जिलाधिकारी श्री सैमुअल पॉल एन. की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में शनिवार सायं आईजीआरएस की समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई।
बैठक में जिलाधिकारी द्वारा विभागवार लंबित आईजीआरएस प्रकरणों की गहन समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने समस्त अधिकारियों को निर्देश दिए कि आईजीआरएस अंतर्गत उनके पटल पर प्राप्त होने वाली शिकायतों का स्वयं अवलोकन करते हुए समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही निस्तारण के उपरांत शिकायतकर्ता से फीडबैक अनिवार्य रूप से प्राप्त किया जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि शिकायतों के निस्तारण में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा सभी अधिकारी शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
जांचकर्ता अधिकारी/कर्मचारी जांच हेतु स्थल पर स्वयं उपस्थित होकर प्राप्त जनशिकायतों का निस्तारण करे। सन्दर्भों की निस्तारण आख्या में जांचकर्ता अधिकारी द्वारा एवं संस्तुतिकर्ता अधिकारी द्वारा दिनांक तथा पद नाम की मोहर सहित हस्ताक्षरित आख्या प्रस्तुत किया जाए। शिकायतकर्ता से फीडबैक प्राप्त करे। राजस्व विभाग व पुलिस विभाग समन्वय करते हुए आख्या प्रस्तुत करें, जिससे प्राप्त आख्या में किसी प्रकार की विसंगति ना होने पाए।
इस अवसर पर अपर पुलिस अधीक्षक आयुष श्रीवास्तव, मुख्य राजस्व अधिकारी अजय अंबष्ट, नगर मजिस्ट्रेट इंद्रनंदन, सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।
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जौनपुर 31 मई, 2026 (सू0वि0) विज्ञप्ति संख्या-03
सफलता की कहानी
कॉक्लियर इम्प्लांट योजना ने बदली आयत की दुनिया, खामोशी से मुस्कान तक का प्रेरक सफर
कहते हैं कि जब समय पर सही उपचार और उचित सहयोग मिल जाए तो जीवन की कठिन से कठिन चुनौती भी अवसर में बदल सकती है। ऐसा ही प्रेरणादायक उदाहरण जौनपुर जनपद के केराकत तहसील, चंदवक थाना अंतर्गत ग्राम मढ़ी निवासी चार वर्षीय आयत शेख ने प्रस्तुत किया है, जिसके जीवन में उत्तर प्रदेश सरकार की कॉक्लियर इम्प्लांट योजना ने नई रोशनी और नई उम्मीद का संचार किया है।
आयत शेख, पिता असलम शेख, जन्म से ही श्रवण बाधित थी। वह न तो अपने आसपास की आवाजें सुन पाती थी और न ही स्पष्ट रूप से बोल सकती थी। परिवार के लिए यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक थी। माता-पिता अपनी बेटी के भविष्य को लेकर निरंतर चिंतित रहते थे और उसके सामान्य जीवन की कल्पना भी उनके लिए कठिन प्रतीत होती थी।
इसी बीच उन्हें दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा संचालित कॉक्लियर इम्प्लांट योजना की जानकारी प्राप्त हुई। यह योजना 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के ऐसे श्रवण बाधित बच्चों के लिए संचालित की जा रही है, जो सुनने और बोलने में असमर्थ हैं। योजना के अंतर्गत पात्र बच्चों को कॉक्लियर इम्प्लांट हेतु उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निःशुल्क वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
आयत के पिता असलम शेख ने जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी, जौनपुर, श्रीमती दिव्या शुक्ला से संपर्क कर अपनी पुत्री के उपचार के लिए आवेदन किया। विभाग द्वारा तत्परता एवं संवेदनशीलता के साथ आवश्यक चिकित्सीय परीक्षण कराए गए तथा निदेशालय स्तर से अनुमोदन प्राप्त होने के उपरांत इम्पैनल्ड सत्कृति हॉस्पिटल में 16 नवंबर 2025 को आयत का कॉक्लियर इम्प्लांट ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया।
ऑपरेशन के बाद आयत को नियमित रूप से स्पीच थैरेपी और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। उपचार के सकारात्मक परिणाम शीघ्र ही दिखाई देने लगे। जो बच्ची पहले किसी भी ध्वनि को नहीं सुन पाती थी, वह अब अपने आसपास की आवाजों को पहचानने लगी। धीरे-धीरे उसने अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों की आवाज सुनना शुरू किया तथा बोलने का प्रयास भी करने लगी। निरंतर अभ्यास और चिकित्सकीय मार्गदर्शन से उसकी सुनने और बोलने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया।
दिनांक 06 मई 2026 को उपनिदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, वाराणसी मंडल, वाराणसी की अध्यक्षता में आयोजित संवाद कार्यक्रम में आयत की प्रगति का अवलोकन किया गया। इस दौरान उसकी सुनने और बोलने की क्षमता में आए सकारात्मक बदलाव को देखकर उपस्थित अधिकारी एवं चिकित्सक भी उत्साहित हुए। आयत के परिवार के चेहरे पर खुशी और संतोष साफ दिखाई दे रहा था, क्योंकि उनकी बेटी अब सामान्य जीवन की ओर आत्मविश्वास के साथ कदम बढ़ा रही है।
आयत की सफलता की यह कहानी कॉक्लियर इम्प्लांट योजना की प्रभावशीलता और सरकार की जनकल्याणकारी सोच का सशक्त उदाहरण है। यह योजना न केवल श्रवण बाधित बच्चों को सुनने और बोलने का अवसर प्रदान कर रही है, बल्कि उनके परिवारों के जीवन में भी नई उम्मीद, आत्मविश्वास और खुशियां लेकर आ रही है।
आज आयत की मुस्कान, उसकी बढ़ती संवाद क्षमता और जीवन के प्रति उसका उत्साह इस बात का जीवंत प्रमाण है कि समय पर मिला उपचार, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और सरकार की संवेदनशील पहल किसी भी बच्चे के जीवन को नई दिशा दे सकती है। आयत की यह यात्रा हजारों परिवारों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और यह संदेश देती है कि सही समय पर उठाया गया एक कदम किसी बच्चे के पूरे भविष्य को बदल सकता है।

