बलौदाबाजार-भाटापारा) समाज प्रमुखों से पुलिस की अपील, अनजान फेरीवालों और संदिग्ध व्यक्तियों से रहें सतर्क

बलौदाबाजार-भाटापारा) समाज प्रमुखों से पुलिस की अपील, अनजान फेरीवालों और संदिग्ध व्यक्तियों से रहें सतर्क

बलौदाबाजार-भाटापारा, 13 अगस्त (आरएनएस)। बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस ने जिले के सभी समाज प्रमुखों, अध्यक्षों, पदाधिकारियों और वरिष्ठजनों से अपील की है कि वे अपने समाज के वार्षिक अधिवेशन, बैठकों और सामाजिक कार्यक्रमों के दौरान सदस्यों को सुरक्षा एवं सतर्कता के प्रति जागरूक करें। पुलिस ने आम नागरिकों से अपने आसपास आने वाले अजनबी और संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने की अपील की है।

पुलिस ने विशेष रूप से अज्ञात फेरीवालों से सतर्क रहने की सलाह दी है। गांव या मोहल्ले में आने वाले नए अथवा अनजान फेरीवालों के बारे में जानकारी रखने और उनका वैध पहचान पत्र अवश्य देखने कहा गया है। इसी तरह बिना सत्यापन के जड़ी-बूटी या अन्य सामान बेचने वाले अजनबियों को घर में प्रवेश नहीं देने की अपील की गई है। पुलिस के मुताबिक यदि आसपास कोई अज्ञात व्यक्ति संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त दिखाई देता है या किसी स्थान पर संदिग्ध रूप से रुकता अथवा घूमता नजर आता है, तो नागरिकों को तत्काल सतर्क होकर पुलिस को सूचना देनी चाहिए। पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे व्यक्तियों और अवैध प्रवास से जुड़ी किसी भी जानकारी को तत्काल पुलिस प्रशासन तक पहुंचाने की अपील की है। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखने की बात कही गई है।

० संदिग्ध गतिविधि दिखे तो करें सूचना

बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी मिलने पर बिना देरी पुलिस को सूचित करें। इसके लिए पुलिस ने टोल-फ्री नंबर 1800 233 1905 जारी किया है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम और पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। पुलिस ने कहा कि समाज प्रमुख अपने स्तर पर लोगों को जागरूक कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सामूहिक सतर्कता और समय पर सूचना से संदिग्ध गतिविधियों पर प्रभावी ढंग से रोक लगाई जा सकती है।

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(डुंडेरा) फुगड़ी और गेड़ी छत्तीसगढ़ के लोक तिहार हरेली की पहचान: भूपेश बघेल

डुंडेरा, 13 अगस्त (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोक त्योहारों और उनसे जुड़ी संस्कृति को सहेजने के संदेश के साथ डुंडेरा में ग्रामवासियों के सहयोग से हरेली महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मुख्य अतिथि और पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू अध्यक्ष के रूप में शामिल हुए। ग्रामीणों ने दोनों अतिथियों का पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया। उन्हें मिनी माता चौक से सजी हुई बैलगाड़ी में कार्यक्रम स्थल तक लाया गया। इस दौरान भूपेश बघेल स्वयं बैलगाड़ी हांकते नजर आए।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और हरेली तिहार की परंपराओं को लेकर चर्चा हुई। पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ का पारंपरिक त्योहार है, जिसमें खेती-किसानी में उपयोग होने वाले कृषि औजारों की पूजा की जाती है और चिला-रोटी का भोग चढ़ाया जाता है। उन्होंने हरेली में खेले जाने वाले पारंपरिक खेलों का उल्लेख करते हुए लोगों से पूछा कि कितने लोग गेड़ी चढ़ना जानते हैं। इसके बाद उन्होंने भूपेश बघेल की ओर इशारा करते हुए कहा कि उनकी नजर में एक व्यक्ति ऐसा है, जिसे वे जानते हैं और वह गेड़ी चढ़ना जानता है।

