नई दिल्ली)लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, हंगामे के बीच मानसून सत्र में कई अहम बिल हुए पास

नई दिल्ली)लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, हंगामे के बीच मानसून सत्र में कई अहम बिल हुए पास

नई दिल्ली ,13 अगस्त ,(आरएनएस)। संसद का मानसून सत्र इस बार हंगामे की भेंट चढ़ गया। गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई। इसके साथ ही मानसून सत्र का समापन हुआ।

गुरुवार को सुबह 11 बजे राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरमÓ के साथ लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई। राष्ट्रगीत के सभी छह पद बजाए गए। इस दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सदन में मौजूद रहे। राष्ट्रगीत के बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।

इस बार स्पीकर ओम बिरला ने सत्र के दौरान लोकसभा के कामकाज और उत्पादकता का ब्यौरा देने वाला पारंपरिक समापन भाषण भी नहीं पढ़ा।

गौरतलब है कि इस बार पूरे सत्र में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित तौर पर गबन और नीट पेपर लीक के मुद्दे पर हंगामा जारी रहा। विपक्ष ने नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई का भी विरोध किया। साथ ही, विपक्ष ने सदन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी नहीं होने पर सवाल उठाए और छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर सरकार का जवाब मांगा।

उधर, लोकसभा में विपक्ष के लगातार हंगामे के बीच सरकार कई अहम बिल पास कराने में सफल हुई। कुछ बिल विपक्ष के सदस्यों की ओर से चर्चा में हिस्सा नहीं होने पर बिना किसी बहस के लोकसभा से पास हुए।

मानसून सत्र में लोकसभा से पारित होने वाले विधेयकों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, केरल राज्य का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर ‘केरलमÓ करने वाले केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक शामिल रहे।

वहीं, लोकसभा ने बुधवार को विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (एफसीआरए), 2026 को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) भेजने के प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित किया।

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(नई दिल्ली)सरकारी सेवाएं होंगी और आसान, नीति आयोग और ‘भाषिणीÓ ने मिलाया हाथ; अब आपकी अपनी भाषा में मिलेगी हर जानकारी

नई दिल्ली ,13 अगस्त ,(आरएनएस)। केंद्र सरकार मल्टीलिंगुअल और वॉयस-फर्स्ट एआई तकनीक पर काम कर रही है ताकि शासन और सार्वजनिक सेवाएं ज्यादा समावेशी और आसान बन सकें।

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, इस लक्ष्य के लिए डिजिटल इंडिया ‘भाषिणीÓ डिवीजन डीआईबीडी और नीति आयोग ने भाषिणी फॉर सेवा/संचालन पहल के तहत एक घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस साझेदारी का मकसद ‘भाषिणीÓ के मल्टीलिंगुअल एआई इकोसिस्टम का इस्तेमाल करके शासन को ज्यादा समावेशी और सुलभ बनाना है। इसके लिए नीति आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवाओं में एआई आधारित भाषा तकनीकों को जोड़ा जाएगा।

सरकारी बयान में कहा गया, यह साझेदारी नागरिकों को उनकी पसंदीदा भारतीय भाषाओं में सरकारी जानकारी और सेवाओं तक पहुंच दिलाएगी। इससे सरकार और नागरिकों के बीच संवाद मजबूत होगा और सार्वजनिक सेवा वितरण में बहुभाषी संचालन को बढ़ावा मिलेगा।

इस साझेदारी के तहत ‘भाषिणीÓ के भाषा अनुवाद एपीआई और रेफरेंस एप्लीकेशन के जरिए नीति आयोग की सेवाओं तक बहुभाषी पहुंच आसान होगी। इसके साथ ही अनुवाद मॉडल के विकास और लगातार सुधार में मदद मिलेगी। भाषा तकनीकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म, डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम और संचार वर्कफ्लो में भी जोड़ा जाएगा।

इस इको सिस्टम का एक अहम हिस्सा ‘स्मृतिÓ है। इसका पूरा नाम सिस्टम फॉर मीटिंग रिकॉर्डिंग, इनफॉर्मेशन एंड ट्रांसक्रिप्शन इंटरफेस है। इसे ‘भाषिणीÓ के साथ मिलकर विकसित किया गया है। ‘स्मृतिÓ बैठक के मिनट्स को अपने आप तैयार करेगा और उनका बहुभाषी अनुवाद भी करेगा। इससे सरकारी कामकाज की दक्षता बढ़ेगी और अंतिम व्यक्ति तक शासन ज्यादा समावेशी बनेगा।

