं तथा अन्य अधिकृत प्रतिभागियों के लिए पर्याप्त और उचित बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। विभागों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि विद्यार्थी निर्धारित समय पर दूसरे चरण के उपाधि वितरण कार्यक्रम में शामिल हो सकें और किसी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो।दीक्षांत समारोह के दौरान सुरक्षा और अनुशासन को लेकर भी विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। दोपहर 1 बजे के बाद सभी विभागों में प्रवेश केवल पंजीकृत अभ्यर्थियों को उनके दीक्षांत पास के सत्यापन के बाद ही दिया जाएगा। विद्यार्थियों की पहचान और पास का अनिवार्य सत्यापन करने के बाद ही प्रवेश सुनिश्चित किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम में शामिल होने वाले विद्यार्थियों एवं अन्य अधिकृत प्रतिभागियों से निर्धारित नियमों का पालन करने की अपील की है।विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोनों चरणों के सफल संचालन के लिए संबंधित विभागों, फूड कमेटी, सुरक्षा अधिकारी और सैनिटेशन प्रभारी को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए हैं। संबंधित अधिकारियों को कार्यक्रम स्थल पर साफ-सफाई, सुरक्षा, बैठने की व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं को समय से सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।परीक्षा नियंत्रक प्रो. विक्रम सिंह यादव ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों, समिति सदस्यों और विभागाध्यक्षों से अधिसूचना में दिए गए निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं, ताकि 11वें दीक्षांत समारोह को सफलतापूर्वक आयोजित किया जा सके।विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की सहभागिता को ध्यान में रखते हुए दो चरणों में कार्यक्रम आयोजित करने की व्यवस्था की गई है। पहले चरण में पीएचडी और स्वर्ण पदक प्राप्त विद्यार्थियों सहित चयनित शीर्ष विद्यार्थियों को मुख्य सभागार में सम्मानित किया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में अन्य पंजीकृत विद्यार्थियों को उनके संबंधित विभागों में उपाधियां प्रदान की जाएंगी। इससे कार्यक्रम में भीड़ को नियंत्रित करने के साथ-साथ विद्यार्थियों को उपाधि वितरण की प्रक्रिया में बेहतर सुविधा मिल सकेगी।

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राम मंदिर जमीन मामले में क्लीन चिट की खबरों पर संजय सिंह ने उठाए सवाल, एसआईटी को 26 दस्तावेज सौंपने के लिए मांगा समय

दिल्ली/लखनऊ, (आरएनएस )। आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय और अनिल मिश्रा को विशेष जांच दल (एसआईटी) की ओर से कथित तौर पर क्लीन चिट दिए जाने की खबरों पर सवाल उठाते हुए इसे जांच प्रक्रिया के संदर्भ में गंभीर विषय बताया है। उन्होंने कहा कि एक ओर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एसआईटी से जांच की स्थिति की रिपोर्ट मांगे जाने की खबर सामने आ रही है, वहीं दूसरी ओर मीडिया में आरोपियों को क्लीन चिट दिए जाने की खबरें प्रकाशित हो रही हैं। उन्होंने इस विरोधाभास पर स्पष्टता की मांग की है।संजय सिंह ने एसआईटी अध्यक्ष किरन यस को औपचारिक पत्र लिखकर जमीन से जुड़े मामले में उनके पास उपलब्ध कुल 26 दस्तावेज जांच दल को सौंपने के लिए 20 से 23 अगस्त के बीच समय मांगा है। उनके मुताबिक इनमें 13 दस्तावेज पहले दिए जा चुके हैं, जबकि 13 नए दस्तावेज उनके पास उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि इन दस्तावेजों को जांच में शामिल किया जाना आवश्यक है, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।संजय सिंह ने कहा कि एक दैनिक समाचार पत्र में चंपत राय और अनिल मिश्रा को एसआईटी द्वारा क्लीन चिट दिए जाने की खबर प्रकाशित हुई है, जबकि एक अन्य समाचार पत्र में 17 अगस्त को प्रकाशित खबर के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईटी को जांच जल्द पूरी कर स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मामला अभी जांच के दायरे में है और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थिति रिपोर्ट मांगी जा रही है, तो क्लीन चिट दिए जाने की खबर किस आधार पर सामने आई। उन्होंने कहा कि दोनों खबरों में से सही स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।सांसद ने आरोप लगाया कि उन्होंने पूर्व में गठित एसआईटी को जमीन से जुड़े मामले में 13 महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। उनके दावे के अनुसार इन दस्तावेजों में जमीन के कई संदिग्ध लेनदेन से संबंधित रिकॉर्ड शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि चंपत राय के हस्ताक्षर वाले दस्तावेजों में दो करोड़ रुपये की जमीन को कथित तौर पर कुछ ही मिनटों के अंतराल में साढ़े 18 करोड़ रुपये में खरीदे जाने का उल्लेख है। उन्होंने नौ करोड़ रुपये की जमीन 55 करोड़ रुपये और एक करोड़ 73 लाख रुपये की जमीन 24 करोड़ रुपये में खरीदे जाने का भी आरोप लगाया।संजय सिंह ने कहा

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