अयोध्या के साथ ही सीएम योगी के लिए भी प्रतिष्ठा का प्रश्न थी अयोध्या,आखिरकार खिला कमल

अयोध्या।(डा.अजय तिवारी जिला संवाददाता)सीएम योगी के लिये सबके प्रतिष्ठा की सीट राम नगरी अयोध्या रही।जिसपर इस सीट से चुनाव लड़ रहे वेद गुप्ता ने यह सीट एक बार फिर जीतकर यह भरोसा दिलाया कि इस क्षेत्र की जनता के दिल में योगी मोदी ही बसते है।मालूम हो कि इसी कड़ी में इससे पहले
सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने पद पर रहते सबसे ज्यादा अयोध्या का 45 फेरा लगाया,।अयोध्या उन्हें प्रिय है तो उनकी प्रतिष्ठा से भी  जुड़ी है।अयोध्या उन्हें प्रिय है तो उनकी प्रतिष्ठा से भी जुड़ी है।भारतीय जनता पार्टी के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए भी प्रतिष्ठा का प्रश्न अयोध्या सदर विधानसभा क्षेत्र अंतिम समय में गणित बदलने से हल हो गया।इस प्रतिष्ठा को बचाने के लिए अंतिम समय में अयोध्या के संतों और स्वयं योगी आदित्यनाथ को सड़क पर उतर कर मोर्चा संभालना पड़ा।सारी मेहनत सफल इस लिए हो गई क्योंकि विपक्षी के सजातीय मतों ने सभी मतभेद भुलाकर अयोध्या की आन बचाने के लिए समीकरण ही उलट दिया।वही बीते पांच साल से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यदि किसी क्षेत्र पर सर्वाधिक केंद्रित थे,वह थी अयोध्या। शपथ लेने के साथ अयोध्या के विकास को नया आयाम और रामनगरी की पहचान विश्व पर्यटन केंद्र में लाने के लिए उन्होंने त्वरित योजना भव्य दीपोत्सव प्रारंभ किया।भगवान राम की विशाल प्रतिमा स्थापित करने की योजना प्रारंभ कर दी।अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट प्रारंभ करने के लिए तेजी से प्रयास किए और अयोध्या की कायापलट वैश्विक पर्यटन मानक पर करने की योजना भी क्रियान्वयन के स्तर पर ले आए। अरबों खरबों की परियोजनाओं की झड़ी लगा दी। अयोध्या की आने वाले सभी राष्ट्रीय राजमार्ग के फोरलेन और सिक्सलेन की परियोजनाओं का क्रियान्वयन प्रारंभ करने के साथ ही अयोध्या की सीमा विस्तार और नगर निगम बनाने का काम भी किया था। बतौर मुख्यमंत्री उन्होंने जितने फेरे अयोध्या के लगाए, उतने कहीं के नहीं लगाए।इन सब के बावजूद इलाकाई विधायक की उदासीनता और विकास योजना को लेकर उपजी संशय की स्थिति ने सारे विकास और राम मंदिर निर्माण जैसे अहम कार्य पर पानी फिरता दिख रहा था। संतों के प्रयास से अयोध्या सदर की जीत से भाजपा की उसके गढ़ में नाक बची तो उल्लास छा गया हैl अयोध्या के प्रमुख धमार्चार्यों ने हनुमानगढ़ी में लड्‌डू चढ़ाकर उसका प्रसाद बांटा।रामनगरी में जीत के उल्लास व संतों की में भाजपा की सरकार बनने  से चहकती अयोध्या दिखी, बीकापुर व रुदौली में विपक्ष की कड़ी चुनौती का मुकाबला करने के बाद भी जीतने में मदद मिली।ऐसे में संत समाज और स्वयं योगी आदित्यनाथ ने कमान संभाली और न केवल इस सीट की प्रतिष्ठा बचा ली बल्कि दो और फंसी सीटों की नैया पार लगा दी।बीकापुर और रुदौली में विपक्ष की कड़ी चुनौती का मुकाबला करने के बाद भी जीतने में मदद मिल गई।हालांकि मुख्यमंत्री के सजातीय मतों ने अयोध्या जिले की गोसाईगंज सीट का समीकरण गड़बड़ा दिया और वहां उनकी सभाएं काम नहीं आईं। पड़ोसी जिले अंबेडकर नगर से सटी इस सीट पर पड़ोस का असर रहा और यह सीट बच नहीं सकी, जबकि जिले के विकास की योजनाओं का सर्वाधिक लाभ इस क्षेत्र को ही मिलेगा।मिल्कीपुर में प्रत्याशी बदलने की मांग की अनदेखी ने वहां विपक्ष की राह आसान की, वहीं प्रसिद्ध वैष्णवपीठ श्रीरामवल्लभाकुंज के प्रमुख व नित्य सरयू आरती के संरक्षक स्वामी राजकुमार दास कहते हैं कि साधु के लिए देश व धर्म महत्वपूर्ण है और जो इसके लिए काम करेगा वह हम सभी के लिए प्रिय होगा हीl एक तो सीएम योगी आदित्यनाथ साधु हैं और वे अयोध्या से बेहद प्रेम करते हैंl भगवान श्रीराम व हनुमानजी के प्रति उनका समर्पण जगजाहिर हैlहम सभी संतों का जो फर्ज था उसे किया और अंतिम सांस तक करते ही रहेंगेl राजा को प्रजा के लिए समर्पित होगा चाहिए और यह सारे गुण पीएम नरेंद्र मोदी व सीएम योगी आदित्यनाथ में मौजूद हैंl

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