कुटौंद शाखा नहर के पुनर्स्थापना से 1320 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को सिंचाई सुविधा

कुटौंद शाखा नहर के पुनर्स्थापना से 1320 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को सिंचाई सुविधा

लखनऊ ( आरएनएस )। बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और किसानों को पर्याप्त जल उपलब्ध कराने के लिए कुटौंद शाखा नहर के पुनर्स्थापना कार्य से किसानों को राहत मिली है। बेतवा नहर प्रखंड द्वितीय, उरई के अंतर्गत कुटौंद शाखा के किलोमीटर 45.000 से 105.210 तक कराए गए पुनर्स्थापना कार्य से नहर की जल वहन क्षमता और प्रवाह व्यवस्था में सुधार हुआ है। परियोजना का प्रमुख उद्देश्य नहर के टेल भाग तक सुगमता से पानी पहुंचाना और किसानों को भरोसेमंद सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है।वर्ष 2025-26 में प्रस्तावित इस परियोजना के पूरा होने से कुटौंद शाखा नहर के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने की लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान हुआ है। पहले टेल भाग तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने के कारण बड़ी संख्या में किसानों को सिंचाई के लिए वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे खेती की लागत बढ़ने के साथ फसल उत्पादन भी प्रभावित होता था। नहर की क्षमता और प्रवाह व्यवस्था बेहतर होने से अब टेल क्षेत्र के किसानों को निर्धारित मात्रा में सिंचाई जल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम लगभग 1320 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को सिंचाई सुविधा का मिलना है। इससे सीमित जल सुविधा वाले खेतों को भी नहर का पानी उपलब्ध हो सकेगा। बुंदेलखंड में वर्षा की अनिश्चितता के बीच नहर आधारित सिंचाई किसानों के लिए भरोसेमंद जल स्रोत उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे खेती की वर्षा पर निर्भरता कम होने और कृषि गतिविधियों को स्थायित्व मिलने की उम्मीद है।कुटौंद शाखा नहर की पुनर्स्थापना से करीब 250 गांवों के 60,954 किसान लाभान्वित होंगे। पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिलने से किसानों के सामने फसल चयन के अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे और वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बेहतर फसलों का चयन कर सकेंगे। सिंचाई का दायरा बढ़ने से फसल उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार के साथ किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। कृषि उत्पादन बढ़ने का असर खेती से जुड़े श्रमिकों, कृषि यंत्र संचालन, परिवहन, भंडारण और अन्य ग्रामीण व्यवसायों पर भी पड़ने की उम्मीद है।बुंदेलखंड में जल संरक्षण और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और वर्षा की अनिश्चितता को देखते हुए नहर प्रणालियों का रखरखाव, पुनर्स्थापना और क्षमता वृद्धि महत्वपूर्ण है। कुटौंद शाखा नहर का पुनर्स्थापना कार्य इसी दिशा में उठाया गया कदम है। नहर की कार्यक्षमता बढ़ने से उपलब्ध जल का अधिक प्रभावी उपयोग होने के साथ भूजल पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।कुटौंद शाखा के किलोमीटर 45.000 से 105.210 तक पुनर्स्थापना कार्य पूरा होने के बाद अतिरिक्त सिंचाई क्षेत्र बढ़ा है और करीब 250 गांवों के किसानों को इसका लाभ मिलने की स्थिति बनी है। इससे कृषि उत्पादन, किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। नहर के टेल तक पानी पहुंचने से उन किसानों को विशेष राहत मिलेगी, जिनकी खेती लंबे समय से पर्याप्त सिंचाई सुविधा के अभाव में प्रभावित होती रही है। परियोजना से झांसी-जालौन क्षेत्र में कृषि गतिविधियों को गति मिलने और बुंदेलखंड में सिंचाई व्यवस्था को अधिक मजबूत आधार मिलने की संभावना है।

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