उत्तर मध्य भारत में तीसरे मोर्चे की आहट, सियासी हलचल तेज। राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा बनेगा थर्ड फ्रंट ध्रुवीकरण का केन्द्र।*

**उत्तर मध्य भारत में तीसरे मोर्चे की आहट, सियासी हलचल तेज। राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा बनेगा थर्ड फ्रंट ध्रुवीकरण का केन्द्र।*

 

प्रतापगढ़/लखनऊ। उत्तर मध्य भारत की राजनीति में एक नए समीकरण की चर्चा तेज हो गई है। राष्ट्रवादी पीपुल्स पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आर.बी. सिंह ने बताया है कि तैयारी पूरी हो चुकी है और राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा की घोषणा, संयोजक तथा आगामी कार्ययोजना तय करने के लिए जल्द लखनऊ में बैठक होने जा रही है।

 

तीसरे मोर्चे के गठन की तैयारी ने सत्तारूढ़ दलों की चिंता बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि इस मोर्चे में 30 से अधिक छोटे-बड़े राजनीतिक संगठनों को जोड़ने की कवायद लगभग पूरी हो चुकी है, जिसमें नित नये संगठन जुड़ रहे हैं। विचारधारा, कार्यक्रम और मुद्दों के आधार पर अन्य राष्ट्रवादी संगठनों से भी संपर्क किया जा रहा है।

 

तीसरे मोर्चे के सूत्रों के अनुसार, यह गठबंधन “न लेफ्ट, न राइट” की नीति पर चलते हुए समानता, न्याय और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देगा। साथ ही, जातिवादी राजनीति और कथित जातिवादी कानूनों के खिलाफ खुलकर आवाज उठाने की बात कही जा रही है।

 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह मोर्चा संगठित रूप लेता है, तो 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में नया समीकरण बन सकता है। तीसरे मोर्चे के तहत संयुक्त प्रत्याशी उतारने की रणनीति पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे सीधी टक्कर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को मिल सकती है।

 

हालांकि, इस पहल की सफलता संगठनात्मक मजबूती, नेतृत्व की स्वीकार्यता और जमीनी पकड़ पर निर्भर करेगी। फिलहाल, तीसरे मोर्चे की आहट ने प्रदेश की सियासत में हलचल जरूर बढ़ा दी है।

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