० फुगड़ी और गेड़ी को बताया हरेली की पहचान

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हरेली तिहार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पहले हरेली के दिन महिलाएं फुगड़ी खेला करती थीं। उन्होंने कहा कि फुगड़ी और गेड़ी छत्तीसगढ़ के पहले लोक त्योहार हरेली की पहचान हैं और इन पारंपरिक खेलों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है। बघेल ने कहा कि बदलते समय के साथ हरेली तिहार की पहचान इन पारंपरिक खेलों से दूर होती जा रही है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के लोक त्योहारों, संस्कृति और परंपराओं को सहेजने में हर पीढ़ी की भूमिका जरूरी है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं से जोड़ने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए।

० संस्कृति को सहेजने में हर पीढ़ी की भूमिका जरूरी

ताम्रध्वज साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसके त्योहारों और संस्कृति से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान छत्तीसगढ़ी त्योहारों और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया। पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर ने भी हरेली तिहार और छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को लेकर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में अतिथियों के विचारों ने ग्रामीणों को अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।

० लोकगीतों ने बांधा समां

हरेली महोत्सव में छत्तीसगढ़ी लोकगीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। कार्यक्रम में मौजूद ग्रामीण सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से मंत्रमुग्ध नजर आए। पूरे आयोजन में छत्तीसगढ़ी संस्कृति, परंपरा और लोक जीवन की झलक देखने को मिली।

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(रायगढ़) 300 सीसीटीवी फुटेज खंगाल 10 दिन में ट्रेलर डाला चोरी का खुलासा, 21 लाख की संपत्ति बरामद, 3 आरोपी गिरफ्तार

रायगढ़, 13 अगस्त (आरएनएस)। रायगढ़ के सीएमओ तिराहा से चोरी हुए ट्रेलर डाला के मामले का कोतवाली पुलिस ने 10 दिन की लगातार जांच के बाद खुलासा कर दिया है। पुलिस ने 300 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगालकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से चोरी गया ट्रेलर डाला और इंजन समेत करीब 13 लाख रुपये का मशरूका, वारदात में इस्तेमाल करीब 8 लाख रुपये कीमत की कार और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। कुल बरामद संपत्ति की कीमत करीब 21 लाख रुपये बताई गई है।

पुलिस के अनुसार आरोपियों ने पहले इलाके की रेकी कर चोरी की योजना बनाई और 27 जुलाई की रात करीब 2:30 बजे वारदात को अंजाम दिया। चोरी किए गए डाला को दूसरे ट्रेलर के इंजन से जोड़कर रायपुर ले जाया गया। पुलिस की नजर से बचने के लिए आरोपियों ने मुख्य मार्ग और टोल नाकों से दूरी बनाते हुए कच्चे और बाईपास रास्तों का इस्तेमाल किया। चोरी के डाला के आगे एक कार पायलेटिंग करते हुए चल रही थी।

० 300 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज बने अहम सुराग

मामले में ट्रांसपोर्ट नगर निवासी धीरज कुमार नवीन की शिकायत पर 2 अगस्त को कोतवाली थाने में अपराध क्रमांक 415/2026, धारा 303(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद थाना प्रभारी निरीक्षक अमित तिवारी ने टीम गठित कर जांच शुरू कराई। पुलिस टीम ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की जांच की। रात के अंधेरे में चोरी के वाहन की स्पष्ट पहचान मुश्किल थी, लेकिन फुटेज को जोड़ते-जोड़ते पुलिस को एक अहम सुराग मिला। चोरी का डाला ट्रेलर के इंजन से जोड़कर ले जाते दिखाई दिया। इसके आगे नीले रंग की कार पायलेटिंग करती नजर आई।

० रायगढ़ से रायपुर और फिर बिलासपुर तक पहुंची जांच

सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने दोनों वाहनों के रूट को ट्रेस किया। जांच में सामने आया कि आरोपी टोल और मुख्य मार्गों से बचते हुए बाईपास व कच्चे रास्तों से रायपुर पहुंचे थे। वाहन को रायपुर के कबीरनगर क्षेत्र तक ट्रेस करने के बाद पुलिस ने सीसीटीवी रिकॉर्ड के जरिए ट्रेलर मालिक की जानकारी जुटाई। सीसीटीवी रिकॉर्ड में ट्रेलर मालिक जसविन्दर सिंह उर्फ राहुल का नाम सामने आया। पूछताछ में उसने अपने साथी पवनदीप सिंह और संदीप कुमार खत्री के साथ मिलकर चोरी करना स्वीकार किया।

