छंटनी से एच-1बी वीजाधारकों पर अमेरिका छोड़ने का संकट, जुकरबर्ग ने सहायता का भरोसा दिया

फेसबुक की मूल कंपनी मेटा में बड़े पैमाने पर छंटनी के बीच एच-1बी जैसे कार्य वीजा वाले कर्मचारियों पर अमेरिका से वापस जाने का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में मेटा इन कर्मचारियों को आव्रजन सहायता देने की घोषणा की है। कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा, मुझे पता है कि यदि आप यहां वीजा पर हैं, तो यह आपके लिए खासतौर से बेहद कठिन है। आपको और आपके परिवार को जो मदद चाहिए, उस बारे में आपका मार्गदर्शन करने के लिए हमारे पास आव्रजन विशेषज्ञ हैं।

बता दें, यदि एच-1बी वीजा धारक अपनी नौकरी खो देते हैं, तो उनके पास अपने एच-1बी वीजा को प्रायोजित करने के इच्छुक कंपनी को खोजने के लिए केवल 60 दिनों का वक्त होगा है। इस दौरान नियोक्ता नहीं खोज पाने पर उन्हें अमेरिका छोड़ना पड़ता है।

15% से कर्मचारी एच-1बी वीजा पर
अमेरिका स्थित प्रौद्योगिकी कंपनियां बड़ी मात्रा में एच-1बी कर्मचारियों को नियुक्त करती हैं, जिनमें से ज्यादातर भारत जैसे देशों से आते हैं। फेसबुक एच-1बी ‘निर्भर’ कंपनी है, जिसका अर्थ है कि इसके 15 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी एच-1बी वीजा पर हैं।

अपने गलत फैसलों के लिए मार्क जुकरबर्ग ने कर्मचारियों से खेद जताया
फेसबुक, व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने छंटनी के फैसले पर कर्मचारियों के समक्ष खेद प्रकट किया है। उन्होंने अपने ब्लॉग में लिखा, कंपनी इस जगह पर कैसे पहुंची, इसकी पूरी जिम्मेदारी मेरी है। मैं इन फैसलों और हम यहां कैसे पहुंचे इसकी जवाबदेही लेना चाहता हूं। मुझे पता है कि यह सभी के लिए कठिन है और खास तौर पर जो मेरे इस फैसले से प्रभावित हुए है उनके लिए मुझे खेद है।

18 साल में पहली बार इतनी बड़ी छंटनी
फेसबुक की स्थापना साल 2004 में हुई थी और फिर इसका नाम बदलकर मेटा कर दिया गया। 18 साल में पहली बार फेसबुक से इतने बड़े स्तर पर लोगों को निकाला जा रहा है।

जुकरबर्ग की नेटवर्थ भी घटी
कभी दुनिया के टॉप-10 अमीरों में मौजूदगी दर्ज करा चुके जुकरबर्ग अब अरबपतियों की बूची में 29वें पायदान पर फिसल गए हैं। फोर्ब्स की रियल टाइम बिलेनियर्स सूची के मुताबिक, जुकरबर्ग की नेटवर्थ महज 33.5 अरब डॉलर रह गई है।

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