यह सहयोग नीति आयोग के ‘नीति ताराÓ यानी टूलकिट फॉर एनालिसिस, रिव्यू एंड एक्शन पर भी आधारित है। ‘नीति ताराÓ डेटा को जमीनी स्तर पर कार्रवाई में बदल रहा है।

अब तक देशभर में 200 से ज्यादा क्षमता निर्माण सत्र आयोजित किए जा चुके हैं। इनके जरिए जिलों और ब्लॉकों के 4,000 से अधिक अधिकारियों को डेटा आधारित अंतर्दृष्टि के लिए प्रशिक्षित किया गया है ताकि वे साक्ष्य आधारित फैसले ले सकें।

साझेदारी के तहत नीति आयोग के विभिन्न क्षेत्रों के लिए रेफरेंस एप्लीकेशन और वॉयस बॉट भी विकसित किए जाएंगे। साथ ही विशेष शब्दावली और क्षेत्र विशेष की जरूरतों के लिए भाषा तकनीक को मजबूत किया जाएगा।

‘भाषिणी सहयोगीÓ के माध्यम से ‘भाषादानÓ का इस्तेमाल करके भाषाई डेटा का संग्रह, क्यूरेशन और प्रसार किया जाएगा। इसके लिए नीति आयोग के अधिकारियों और आम नागरिकों से टेक्स्ट, ऑडियो और वीडियो सैंपल देने का आग्रह किया जाएगा।

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(लेह)लेह में भूकंप के तेज झटके, 5.5 रही तीव्रता, 10 किलोमीटर की गहराई पर था केंद्र

लेह ,13 अगस्त ,(आरएनएस)। लेह में गुरुवार सुबह 6:05 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार, रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 5.5 दर्ज की गई।

भूकंप का केंद्र जमीन से सिर्फ 10 किलोमीटर नीचे था और इसका केंद्र बिंदु 36.881 डिग्री नॉर्थ, 74.402 डिग्री ईस्ट पर दर्ज किया गया।

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने ‘एक्सÓ पोस्ट के जरिए बताया कि फिलहाल किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की कोई खबर नहीं है। उथला भूकंप होने के कारण झटके काफी तेज महसूस किए गए। उथला भूकंप वह भूकंप है जिसका उद्गम केंद्र पृथ्वी की सतह से 0 से 70 किलोमीटर की गहराई के भीतर होता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार भूकंप पृथ्वी की सतह से लेकर 700 किलोमीटर तक की गहराई में आ सकते हैं। यूएसजीएस के आंकड़ों के मुताबिक इस पूरी रेंज को तीन हिस्सों में बांटा गया है, जिमसें उथला, मध्यम और गहरा भूकंप शामिल हैं। उथले भूकंप आमतौर पर ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं। इसकी वजह यह है कि इनमें भूकंपीय तरंगों को सतह तक पहुंचने में कम दूरी तय करनी पड़ती है। इससे जमीन ज्यादा जोर से कांपती है और इमारतों को नुकसान पहुंचने और जानमाल की हानि की आशंका बढ़ जाती है।

इससे पहले 5 अगस्त 2026 को दोपहर 3:36 बजे अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग जिले में भी भूकंप आया था। इसकी तीव्रता 5.4 मापी गई थी।

उस भूकंप का केंद्र 29.008 डिग्री नॉर्थ, 94.739 डिग्री ईस्ट पर था और गहराई 17 किलोमीटर थी। मुख्य झटके से 5 मिनट पहले 3.6 तीव्रता का एक फोरशॉक भी आया था। मुख्य भूकंप के दो घंटे के भीतर केंद्र के उत्तर में 5.1 तीव्रता का एक बड़ा आफ्टरशॉक और कई छोटे झटके भी दर्ज किए गए थे।

उस भूकंप का केंद्र डिब्रूगढ़ (असम से लगभग 171 किमी उत्तर, चांगलांग, अरुणाचल प्रदेश से 233 किमी उत्तर-पश्चिम, ईटानगर से 241 किमी उत्तर-पूर्व, जोरहाट, असम से 256 किमी उत्तर और मोकोकचुंग, नागालैंड से 299 किमी उत्तर में था।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

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(मुंबई)मुंबई में भारी बारिश से रिहायशी इलाके में भूस्खलन से 7 लोगों की मौत, सीएम फडणवीस ने जताया दुख

