नबी ए अकरम के बारे में सोच लेना ही इबादत ह- आमिर उस्मानी

नबी ए अकरम के बारे में सोच लेना ही इबादत ह- आमिर उस्मानी
जश्न-ए-ईद-मिलादुन्नबी के अवसर पर ‘बज़्म-ए-अहबाब’ ने किया मुशायरे का आयोजन
प्रयागराज। करेली ज़मीर नगर स्थित मरहूम शाकिर हुसैन तश्ना के आवास पर जश्न-ए-ईद-मिलादुन्नबी के अवसर पर ‘बज़्म-ए-अहबाब’ के तत्वावधान में एक नातिया मुशायरे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता एम. ए. हसीन, सीनियर अधिवक्ता इलाहाबाद हाईकोर्ट ने की और संचालन निज़ाम हसन पूरी ने किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता मुहर्रम कमेटी के अध्यक्ष असरार नियाज़ी और विशिष्ट अतिथि के रूप में बख़्तियार यूसुफ़, सीनियर अधिवक्ता इलाहाबाद हाईकोर्ट, फ़रमूद इलाहाबादी (संस्थापक ‘अदब घर’) और जमात-ए-इस्लामी हिंद के सदस्य आमिर उस्मानी ने शिरकत की।
एम. ए. हसीन ने कहा कि यह बड़े सौभाग्य की बात है कि मरहूम तश्ना भाई के बेटे अमजद हुसैन रावी और भांजे सुहैल अख्तर ने इस नातिया महफ़िल का आयोजन किया। मुझे पूरा विश्वास है कि इससे मरहूम की रूह को बहुत सुकून पहुँचा होगा, क्योंकि उनके बेटे इस योग्य हैं कि वे उनके पदचिह्नों पर चल रहे हैं।
असरार नियाज़ी ने कहा कि जश्न-ए-ईद-मिलादुन्नबी का पवित्र महीना चल रहा है और इस महीने में नातिया मुशायरे व मिलाद के आयोजन से घरों में बरकतें आती हैं।
आमिर उस्मानी ने कहा कि नबी अकरम के बारे में सोच लेना ही इबादत है और उनका ज़िक्र हो तो यह बड़ी सआदत है। इसके बाद नातिया मुशायरे का दौर शुरू हुआ, जिसकी शुरुआत सुफ़ियान निज़ामी की ‘नाअत-ए-पाक’ से हुई। तत्पश्चात कई शायरों ने अपने नातिया कलाम पेश किए।
मुशायरे में कंकर, डॉक्टर हुसैन जीलानी, फ़रमूद अल्लाह आबादी, डॉ मोहम्मद शाहिद ख़ान, सुहैल अख़्तर, बख़्तियार यूसुफ़, अमजद हुसैन रावी के अलावा सलाल इलाहाबादी ने भी बेहतरीन नातिया कलाम पेश किए।
इस अवसर पर असद क़ुरैशी, असद हुसैन, नाजिर हुसैन, शाहिद अली शाहिद और मोहम्मद शाहाब आदि मौजूद रहे। प्रोग्राम के कन्वीनर अमजद हुसैन रावी और सुहैल अख्तर ने रस्म-ए- शुक्रिया अदा किया।

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