(नई दिल्ली)विज्ञान पर फोकस से स्थानीय उत्पादन को मिल रहा बढ़ावा, बायोइकोनॉमी बीते 12 वर्षों में 19 गुना बढ़ी : जितेंद्र सिंह
नई दिल्ली ,29 अक्टूबर । केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बुधवार को कहा कि मोदी सरकार की ओर से विज्ञान पर फोकस बढ़ाने से स्थानीय उत्पादन को सपोर्ट मिल रहा है और देश की बायोइकोनॉमी बीते 12 वर्षों में करीब 19 गुना बढ़ गई है।
इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ईएसटीआईसी) के साइडलाइन में मीडिया से बातचीत में सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से पिछले कई वर्षों में विज्ञान पर फोकस करने से कई ऐसे डिवाइस देश में ही स्थानीय स्तर पर बनने लगी हैं, जिन्हें पहले बाहर से आयात किया जाता था।
उन्होंने आगे बताया कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने अपनी पहली स्वदेशी रिसर्च शिप को निर्मित किया है और इसे कोलकाता बंदरगाह से लॉन्च किया है। इसी तरह परमाणु क्षेत्र में हम फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के जरिए आगे बढ़ गए हैं। इन सभी उपलब्धियों का ईएसटीआईसी को दिखाया गया है , जिससे आम लोगों इसी जानकारी मिल सके और पक्षकार भी लाभ उठा सकें।
उन्होंने आगे कहा कि ईएसटीआईसी जैसे प्रयासों से विकसित भारत के लक्ष्यों को पाने की गति में वृद्धि होगी। साथ ही, बीते 70 वर्षों में जितने काम हुए हैं, उससे ज्यादा पीएम मोदी के 10 वर्ष के कार्यकाल में हो चुके हैं।
उदाहरण देते हुए कहा कि देश की बायोइकोनॉमी 2014 में 10 अरब डॉलर की थी, जो कि अब 195 अरब डॉलर हो गई है। स्पेस इकोनॉमी 9 अरब डॉलर की हो गई है, जो कि 2014 में करीब शून्य थी।
उन्होंने आगे कहा कि यह परिणाम प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ऐसे निर्णय लेने से आए हैं, जिसकी पहले किसी ने कल्पना नहीं की थी। इसमें न्यूक्लियर और स्पेस क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोलना शामिल है।
वहीं, ईएसटीआईसी 2026 कार्यक्रम पर बातचीत करते हुए सिंह ने कहा कि इस पिछले साल शुरू किया था। इस साल इसका दूसरा चरण आयोजित किया जा रहा है। यह तीन दिन का कार्यक्रम में है। मंगलवार को इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से किया गया था।
उन्होंन आगे बताया कि इससे पहले काफी छोटी-छोटी कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाती थी और इसको अब मंत्रालय ने दो कार्यक्रमों में बदल दिया है, जिसमें से एक ईएसटीआईसी है। इसमें विशेष फोकस एकेडमिक पर है। इसमें अलग-अलग क्षेत्रों में देश-विदेश से विशेषज्ञ आते हैं। इसमें विज्ञान के प्रत्येक क्षेत्र को लेकर थीम हैं। इसकी मदद से सरकार की यह भी कोशिश है कि कौन-सा स्टार्टअप क्या कर रहा है और बाजार में उन्हें कहां मदद की जा सकती है।