मुंबई ,13 अगस्त ,(आरएनएस)। मुंबई के घाटकोपर में लगातार भारी बारिश के बाद बुधवार को एक रिहायशी इलाके में जबरदस्त भूस्खलन हुआ, जिसमें तीन बच्चों समेत कम से कम सात लोगों की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए।

यह हादसा चिराग नगर के अशोक नगर इलाके में गौसिया चाल में सुबह करीब 3:48 बजे हुआ। यह हादसा उस समय हुआ, जब लोग अपने घरों में आराम से सो रहे थे। तभी पास की पहाड़ी का एक हिस्सा ढह गया, जिससे कीचड़, बड़े पत्थर और मलबा दो-तीन कतार वाले घरों पर गिर गया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक आधिकारिक पोस्ट में कहा कि घाटकोपर के साकीनाका गौसिया चाल इलाके में भूस्खलन से हुए हादसे की खबर बेहद दुखद है। पता चला है कि इस हादसे में कुछ लोगों की जान चली गई है, और हम उनके परिवारों के दुख में शामिल हैं। रात भर लगातार भारी बारिश के कारण पहाड़ी का एक हिस्सा ढह गया, जिससे घरों पर भूस्खलन हुआ और कुछ लोग मलबे के नीचे दब गए। इस घटना की जानकारी मिलते ही बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उन्हें जरूरी इलाज मुहैया कराने के निर्देश दिए गए हैं।

नगर निगम अधिकारियों ने पुष्टि की कि सात पीड़ितों को घाटकोपर के नगर निगम द्वारा संचालित राजावाड़ी अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया था। मरने वालों की पहचान मोहम्मद समीर अंसारी (14), साहिल हुसैन अब्दुल काजी (19), अबान आरिफ शेख (2), मनत आरिफ शेख (4), मर्जिना आरिफ शेख (27), विकेत रमेश यादव (27) और एक अज्ञात वयस्क के तौर पर हुई है। चार घायल लोगों सोहेल अंसारी (18), मोहम्मद अंसारी (14), नईमुद्दीन इकबाल खान (28) और साजिद अंसारी (16) को बचाकर कुर्ला के भाभा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ अधिकारियों ने उनकी हालत स्थिर बताई है। मुंबई फायर ब्रिगेड, नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ), मुंबई पुलिस और बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) के वार्ड स्टाफ की टीमों ने तुरंत खोज और बचाव अभियान शुरू किया।

चिराग नगर की बनावट की वजह से बचाव कर्मियों को काम करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। गौसिया चाल तक जाने वाले रास्ते बहुत संकरे हैं, जहां से एक बार में सिर्फ एक ही व्यक्ति गुजर सकता है। इस वजह से भारी मशीनरी मलबे वाली जगह तक नहीं पहुंच पाई। बचाव कर्मियों को कंक्रीट के स्लैब और मलबे को हटाने के लिए हाथों से इस्तेमाल होने वाले औजारों और उपकरणों पर निर्भर रहना पड़ा। मुंबई की मेयर रितु तावडे ने राहत कार्यों का जायजा लेने और प्रभावित परिवारों से बातचीत करने के लिए घटनास्थल का दौरा किया। मेयर ने तत्काल वित्तीय सहायता पैकेज की घोषणा की, जिसमें प्रत्येक मृतक के परिजनों को 4,00,000 रुपए की अनुग्रह राशि और प्रत्येक घायल व्यक्ति के चिकित्सा उपचार के लिए 50,000 रुपए की वित्तीय सहायता शामिल है। मुंबई महानगर क्षेत्र में भारी बारिश जारी रहने के कारण नगर निगम ने आसपास के पहाड़ी इलाकों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

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(नई दिल्ली)कैश कांड में जस्टिस यशवंत वर्मा दोषी करार, शीतकालीन सत्र में आ सकता है महाभियोग प्रस्ताव

नई दिल्ली ,13 अगस्त ,(आरएनएस)। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित एक संसदीय समिति ने पूर्व दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से नकदी मिलने के मामले में उन्हें जिम्मेदार ठहराया है। समिति ने निष्कर्ष निकाला कि पूर्व दिल्ली हाईकोर्ट के जज आवास में मिले पैसों की मौजूदगी का संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में विफल रहे।

