(नईदिल्ली)जंतर मंतर विरोध प्रदर्शन: गुजरात में कई कार्यकर्ता नजरबंद, अहमदाबाद-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस भी रद्द
अहमदाबाद/नई दिल्ली ,10 अक्टूबर (आरएनएस)। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले गुजरात में पुलिस की कार्रवाई का मामला सामने आया है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और छात्र संगठनों के समर्थन वाले इस प्रदर्शन में शामिल होने की तैयारी कर रहे कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्र नेताओं और वकीलों को कथित तौर पर उनके घरों या पुलिस थानों में रोक दिया गया। इस कार्रवाई को लेकर राज्य में विवाद खड़ा हो गया है। इसी बीच पश्चिम रेलवे ने अहमदाबाद-दिल्ली स्वर्ण जयंती राजधानी एक्सप्रेस को भी रद्द कर दिया। रेलवे ने इसके पीछे परिचालन संबंधी कारण बताए हैं।
अहमदाबाद के सामाजिक कार्यकर्ता अश्विन वाघेला ने दावा किया कि उन्हें 54 अन्य साथियों के साथ पुलिस ने रोका था। उनके अनुसार, पुलिस ने उनसे लिखित आश्वासन मांगा कि वे दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन में शामिल नहीं होंगे। वाघेला ने बताया कि उन्हें रात दो बजे तक थाने में रखा गया और इसके बाद घर में नजरबंद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि वे किसी भी स्थिति में दिल्ली के प्रदर्शन में शामिल होने के अपने फैसले से पीछे नहीं हटेंगे।
उद्यमी और सामाजिक कार्यकर्ता स्नेह भावसार ने भी पुलिस कार्रवाई को लेकर आरोप लगाए। उनके अनुसार, सुबह लगभग 7:40 बजे पांच पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और बिना कोई कारण बताए उन्हें गुजरात विश्वविद्यालय पुलिस थाने ले गए। भावसार का दावा है कि शाम 4:15 बजे उनसे लिखित आश्वासन लिया गया कि वे दिल्ली में होने वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होंगे।
एक अन्य सामाजिक कार्यकर्ता देव देसाई ने बताया कि अपराध शाखा के अधिकारी सुबह करीब 8:30 बजे उनके घर पहुंचे और उन्हें दिल्ली नहीं जाने की चेतावनी दी।
इस पूरे घटनाक्रम में साबरकांठा जिले के वडवासा गांव की सरपंच, भारतीय छात्र महासंघ (एसएफआई) की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और उच्च न्यायालय की वकील सतीशा लेउवा की कथित नजरबंदी को लेकर भी विवाद हुआ। जानकारी के अनुसार, उन्हें साबरकांठा में उनके एक रिश्तेदार के घर पर रातभर पुलिस की निगरानी में रखा गया।
इस मामले को लेकर गुजरात उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ (जीएचसीएए) ने आपात बैठक बुलाई और पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई। संघ ने इस कार्रवाई को संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत प्राप्त अधिकारों का उल्लंघन बताया है। साथ ही, राज्य के पुलिस महानिदेशक और साबरकांठा के पुलिस अधीक्षक से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। संघ ने वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष कानून बनाने की मांग भी उठाई है।
पश्चिम रेलवे ने नौ अक्टूबर की शाम को चलने वाली अहमदाबाद-दिल्ली स्वर्ण जयंती राजधानी एक्सप्रेस को अंतिम समय में रद्द कर दिया। यह ट्रेन 10 अक्टूबर की सुबह दिल्ली पहुंचने वाली थी। रेलवे ने ट्रेन रद्द किए जाने के पीछे परिचालन संबंधी कारणों का हवाला दिया है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में ट्रेन रद्द होने और प्रस्तावित प्रदर्शन के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में कार्यकर्ताओं ने शनिवार को अहमदाबाद के एमजे पुस्तकालय के बाहर एकजुटता प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी। हालांकि, इस प्रदर्शन के लिए पुलिस से अनुमति नहीं मिलने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में वहां भी विरोध और विवाद की आशंका जताई जा रही है।
फिलहाल, गुजरात में कार्यकर्ताओं को रोके जाने और नजरबंद किए जाने के आरोपों पर पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है। वहीं, अधिवक्ता संघ की ओर से मांगे गए स्पष्टीकरण के बाद मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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