० 4.30 लाख में बेच दिया था चोरी का डाला

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि चोरी किए गए डाला को रायपुर निवासी हरचरण सिंह सरदार को 4 लाख 30 हजार रुपये में बेच दिया गया था। उसके कहने पर चोरी का डाला इंजन सहित बिलासपुर जिले के ग्राम बेलतरा में रखा गया था। पुलिस ने वहां दबिश देकर चोरी गया डाला और इंजन बरामद कर लिया। वारदात में पायलेटिंग के लिए इस्तेमाल की गई ष्टत्र 13 क्च्र 7639 नंबर की नीले रंग की कार, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 8 लाख रुपये है, भी जब्त की गई है। इसके अलावा आरोपियों के मोबाइल फोन भी पुलिस ने जब्त किए हैं।

० तीनों आरोपी गिरफ्तार, खरीदार फरार

पुलिस ने मामले में जसविन्दर सिंह उर्फ राहुल, पवनदीप सिंह और संदीप कुमार खत्री को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस जांच में सामने आया कि तीनों आरोपी ड्रायवरी के पेशे से जुड़े हैं और उन्हें वाहनों व रास्तों की जानकारी थी। इनमें संदीप कुमार खत्री करीब दो महीने पहले मोटरसाइकिल चोरी के मामले में जमानत पर बाहर आया था। चोरी का डाला खरीदने वाला हरचरण सिंह सरदार फिलहाल फरार है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।

० टीमवर्क से मिली सफलता

एसएसपी शशि मोहन सिंह के दिशा-निर्देशन में हुई इस कार्रवाई में कोतवाली पुलिस की 10 दिनों की लगातार मेहनत निर्णायक साबित हुई। करीब 300 सीसीटीवी फुटेज की जांच, तकनीकी साक्ष्यों और पायलेटिंग कर रही कार को अहम सुराग बनाकर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। पुलिस ने चोरी गया करीब 13 लाख रुपये का डाला-इंजन बरामद करने के साथ वारदात में इस्तेमाल 8 लाख रुपये की कार भी जब्त की है।

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(रायपुर) स्वतंत्रता दिवस एवं आगामी त्यौहारों के मद्देनजर पश्चिम जोन पुलिस की सघन कार्रवाई

० पश्चिम जोन के विभिन्न थाना क्षेत्रों में आबकारी एक्ट के तहत कुल 140 प्रकरण, कुल 17 प्रतिबंधात्मक कार्रवाई तथा 03 गिरफ्तारी वारंट की तामिली की गई।

रायपुर,13 अगस्त (आरएनएस)। पुलिस उपायुक्त पश्चिम क्षेत्र रोबिनसन गुड़िया (भापुसे) एवं अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त पश्चिम क्षेत्र श्री राहुल देव शर्मा निर्देशन एवं सहायक पुलिस आयुक्त आज़ाद चौक, पुरानी बस्ती, न्यू राजेन्द्र नगर में मार्गदर्शन में आगामी त्यौहार एवं स्वतंत्रता दिवस को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 12/08/2026 को रायपुर कमिश्नरेट जोन पश्चिम के अंतर्गत सभी थाना क्षेत्रों में अपराध नियंत्रण एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने हेतु विशेष अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान गुंडा बदमाश, निगरानी बदमाश एवं नए उभरते बदमाशों की सघन चेकिंग की गई। अड्डेबाजी एवं आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन करने वालों के विरुद्ध आबकारी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई एवं गिरफ्तारी वारंटों की तामिली की गई।पुलिस द्वारा स्वतंत्रता दिवस एवं आगामी त्यौहारों के मद्देनजर अपराधियों एवं असामाजिक तत्वों पर सतत निगरानी रखते हुए सघन चेकिंग, प्रतिबंधात्मक कार्रवाई, अड्डेबाजी के विरुद्ध कार्रवाई तथा सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन के मामलों में वैधानिक कार्रवाई लगातार जारी रखी जाएगी।

