जौनपुर CJM कोर्ट का आदेश, 12 लोगों पर केस दर्ज अगली सुनवाई 21 फरवरी को
जमीनी विवाद में पुलिस की निष्क्रियता पर कोर्ट का कड़ा रुख
जौनपुर ,27 जनवरी (हि.स.)। यूपी के जौनपुर में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जलालपुर थाना अंतर्गत सुरहुरपुर में हुए जमीनी विवाद और पुलिस की कथित निष्क्रियता पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने मंगलवार को प्रार्थी सुरेंद्र कुमार की अर्जी पर विपक्षी प्रेमशंकर व अन्य के खिलाफ परिवाद (शिकायत) दर्ज करने का आदेश दिया है। इस मामले में लगभग एक दर्जन लोगों पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
घटना 14 जून 2025 की शाम की है। आरोप है कि विपक्षी प्रेमशंकर, रामआसरे, अरुण और उनके परिवार के लगभग 12 सदस्यों ने मिलकर सुरेंद्र कुमार की ‘आबादी’ की जमीन पर जबरन टिनशेड लगाकर कब्जा करने का प्रयास किया। जब सुरेंद्र कुमार और उनके बेटों संतोष व आकाश ने इसका विरोध किया, तो विपक्षीगणों ने उन पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया।
हमले में संतोष के सिर पर गंभीर चोटें आईं, जिससे वह मौके पर ही बेहोश हो गया। उसे तत्काल जिला चिकित्सालय जौनपुर रेफर किया गया। प्रार्थी सुरेंद्र कुमार का आरोप है कि उन्होंने घटना की सूचना 112 नंबर और जलालपुर थाने को समय पर दी थी।
हालांकि, पुलिस ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय टालमटोल की। सुरेंद्र कुमार ने यह भी आरोप लगाया है कि विपक्षीगणों के प्रभाव में आकर पुलिस ने पीड़ित पक्ष के खिलाफ ही ‘क्रॉस केस’ दर्ज कर लिया, जबकि पीड़ितों का उपचार सरकारी अस्पताल में चल रहा था।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्वेता यादव ने पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पाया कि मामले में साक्ष्य और जांच की प्रक्रिया आवश्यक है। उच्चतम न्यायालय के ‘प्रियंका श्रीवास्तव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ मामले में दिए गए विधिक सिद्धांतों का हवाला देते हुए न्यायालय ने निम्नलिखित आदेश दिए कि धारा 173(4) BNSS के प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज किया जाए। मामले को संबंधित क्षेत्राधिकार वाले न्यायालय में स्थानांतरित किया जाए। अगली सुनवाई और बयान दर्ज करने के लिए 21 फरवरी 2026 की तिथि निर्धारित की गई है।
इस आदेश के बाद अब सभी विपक्षीगणों को न्यायालय के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखना होगा। साथ ही, इस मामले में पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