बुधवार को संसद में पेश की गई समिति की रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली के 30, तुगलक क्रिसेंट स्थित न्यायमूर्ति वर्मा के सरकारी आवास के एक स्टोररूम में 500 रुपए के नोटों की बड़ी मात्रा बरामद हुई थी, जिनके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा सकी। यह मामला तब सामने आया था, जब 14 मार्च 2025 की रात उनके आवास पर आग लगी थी। आग बुझाने पहुंचे दमकलकर्मियों को स्टोररूम में बड़ी मात्रा में आंशिक रूप से जले हुए नकदी के बंडल मिले थे। रिपोर्ट में समिति ने कहा कि न्यायमूर्ति वर्मा नोटों के स्रोत, स्वामित्व या उनके वहां मौजूद होने को लेकर कोई विश्वसनीय स्पष्टीकरण नहीं दे सके।

समिति ने बाद की जांच प्रक्रिया पर भी चिंता जताई। रिपोर्ट में कहा गया कि महत्वपूर्ण सबूतों को न तो सही तरीके से सुरक्षित रखा गया और न ही संरक्षित किया गया। स्टोररूम की स्थिति को कानूनी तौर पर सील कर जांच किए जाने से पहले ही बदल दिया गया था। रिपोर्ट में बरामद नकदी के गायब होने या उपलब्ध न होने पर भी सवाल उठाए गए हैं। समिति ने कहा कि भौतिक साक्ष्यों के गायब होने की वजह घटनास्थल को सुरक्षित रखने में लापरवाही और आवास से जुड़े कर्मियों द्वारा स्टोररूम में की गई गतिविधियां थीं। हालांकि, समिति ने यह भी कहा कि उसे ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि न्यायमूर्ति वर्मा ने स्वयं नकदी हटाई थी। समिति ने न्यायमूर्ति वर्मा के जवाब और खासकर 22 मार्च 2025 को दिए गए उनके लिखित स्पष्टीकरण की आलोचना करते हुए कहा कि यह असंतोषजनक था और इसमें स्पष्टता, पारदर्शिता तथा संस्थागत जवाबदेही का अभाव था।

यह रिपोर्ट दो खंडों में तैयार की गई है, जिसमें जांच के दौरान दर्ज मौखिक गवाहियां और दस्तावेजी साक्ष्य शामिल हैं। इससे पहले तत्कालीन भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा गठित आंतरिक जांच समिति ने भी निष्कर्ष निकाला था कि जिस स्टोररूम से नकदी मिली थी, उस पर न्यायमूर्ति वर्मा का प्रत्यक्ष या परोक्ष नियंत्रण था। उस समय दिल्ली हाईकोर्ट में कार्यरत न्यायमूर्ति वर्मा को विवाद के बाद उनके मूल न्यायालय इलाहाबाद हाईकोर्ट वापस स्थानांतरित कर दिया गया था। बाद में संसद ने उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू की थी। हालांकि, न्यायमूर्ति वर्मा के इस्तीफा देने के बाद यह प्रक्रिया प्रभावी रूप से समाप्त हो गई।

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(नई दिल्ली)दिल्ली दंगा मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने सभी 13 आरोपियों को किया बरी, पुलिस की जांच पर उठाए सवाल

नई दिल्ली ,13 अगस्त ,(आरएनएस)। वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए भीषण दंगों से जुड़े एक अहम मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। अदालत ने सबूतों के भारी अभाव और पुलिस की जांच प्रक्रिया में कई खामियों को आधार बनाते हुए सभी 13 आरोपियों को बरी कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों को ठोस सबूतों के साथ साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है।

साजिश साबित करने में नाकाम रही पुलिस

इस मामले में अभियोजन पक्ष का मुख्य आरोप था कि दिल्ली दंगों के दौरान हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए एक सोची-समझी साजिश रची गई थी। हालांकि, अदालत ने कहा कि पुलिस यह साबित ही नहीं कर पाई कि यह कथित साजिश कब, कहां और कैसे रची गई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी। अदालत ने मोहम्मद जावेद और शाहजाद खान की निशानदेही पर यमुना नदी से तलवार और भाला बरामद होने के दावे को भी नाकाफी माना। कोर्ट ने टिप्पणी की कि केवल हथियारों की बरामदगी से किसी साजिश का अस्तित्व साबित नहीं होता, खासकर तब जब पुलिस उन हथियारों का सीधा संबंध घटना में हुए इस्तेमाल से न जोड़ पाई हो।

भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया में भी मिलीं खामियां

ठोस सबूतों की कमी के साथ-साथ पुलिस की कानूनी प्रक्रिया में भी भारी लापरवाही सामने आई। मामले में आठ आरोपियों को उद्घोषित अपराधी (भगोड़ा) घोषित किया गया था, लेकिन अदालत ने पाया कि पुलिस ने कानून के तहत जरूरी तीन चरणों की प्रक्रिया का सही तरीके से पालन ही नहीं किया। न तो आरोपियों के घर पर उद्घोषणा पढ़कर सुनाई गई और न ही उसे चस्पा करने के पर्याप्त साक्ष्य अदालत में पेश किए गए। इसके अलावा, घटना से जुड़ी सीसीटीवी फुटेज भी इतनी धुंधली थी कि उसमें किसी भी आरोपी की स्पष्ट पहचान नहीं हो सकी और गवाहों के बयानों में भी काफी विरोधाभास देखने को मिला, जिससे अभियोजन का केस कमजोर पड़ गया।

क्या था गौतम विहार में हुए हमले का पूरा मामला?

यह पूरा मामला रमण नाम के एक व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज की गई एफआईआर से जुड़ा था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, 25 फरवरी 2020 की शाम जब वह गौतम विहार गया था, तब फूल वाली मस्जिद की तरफ से आए 15-20 लोगों की हथियारबंद भीड़ ने उस पर जानलेवा हमला कर दिया था। इस समूह के हाथों में डंडे और तलवारें थीं। इस हमले में रमण के सिर, पीठ और शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोटें आई थीं। पुलिस ने इसी घटना के आधार पर 13 लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाया था, लेकिन अदालत में आरोपियों की पहचान और कथित साजिश के ठोस प्रमाण न मिलने के कारण सभी को दोषमुक्त करार दे दिया गया।

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(नई दिल्ली)शौर्य चक्र विजेता की विधवा ने पेंशन के लिए 26 साल किया संघर्ष, सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद मिला इंसाफ

नई दिल्ली ,13 अगस्त ,(आरएनएस)। सरकारी सिस्टम की लेटलतीफी और संवेदनहीनता कभी-कभी उन परिवारों को भी नहीं बख्शती, जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया हो। इसका एक ताजा और दिल दहला देने वाला उदाहरण शौर्य चक्र विजेता शहीद मोहन सिंह की विधवा का 26 साल लंबा संघर्ष है। देश के लिए जान कुर्बान करने वाले पति की ‘स्पेशल फैमिली पेंशनÓ पाने के लिए एक पत्नी को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ीं। आखिरकार, 26 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद जब सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया, तब जाकर शहीद की विधवा को उनका हक मिल सका।

देश की खातिर दे दी थी जान, मिला था शौर्य चक्र

जनरल रिजर्व इंजीनियरिंग फोर्स में ओवरसियर के पद पर तैनात मोहन सिंह सीमा पर एक बेहद अहम सड़क निर्माण कार्य के इंचार्ज थे। 10 जुलाई 2000 को जब वह अपनी टीम के साथ काम कर रहे थे, तभी अचानक पहाड़ी से भारी मलबे के साथ एक बड़ा पत्थर नीचे गिरने लगा। खतरे को भांपते हुए मोहन सिंह ने अपनी जान की परवाह न करते हुए सभी मजदूरों को सुरक्षित वहां से हटा दिया, लेकिन वह खुद उस मलबे की चपेट में आ गए और वीरगति को प्राप्त हुए। उनके इस अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान के लिए केंद्र सरकार ने साल 2001 में उन्हें मरणोपरांत प्रतिष्ठित ‘शौर्य चक्रÓ से सम्मानित किया था।

तकनीकी आधार पर रोक दी गई थी स्पेशल पेंशन

मोहन सिंह की शहादत के बाद, उनकी विधवा को ‘सीसीएस एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशनÓ (स्पेशल फैमिली पेंशन) मिलनी चाहिए थी, जिसकी वह हकदार थीं। लेकिन, सरकार ने सिर्फ यह तर्क देकर उनका दावा खारिज कर दिया कि उन्हें ‘वर्कमेन कंपनसेशन एक्टÓ के तहत मुआवजा दिया जा चुका है, इसलिए नियमों के अनुसार उन्हें लिबरलाइज्ड पेंशन का लाभ नहीं दिया जा सकता। इसके बाद उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने माना कि वह एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन की हकदार हैं, लेकिन बकाया राशि का भुगतान याचिका दायर करने की तारीख से करने का आदेश दिया, न कि पति की मौत की तारीख से।

