(कुशीनगर) राष्ट्रीय लोक अदालत में 1,21,108 वादों का हुआ निस्तारण, 9.63 करोड़ की टोकन मनी, की गई वसूली
—- 28 मोटर दुर्घटना वादों में 1.56 करोड़ का मुआवजा किया गया निर्धारित, 10 दंपतियों के विवाद समाप्त कराकर एक साथ रहने के लिए कराया गया राजी।
कुशीनगर, 12 सितंबर (आरएनएस)। जिला मुख्यालय स्थित जिला सत्र न्यायालय परिसर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 1,21,108 वादों का निस्तारण किया गया। जिसमें 9.63 करोड़ टोकन मनी के रूप वसूली की गई। साथ ही 28 मोटर दुर्घटना वादों का निस्तारण कर 1.56 करोड़ का मुआवजा निर्धारित किया गया। इसके अलावे 10 दंपतियों के विवाद समाप्त कराकर एक साथ रहने को राजी कराया गया है।
राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ प्रशासनिक न्यायमूर्ति, जजशिप कुशीनगर जितेन्द्र कुमार सिन्हा एवं उनकी धर्मपत्नी संगीता सिन्हा तथा जनपद न्यायाधीश, अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण संजीव कुमार त्यागी एवं उनकी धर्मपत्नी शालिनी त्यागी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित एवं मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। लोक अदालत में विभिन्न न्यायालयों एवं विभागों द्वारा आपसी सुलह-समझौते के आधार पर बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण किया गया। विशेष लोक अदालत के अंतर्गत 09, 10 एवं 11 सितंबर को 155 लघु आपराधिक वादों का निस्तारण किया गया।जबकि 12 सितंबर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 1,20,953 वादों का निस्तारण किया गया। इस तरह कुल 1,21,108 वादों का निस्तारण किया गया। फौजदारी के कुल 7,057 वादों का निस्तारण करते हुए जुर्माने के रूप में 1,18,235 रुपये की धनराशि वसूल कर राजकीय कोष में जमा कराई गई। मोटर दुर्घटना से संबंधित 28 क्लेम वादों का निस्तारण करते हुए मृतकों एवं घायलों के आश्रितों को कुल 1.56 करोड़ रुपये का मुआवजा दिलाया गया। पारिवारिक न्यायालयों द्वारा 102 वादों का निस्तारण किया गया। बैंकों द्वारा प्री-लिटिगेशन स्तर पर बैंक ऋण से संबंधित 2,048 वादों का निस्तारण किया गया। इसमें ऋण धारकों से 9,63, 39,072 रुपये की टोकन मनी वसूल की गई। इसके अतिरिक्त 1,190 राजस्व वाद, 112 विद्युत बिल संबंधी मामले तथा 44 श्रम विवाद भी निस्तारित किए गए। इसके अलावे 10 दंपतियों के विवाद समाप्त कराकर फिर साथ रहने को राजी कराया गया। इस दौरान राष्ट्रीय लोक अदालत में पारिवारिक विवादों के निस्तारण के दौरान भावनात्मक पहल भी देखने को मिली। परिवार न्यायालय में लंबे समय से चल रहे विवादों को आपसी सुलह-समझौते के आधार पर समाप्त कराया गया। प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय द्वारा छह तथा अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय द्वारा चार दंपतियों के विवाद समाप्त कराए गए। इस प्रकार कुल 10 दंपतियों को बतौर पति-पत्नी एक साथ जीवनयापन करने के लिए दीवानी न्यायालय परिसर से विदा कराया गया।
इनसेट– दिव्यांगजनों को वितरित किए गए कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण:- राष्ट्रीय लोक अदालत के अवसर पर जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी अभय पाण्डेय के सहयोग से दिव्यांगजनों को व्हील चेयर, कृत्रिम अंग एवं अन्य सहायक उपकरण वितरित किए गए। इस अवसर पर प्रशासनिक न्यायमूर्ति जितेन्द्र कुमार सिन्हा एवं जनपद न्यायाधीश संजीव कुमार त्यागी सहित अन्य न्यायिक अधिकारियों ने लाभार्थियों को उपकरण प्रदान किए।
इनसेट– लाभार्थियों को दिए गए आयुष्मान कार्ड:- उप मुख्य चिकित्साधिकारी आरडी कुशवाहा के सहयोग से पात्र लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड भी वितरित किए गए। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों ने पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए जागरूक किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत में 50वीं बटालियन एनसीसी के कैडेटों द्वारा प्रशासनिक न्यायमूर्ति के आगमन पर पाइलेटिंग की। वहीं एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के प्रचार-प्रसार के लिए केले से निर्मित उत्पादों का स्टॉल भी लगाया गया था। लोक अदालत में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से आए वादकारियों को पैरा लीगल वालंटियर्स द्वारा विधिक सहायता उपलब्ध कराई गई। कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारी, प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी, अधिवक्ता, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारी, पैरा लीगल वालंटियर्स तथा बड़ी संख्या में वादकारी उपस्थित रहे। इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की तरह से बताया गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य अधिक से अधिक मामलों का आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से त्वरित एवं सरल निस्तारण कराकर आमजन को सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है।

