प्रयागराज एसटीएफ ने 50 हजार के इनामी को किया गिरफतार 

प्रयागराज एसटीएफ ने 50 हजार के इनामी को किया गिरफतार

दिल्ली में छिपकर रह रहा गैंगस्टर, लूट करने वाले गिरोह का सरगना

प्रयागराज। नवाबगंज थाने में गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में वांछित 50 हजार रुपये के इनामी बदमाश छैला बाबू सरोज को एसटीएफ की प्रयागराज फील्ड यूनिट ने नई दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। वह लंबे समय से फरार चल रहा था और गिरफ्तारी से बचने के लिए दिल्ली में छिपकर रह रहा था। एसटीएफ ने उसे 19 अगस्त की शाम दिल्ली के सरोजनी नगर थाना क्षेत्र स्थित वरिंदर कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड के गेट के सामने सड़क से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उसे स्थानीय थाने में दाखिल कराया गया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर प्रयागराज लाया गया।

पुलिस के अनुसार पूछताछ में छैला ने बताया कि वह प्रयागराज के नवाबगंज थाना क्षेत्र के बैरेज श्रृंगवेरपुर गांव का निवासी है। पुलिस के अनुसार वह एक संगठित आपराधिक गिरोह का सरगना है। वर्ष 2025 में उसने अपने साथियों के साथ मिलकर चोरी और लूट की कई घटनाओं को अंजाम दिया था। इन मामलों में प्रयागराज और आसपास के जिलों के विभिन्न थानों में मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक आरोपी पहले भी जेल जा चुका है। वर्ष 2026 में उसके और उसके एक साथी के खिलाफ नवाबगंज थाने में गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसके बाद से वह फरार चल रहा था।

एसटीएफ को सूचना मिली थी कि छैला बाबू सरोज दिल्ली में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के परिसर में रह रहा है। इसके बाद टीम ने निगरानी बढ़ाई और सटीक सूचना के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया।

 

 

 

 

अपमान के इरादे के बिना जातिसूचक शब्द से बुलाना एससी-एसटी एक्ट का अपराध नहीं

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अपमान का इरादा न होने पर जातिसूचक शब्द से पुकारने मात्र से एससी/एसटी अधिनियम के तहत अपराध नहीं बनता। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने बरेली के विशेष न्यायाधीश की ओर से जारी समन आदेश को रद्द कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति संतोष राय की एकल पीठ ने वेगराज सिंह और दौलत की याचिका पर दिया। इज्जतनगर थाने में मुख्य आरोपी हिम्मत सिंह के साथ उसके पिता वेगराज और भाई दौलत को नामजद करते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।

पुलिस जांच के दौरान पीड़िता के बयानों के आधार पर केवल मुख्य आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया, जबकि वेगराज और दौलत को क्लीनचिट दे दी गई। हालांकि, बाद में ट्रायल कोर्ट ने पीड़िता के बयान के आधार पर दोनों को समन जारी कर दिया था। याचियों ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला दिया। कहा कि आपराधिक मामलों में सीआरपीसी की धारा 319 (या बीएनएसएस की धारा 358) के तहत किसी भी व्यक्ति को केवल सामान्य आरोपों के आधार पर समन नहीं किया जा सकता। इसके लिए अदालत के पास ठोस और मजबूत साक्ष्य होने चाहिए। पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ताओं के खिलाफ जातिगत अपमान का कोई इरादा या विशिष्ट भूमिका साबित नहीं होती है। इसलिए निचली अदालत की ओर से जारी समन आदेश कानूनी रूप से टिकने योग्य

नहीं है।

 

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