थाना-वार कार्रवाई के आंकड़े

1. थाना पुरानी बस्ती — आबकारी एक्ट के तहत 26 प्रकरण दर्ज किए गए।

2. थाना डीडी नगर — आबकारी एक्ट के तहत 25 प्रकरण, 03 गिरफ्तारी वारंट की तामिली तथा 01 प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई।

3. थाना आमानाका — आबकारी एक्ट के तहत 20 प्रकरण तथा 02 प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई।

4. थाना आजाद चौक — आबकारी एक्ट के तहत 06 प्रकरण दर्ज किए गए।

5. थाना कबीर नगर — आबकारी एक्ट में 07 तथा 11 प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई।

6. थाना सरस्वती नगर — आबकारी एक्ट के तहत 02 प्रकरण दर्ज किए गए।

7. थाना न्यू राजेंद्र नगर — आबकारी एक्ट के तहत 23 प्रकरण दर्ज किए गए।

8. थाना मुजगहन — धारा 34(2) आबकारी एक्ट के तहत 01 प्रकरण दर्ज किया गया।

9. थाना टिकरापारा — आबकारी एक्ट के तहत 30 प्रकरण तथा 03 प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई।

होटल एवं प्रतिष्ठानों में समाधान ऐप डाउनलोड अभियान

पश्चिम क्षेत्र के थाना क्षेत्रो में होटल एवं अन्य प्रतिष्ठानों को समाधान ऐप से जोड़ने हेतु विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान होटल एलीफेंट, श्री अप्पाजी होटल, हैप्पी हांवर एवं होटल कॉमिक रेस्टोरेंट एवं अन्य प्रतिष्ठानों में समाधान ऐप डाउनलोड कराया गया तथा संचालकों को ऐप के उपयोग एवं सुरक्षा संबंधी आवश्यक जानकारी दी गई।

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(रायपुर) (महत्वपूर्ण)नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ के बाद अब विकास का नया दौर, सरकार की नजर 2031 के विकसित बस्तर पर

0 सरकार ने बनाया नया रोड मैप

0 शिक्षा, रोजगार, सड़क, स्वास्थ्य, कृषि, वनोपज और स्थानीय अर्थव्यवस्था के विकास से भरना

रायपुर 13 अगस्त (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ लंबे समय से चल रही सुरक्षा मुहिम के बाद अब सरकार की रणनीति का अगला चरण बस्तर और नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों को विकास, रोजगार और बेहतर बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने पर केंद्रित है। केंद्र सरकार के अनुसार 31 मार्च को देश ने वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ निर्णायक उपलब्धि हासिल की। अब छत्तीसगढ़ में चुनौती केवल सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की नहीं, बल्कि नक्सल प्रभावित इलाकों में स्थायी शांति और विकास का माहौल तैयार करने की है।

सुरक्षा से विश्वास और विश्वास से विकास का रोडमैप

केंद्र सरकार ने बस्तर के लिए अब ‘सुरक्षा से विश्वास, विश्वास से विकास, विकास से समृद्धि और समृद्धि से संतृप्तिÓ की दिशा तय की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मई 2026 में जगदलपुर में कहा था कि सिर्फ नक्सल-मुक्त होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि 2031 तक बस्तर को पूरी तरह विकसित क्षेत्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य है। आने वाले पांच वर्षों में बस्तर की आय को कई गुना बढ़ाने का लक्ष्य भी सामने रखा गया है। इस नई रणनीति में सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ गांव-गांव तक शासन की पहुंच, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, वन उपज और अधोसंरचना को प्राथमिकता दी जा रही है।

सुरक्षा कैंपों को विकास के केंद्र में बदलने की तैयारी

नक्सल अभियान के दौरान स्थापित किए गए सुरक्षा कैंप अब केवल सुरक्षा व्यवस्था के केंद्र नहीं रहेंगे। सरकार की योजना इनमें से एक हिस्से को ‘वीर शहीद गुंडाधुर डेराÓ जैसे विकास एवं जनसेवा केंद्रों में बदलने की है। ‘सेवा डेराÓ मॉडल के माध्यम से सरकारी योजनाओं और सेवाओं को ग्रामीणों के दरवाजे तक पहुंचाने की तैयारी है। सरकार का जोर योजनाओं के शत-प्रतिशत लाभार्थी कवरेज पर है।

