माँ ललिता देवी का कात्यायनी स्वरूप में दिव्य श्रृंगार
सप्तमी पर कालरात्रि को गुलाब-गुड़हल और मिट्टी के दीयों से सजेगा दरबार
प्रयागराज। शारदीय नवरात्रि के छठें दिन मीरापुर स्थित प्राचीन राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी सिद्धपीठ माँ ललिता देवी मंदिर में माता के कात्यायनी स्वरूप का बहुरंगी फूलों से भव्य एवं दिव्य श्रृंगार किया गया। बेला, गेंदा, गुलाब व सुगंधित फूलों से सजा माँ का दरबार अलौकिक लग रहा था।
प्रातः मंगला आरती के साथ दिन का शुभारंभ हुआ। नारियल, चुनरी चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। कई परिवारों ने मुंडन और कर्णछेदन संस्कार भी संपन्न कराए।
मंदिर समिति के अध्यक्ष हरिमोहन वर्मा और महामंत्री प्रदीप जायसवाल ने बताया कि 11 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा दुर्गा सप्तशती का सस्वर पाठ किया गया। सायंकाल महिला मंडली द्वारा ढोलक-मंजीरे की थाप पर माता के भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी गई।
रात्रि में 21 ब्राह्मणों द्वारा सत्य चंडी महापाठ का आयोजन हुआ। मुख्य यजमान संजीव अग्रवाल रहे, नेतृत्व आचार्य पं. शिव मूरत मिश्रा ने किया। रात्रि 12 बजे शयन आरती और विशाल भंडारे में हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
मीडिया प्रभारी सुमित श्रीवास्तव ने बताया कि कल सप्तमी पर माँ ललिता देवी का कालरात्रि स्वरूप में विशेष श्रृंगार होगा। माता के दरबार को गुलाब व गुड़हल के फूलों और मिट्टी के देशी घी के दीयों से सजाया जा
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