एलडीए संपत्ति के फर्जी दस्तावेज तैयार कर बेचने वाले गिरोह का वांछित आरोपी चार साल बाद गिरफ्तार

एलडीए संपत्ति के फर्जी दस्तावेज तैयार कर बेचने वाले गिरोह का वांछित आरोपी चार साल बाद गिरफ्तार
लखनऊ, (आरएनएस)। संपत्तियों के फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेज तैयार कर अवैध रूप से बिक्री करने वाले गिरोह के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में क्राइम ब्रांच लखनऊ की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। टीम ने एलडीए की संपत्ति के फर्जी दस्तावेज तैयार कर बिक्री करने के मामले में लगभग चार वर्षों से फरार चल रहे वांछित अभियुक्त सचिन सिंह को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार अभियुक्त को 1 सितंबर 2026 को शाम 5:20 बजे छोटा भरवारा स्थित इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप के पास, गोमतीनगर विस्तार से गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई पुलिस आयुक्त तरुण गाबा एवं संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय अपर्णा कुमार के निर्देशन तथा पुलिस उपायुक्त अपराध अनिल कुमार यादव और अपर पुलिस उपायुक्त अपराध किरन यादव के कुशल पर्यवेक्षण में की गई।
मामला गोमतीनगर थाने में दर्ज मुकदमा संख्या 805/2022 से संबंधित है। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत कार्रवाई की गई थी। प्रकरण में एलडीए के विराज खण्ड, गोमतीनगर स्थित भूखंड संख्या 2/81, क्षेत्रफल 1250 वर्गफीट के फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेज तैयार कर संपत्ति को अवैध रूप से बेचने का मामला सामने आया था।विवेचना के दौरान पता चला कि एलडीए के पोर्टल पर उक्त संपत्ति से संबंधित फर्जी दस्तावेज तैयार कराए गए और उन्हें शिवानी रस्तोगी के नाम से तैयार किया गया। इसके बाद इन्हीं कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति वैष्णवी सोनी को बेच दी गई। बाद में वैष्णवी सोनी ने उक्त संपत्ति को 35 लाख रुपये में रंजना देवी को विक्रय कर दिया।पुलिस के मुताबिक बिक्री से प्राप्त धनराशि वैष्णवी सोनी के बैंक खाते में आई थी। इस धनराशि के लाभांश का एक हिस्सा अभियुक्त सचिन सिंह ने अपने बैंक खाते में प्राप्त कर उसका उपयोग किया। इसी वित्तीय लेन-देन के आधार पर विवेचना में सचिन सिंह की आपराधिक साजिश में संलिप्तता सामने आई।मामले में नाम सामने आने के बाद सचिन सिंह लगातार गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार चल रहा था। पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश और अन्य कार्रवाई कर रही थी। विवेचना में यह भी सामने आया कि सचिन सिंह विभूतिखण्ड, गोमतीनगर स्थित होटल जेएमडी इन का संचालन करता था। पुलिस को जानकारी मिली थी कि इसी स्थान पर सह-अभियुक्तों के साथ फर्जी दस्तावेज तैयार करने की योजना बनाई जाती थी।पुलिस कार्रवाई की भनक लगने के बाद सचिन सिंह फरार हो गया था। वर्तमान में उसके जनपद ललितपुर में डैम का ठेका लेकर मत्स्य पालन का कारोबार करने की जानकारी सामने आई। लगातार की जा रही पुलिस कार्रवाई और तकनीकी निगरानी के माध्यम से उसकी गतिविधियों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई गई। इसके आधार पर पुलिस टीम ने उसकी लोकेशन का पता लगाकर उसे गिरफ्तार कर लिया।पुलिस के अनुसार इस प्रकरण में कुल पांच अभियुक्तों की संलिप्तता सामने आई है। इनमें तीन अभियुक्तों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और उनके विरुद्ध आरोप-पत्र न्यायालय में प्रेषित किया जा चुका है। एक अभियुक्त की मृत्यु हो चुकी है। वहीं लगभग चार वर्षों से फरार चल रहे वांछित अभियुक्त सचिन सिंह की गिरफ्तारी अब क्राइम ब्रांच की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा कर ली गई है।गिरफ्तार अभियुक्त सचिन सिंह पुत्र सूरज पाल सिंह, ग्राम जेहटा, थाना दुबग्गा, लखनऊ का निवासी है और उसकी उम्र लगभग 36 वर्ष है। उसकी शैक्षिक योग्यता स्नातक (बीएससी) बताई गई है।पुलिस के अनुसार सचिन सिंह का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। उसके विरुद्ध थाना नाका हिण्डोला में वर्ष 2015 में मुकदमा संख्या 240/15, धारा 489बी और 489सी भारतीय दंड संहिता के तहत फर्जी भारतीय मुद्रा से संबंधित मामला दर्ज है। इसके अलावा थाना गोमतीनगर में मुकदमा संख्या 805/22 में धारा 419, 420, 467, 468, 471 और 120बी भारतीय दंड संहिता तथा थाना विभूतिखण्ड में वर्ष 2023 में मुकदमा संख्या 537/23, धारा 406 और 420 भारतीय दंड संहिता के तहत मामला दर्ज है।अपर पुलिस उपायुक्त अपराध किरन यादव ने कहा कि एलडीए संपत्ति से जुड़े इस प्रकरण में लगभग चार वर्षों से फरार चल रहे वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में अन्य अभियुक्तों के विरुद्ध भी कार्रवाई पूर्ण की जा चुकी है। एलडीए संपत्तियों में फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।

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