इसका उद्देश्य यह है कि जिन क्षेत्रों में पहले सरकारी अमले की पहुंच सीमित रही, वहां अब राशन, पेंशन, स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग, दस्तावेज, रोजगार और अन्य योजनाओं का लाभ स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो।

गांवों में तेजी से विकास कार्य

नक्सल प्रभाव से मुक्त हुए गांवों में अब विकास की गति बढ़ाने की योजना है। सरकार ने अति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के तीव्र विकास के लिए ‘नक्सल मुक्तÓ ग्रामों में एक-एक करोड़ रुपये तक के विकास कार्यों को स्वीकृति देने की पहल की है। इससे सड़क, नाली, पेयजल, सामुदायिक भवन, स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य स्थानीय जरूरतों को पूरा करने की दिशा में काम किया जा सकता है। सरकार की कोशिश है कि सुरक्षा बलों की मौजूदगी के साथ-साथ प्रशासनिक संस्थाएं भी स्थायी रूप से मजबूत हों, ताकि ग्रामीणों को किसी काम के लिए दूर के शहरों पर निर्भर न रहना पड़े।

वन उपज और कृषि बनेगी आय का बड़ा आधार

बस्तर की अर्थव्यवस्था में कृषि और वनोपज की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार की आगामी योजना में वन उपज और कृषि से होने वाले मुनाफे का अधिकतम लाभ स्थानीय आदिवासी समुदाय तक पहुंचाने पर जोर है। इससे तेंदूपत्ता, इमली, महुआ, साल बीज सहित अन्य लघु वनोपज के मूल्य संवर्धन और बाजार व्यवस्था को मजबूत करने की संभावना है।

स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयां, संग्रहण केंद्र, बेहतर बाजार संपर्क और सहकारी संस्थाओं को मजबूत किया जाता है तो ग्रामीणों की आय बढ़ाने के साथ स्थानीय रोजगार के अवसर भी तैयार हो सकते हैं।

आदिवासी महिलाओं के लिए डेयरी मॉडल

बस्तर में सहकारी डेयरी का बड़ा नेटवर्क खड़ा करने की योजना भी सामने आई है। सरकार ने आने वाले समय में आदिवासी महिलाओं को पशुपालन से जोड़ने और प्रत्येक महिला को एक गाय तथा एक भैंस उपलब्ध कराने की योजना का उल्लेख किया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की नियमित आय बढ़ाना और महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना है।

यदि इसे दुग्ध संग्रहण, पशु चिकित्सा, चारा, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ा जाता है तो यह बस्तर के ग्रामीण अर्थतंत्र में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।

सरेंडर नक्सलियों का पुनर्वास और नई जिंदगी

सरकार के रोडमैप में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को मुख्यधारा में लाना भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। अब केवल आत्मसमर्पण कराना पर्याप्त नहीं माना जा रहा, बल्कि उनके मनोवैज्ञानिक आकलन, कौशल प्रशिक्षण और शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है। लक्ष्य है कि पूर्व नक्सली सम्मानजनक तरीके से रोजगार और सामाजिक जीवन से जुड़ सकें। हाल में बस्तर में पूर्व माओवादियों का पुलिस के साथ संवाद और स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय आयोजनों में भागीदारी की तैयारी भी पुनर्वास एवं विश्वास बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत के रूप में सामने आई है।

युवाओं पर विशेष फ ोकस

बस्तर के युवाओं को नक्सली विचारधारा से दूर रखने और उन्हें शिक्षा, खेल तथा रोजगार से जोड़ना सरकार की दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा है। बस्तर ओलंपिक्स और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन युवाओं को खेल तथा सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति के पुनर्जीवन का माध्यम बनाए जा रहे हैं। आगे कौशल विकास, रोजगारपरक प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा और स्थानीय उद्योगों से युवाओं को जोड़ने पर जोर बढ़ सकता है।