‘सरकार से हुई गलती, विधवा को कोर्ट क्यों आना पड़ा?Ó

जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और अरुण पल्ली की पीठ ने सरकार को कड़ी फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केंद्र सरकार से बहुत बड़ी गलती हुई है; उन्हें मोहन सिंह के मामले को सीसीएस पेंशन नियमों की सही कैटेगरी (सी) में रखना चाहिए था और उनकी शहादत के तुरंत बाद ही विधवा को इसका लाभ मिलना चाहिए था। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, शहीदों के ऐसे मामलों में उनके परिवार या विधवा से राहत पाने के लिए अदालत के चक्कर काटने की उम्मीद बिल्कुल नहीं की जानी चाहिए।

अटॉर्नी जनरल (एजी) आर. वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि विधवा को अब तक 14.28 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है और 4.12 लाख रुपये की बकाया राशि भी जारी कर दी गई है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि पति की शहादत और हाईकोर्ट के आदेश के बीच की अवधि के मुआवजे के तौर पर उन्हें कुल 10 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया जाए।

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(नई दिल्ली)लाल किला ब्लास्ट के पीछे अलकायदा का हाथ, यूएन की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा; 11 बेगुनाह लोगों की हुई थी मौत

नई दिल्ली ,13 अगस्त ,(आरएनएस)। राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास नवंबर 2025 में हुए भीषण बम धमाके को लेकर एक बेहद सनसनीखेज खुलासा हुआ है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की निगरानी संस्था की ताजा रिपोर्ट में इस जानलेवा आतंकी हमले के लिए खूंखार आतंकी संगठन ‘अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंटÓ को जिम्मेदार ठहराया गया है। यूएन की इस रिपोर्ट से भारत में चल रही लाल किला ब्लास्ट की जांच को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी पुष्टि मिली है और यह साफ हो गया है कि इस हमले के तार सीमा पार बैठे बड़े आतंकी आकाओं से जुड़े हुए थे।

छोटी-छोटी आतंकी इकाइयों में बंटा एक्यूआईएस

संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध समिति की निगरानी टीम ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में बताया है कि आतंकी संगठन एक्यूआईएस अब अपनी रणनीति बदल रहा है। यह अब एक बिखरे हुए गुट की जगह पूरी तरह से एक विकेंद्रीकृत नेटवर्क बन चुका है, जो भारतीय उपमहाद्वीप में छोटी-छोटी आतंकी इकाइयों (स्लीपर सेल्स) के जरिए छिपकर काम कर रहा है। रिपोर्ट में यह भी गहरी चिंता जताई गई है कि इस संगठन के आतंकी अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में फर्जी अफगानी पहचान-पत्रों की आड़ में सुरक्षित पनाह लिए हुए हैं और बांग्लादेश में भी तेजी से अपने ऑपरेशन्स का विस्तार कर रहे हैं।

बायोलॉजिकल हथियार और क्रिप्टो करेंसी पर आतंकियों की नजर

यूएन ने अपनी इस हालिया रिपोर्ट में पूरी दुनिया के लिए एक खौफनाक चेतावनी भी जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे वैश्विक आतंकी समूह अब केमिकल और बायोलॉजिकल हथियार हासिल करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं, जो भविष्य में भारी तबाही का कारण बन सकता है। इसके अलावा, आतंकी संगठन हवाला से आगे बढ़कर अब अपनी फंडिंग के लिए डिजिटल करेंसी (क्रिप्टो करेंसी) का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की निगरानी टीम ने कड़ा सुझाव दिया है कि जिन क्रिप्टोकरेंसी एड्रेस का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों की फंडिंग के लिए हो रहा है, उन पर भी कड़े यूएन प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए।

एनआईए कर रही है लाल किला ब्लास्ट नेटवर्क की जांच

गौरतलब है कि नवंबर 2025 में लाल किले के पास एक कार में हुए जबरदस्त बम धमाके ने पूरी दिल्ली को दहला दिया था। इस आतंकी घटना में 11 बेगुनाह लोगों की जान चली गई थी, जबकि 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस बड़े हमले के बाद मामले की कमान राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण ने अपने हाथों में ले ली थी। भारतीय जांच एजेंसियां शुरुआत से ही इस हमले के पीछे एक बड़े और सुनियोजित आतंकी नेटवर्क की जांच कर रही हैं। एनआईए की अब तक की जांच में यह बात सामने आ चुकी है कि इस पूरी साजिश में कट्ट

रपंथी सोच वाले कई पेशेवरों और एक्यूआईएस से जुड़े संदिग्धों का बड़ा हाथ है।

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