तबादले के बाद भी डीआईओएस दफ्तर में जमे रसूखदार बाबू
*एक कार्यमुक्त किया तो दूसरे पर क्यों मेहरबान हैं साहब?*
*क्या डीएम की हंटर से ही हटेंगे आशीष ओझा?*
सुलतानपुर। उत्तर प्रदेश शासन की जीरो टॉलरेंस और पारदर्शी स्थानांतरण नीति को सुलतानपुर का शिक्षा विभाग सरेआम ठेंगा दिखा रहा है। शासन द्वारा जारी वार्षिक तबादला सूची के तहत जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय में तैनात दो वरिष्ठ सहायकों का ट्रांसफर हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन कार्यालय के भीतर चल रहे दोहरे मापदंड ने पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।शासनादेश का सम्मान करते हुए वरिष्ठ सहायक सुरजीत ने तत्काल डीआईओएस कार्यालय से रिलीविंग ली और अपने नए तैनाती पर कार्यभार ग्रहण कर लिया। लेकिन इसी आदेश के तहत राजकीय इंटर कॉलेज, महराजगंज (सुलतानपुर) के लिए स्थानांतरित किए गए दूसरे बाबू आशीष कुमार ओझा आज भी डीआईओएस दफ्तर की मुख्य कुर्सी पर कुंडली मारकर बैठे हुए हैं। डीआईओएस की साठगांठ या मजबूरी? जनता पूछ रही सवाल शासकीय आदेश की इस खुली अवहेलना ने विभागीय गलियारों में सुगबुगाहट तेज कर दी है। आखिर जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) महोदय की ऐसी क्या मजबूरी या ‘खास लगाव’ है कि वह शासन द्वारा हटाए जा चुके लिपिक आशीष ओझा को कार्यमुक्त करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं? जब एक ही आदेश से एक बाबू को तुरंत कार्यमुक्त कर दिया जाता है, तो दूसरे रसूखदार बाबू को आखिर किसके संरक्षण में दफ्तर में रोक कर रखा गया है? यह मिलीभगत शासन की मंशा पर पानी फेरने जैसी है।
डीआईओएस सुल्तानपुर की इस लाचार और ढुलमुल कार्यशैली को देखकर साफ प्रतीत होता है कि अब शिक्षा विभाग के इन प्रशासनिक मामलों में खुद जिलाधिकारी (डीएम) सुल्तानपुर को कड़ा रुख अपनाना होगा। जब तक जिलाधिकारी महोदय खुद इस मामले में दखल देकर अपना हंटर नहीं चलाएंगे, तब तक यह प्रभावशाली बाबू टस से मस नहीं होने वाला। शासन की तबादला नीति का मखौल उड़ाने वाले ऐसे तत्वों और उन्हें शह देने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग अब जोर पकड़ने लगी है।
जिला विद्यालय निरीक्षक महोदय ने बताया कि स्थानांतरित किए गए दूसरे वरिष्ठ सहायक सुरजीत के पास केवल एक प्रभार था, इसलिए उन्हें तुरंत रिलीव कर दिया गया, लेकिन रसूखदार बाबू आशीष ओझा के पास ‘ज्यादा प्रभार’ हैं, इसलिए उन्हें हटाने में समय लग रहा है। जानना चाह रहे हैं कि क्या ‘ज्यादा प्रभार’ होना अवैध कब्जे का लाइसेंस है? डीआईओएस सुलतानपुर की इस हास्यास्पद और लचर दलील ने विभागीय भ्रष्टाचार और साठगांठ की बू को और तेज कर दिया है।