शिक्षा और स्वास्थ्य की पहुंच बढ़ाने की चुनौती

नक्सल प्रभावित इलाकों में सबसे बड़ी जरूरतों में शिक्षा और स्वास्थ्य शामिल हैं। अब सुरक्षा वातावरण बेहतर होने के बाद स्कूलों, छात्रावासों, आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों को मजबूत करने की संभावना बढ़ी है। सरकार की चुनौती यह होगी कि बस्तर के दूरस्थ गांवों तक डॉक्टर, शिक्षक, स्वास्थ्यकर्मी और अन्य सरकारी कर्मचारियों की नियमित मौजूदगी सुनिश्चित की जाए। मोबाइल स्वास्थ्य सेवाओं और डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार भी इस दिशा में उपयोगी हो सकता है।

सड़क, पुल और कनेक्टिविटी पर जोर

नक्सलवाद के कारण लंबे समय तक प्रभावित रहे क्षेत्रों में सड़क और संचार नेटवर्क का विस्तार विकास की बुनियादी जरूरत है। सुरक्षा कैंपों के विस्तार के साथ कई दुर्गम इलाकों तक सड़क संपर्क बेहतर हुआ है। अब इसी नेटवर्क को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की जरूरत होगी।

बेहतर सड़क का मतलब केवल आवागमन नहीं, बल्कि किसानों की उपज बाजार तक पहुंचना, मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना, बच्चों का स्कूल जाना और ग्रामीणों को सरकारी सेवाएं मिलना भी है।

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती—विकास को स्थायी बनाना

नक्सलवाद का प्रभाव कम होने के बाद भी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि सुरक्षा की उपलब्धि को स्थायी सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन में बदला जाए। केंद्र की रणनीति में सुरक्षा, विकास और कल्याण को एक साथ आगे बढ़ाने पर जोर रहा है। विशेष केंद्रीय सहायता और अन्य योजनाओं के जरिए नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और जनकल्याण को बढ़ावा दिया गया है।

अब सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि विकास परियोजनाएं केवल बड़े शहरों या मुख्य सड़कों तक सीमित न रहें, बल्कि अबूझमाड़ और अन्य दूरस्थ गांवों तक भी पहुंचें।

पांच साल में बस्तर को नई पहचान देने की तैयारी

सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य बस्तर को केवल ‘नक्सल प्रभावित क्षेत्रÓ की पहचान से बाहर निकालकर पर्यटन, कृषि, वनोपज, संस्कृति, खेल और रोजगार के नए केंद्र के रूप में विकसित करना है। 2031 तक विकसित बस्तर का लक्ष्य इसी व्यापक परिवर्तन की दिशा में देखा जा रहा है। नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा बलों की भूमिका निर्णायक रही है, लेकिन अब अगला चरण प्रशासन, स्थानीय समुदाय, युवा, महिलाएं, किसान और आदिवासी समाज की भागीदारी से तय होगा। सरकार के सामने चुनौती यही है कि बंदूक और भय के दौर से निकल चुके बस्तर में विश्वास, रोजगार और विकास को स्थायी आधार मिले।

सरकार का नया रोडमैप

नक्सलवाद के बाद खाली हुई जगह को सिर्फ सुरक्षा से नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, सड़क, स्वास्थ्य, कृषि, वनोपज और स्थानीय अर्थव्यवस्था के विकास से भरना।

एसएस

 

(धमतरी) सिहावा पुलिस की जुआरियों पर बड़ी कार्रवाई, 10 गिरफ्तार

० काटपत्ती जुआ खेलते रंगे हाथ पकड़े गए 10 जुआरी, 6,730 रुपये नगद और 52 पत्ती ताश जब्त

धमतरी, 13 अगस्त (आरएनएस)। जिले में जुआ-सट्टा और अन्य अवैध गतिविधियों के खिलाफ धमतरी पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सिहावा पुलिस ने 12 अगस्त को सार्वजनिक स्थानों पर रुपये-पैसों की हार-जीत का दांव लगाकर काटपत्ती जुआ खेल रहे 10 जुआरियों को अलग-अलग दो प्रकरणों में गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 6,730 रुपये नगद और 52 पत्ती ताश जब्त की है।

पुलिस के अनुसार, पहला मामला ग्राम सेमरा गौठान का है। यहां स्ट्रीट लाइट के नीचे जुआ खेलने की सूचना पर पुलिस टीम ने दबिश देकर छन्नू लाल साहू (39) और वेद कुमार नेताम (26) को रंगे हाथ पकड़ा। आरोपियों के कब्जे से 530 रुपये नगद और 52 पत्ती ताश बरामद हुई। मामले में अपराध क्रमांक 62/26 के तहत छत्तीसगढ़ जुआ निवारण अधिनियम 2022 की धारा 3(2) के तहत कार्रवाई की गई।

दूसरी कार्रवाई ग्राम रतावा के गौरा चौक में की गई। यहां स्ट्रीट लाइट के नीचे काटपत्ती जुआ खेल रहे सोनसाय नेताम (27), जीतेन्द्र कुमार नेताम (34), सिवन नेताम (35), केशव नेताम (35), सोनऊ राम नेताम (30), गुलाब सिंह ठाकुर (62), महेश पल्ली (62) और लीलेश्वर पवार (62) को पुलिस टीम ने घेराबंदी कर गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से 6,200 रुपये नगद और 52 पत्ती ताश जब्त की गई। इस मामले में अपराध क्रमांक 64/26 के तहत धारा 3(2) छत्तीसगढ़ जुआ निवारण अधिनियम 2022 में प्रकरण दर्ज किया गया।

इस तरह दोनों मामलों में सिहावा पुलिस ने कुल 10 जुआरियों को गिरफ्तार कर 6,730 रुपये नगद तथा ताश की गड्डियां जब्त की हैं। पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई पूरी कर उन्हें न्यायालय के समक्ष पेश किया।

धमतरी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिले में जुआ-सट्टा और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों को पनपने नहीं दिया जाएगा। अवैध गतिविधियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।

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(दुर्ग) 16 अगस्त से ऑटो-ई-रिक्शा चालकों का रजिस्ट्रेशन, मिलेगा क्यूआर कोड

० यात्रियों की सुरक्षा और ऑटो संचालन को व्यवस्थित करने दुर्ग यातायात पुलिस की पहल, 150 चालकों को दी गई योजना की जानकारी

दुर्ग, 13 अगस्त (आरएनएस) । यात्रियों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने और ऑटो एवं ई-रिक्शा चालकों की पहचान व संचालन को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से यातायात पुलिस दुर्ग ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। पुलिस महानिरीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग श्री विजय अग्रवाल के निर्देशानुसार 16 अगस्त 2026 से ऑटो एवं ई-रिक्शा चालकों का रजिस्ट्रेशन कर उन्हें क्तक्र कोड जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

इसी सिलसिले में बुधवार को पुलिस कंट्रोल रूम में करीब 150 ऑटो चालकों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने चालकों को क्तक्र कोड रजिस्ट्रेशन की योजना, उसके उद्देश्य और यात्रियों की सुरक्षा में इसकी उपयोगिता की जानकारी दी।

रजिस्ट्रेशन के बाद प्रत्येक चालक को जारी क्तक्र कोड के माध्यम से यात्रियों को ऑटो चालक की पहचान और सत्यापन संबंधी जानकारी प्राप्त करने में सुविधा होगी। इससे यात्रियों में सुरक्षित यात्रा का भरोसा बढ़ने के साथ ऑटो एवं ई-रिक्शा संचालन में पारदर्शिता भी आएगी।

यातायात पुलिस द्वारा ऑटो चालकों के लिए निर्धारित स्थान, रोटेशन व्यवस्था और किराया निर्धारण को भी व्यवस्थित किया जाएगा। चालकों को निर्देश दिए गए कि वे अपने वाहनों के सभी दस्तावेज पूर्ण एवं अद्यतन रखें, वैध ड्राइविंग लाइसेंस के बिना वाहन न चलाएं और यातायात नियमों का पालन करें।

जिन ऑटो चालकों के वाहन संबंधी दस्तावेज पूर्ण नहीं हैं, उनके दस्तावेज परिवहन विभाग से

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