नेतृत्व कमजोर होने पर जनप्रतिनिधि नए विकल्प तलाशते हैं : संजय निरुपम
देश की उपासना समाचार पत्र
मुम्बई ब्यूरो चीफ़ धनन्जय विश्वकर्मा
मुंबई। शिवसेना (शिंदे गुट) के उपनेता संजय निरुपम ने शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों में कथित असंतोष और अलग समूह बनाए जाने की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह किसी राजनीतिक साजिश का परिणाम नहीं, बल्कि नेतृत्व के प्रति बढ़ते असंतोष का संकेत है।
गुरुवार को आयोजित पत्रकार परिषद में संजय निरुपम ने कहा कि संसद की कार्यवाही से संबंधित व्हिप का अपना संवैधानिक और कानूनी दायरा होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में जिस प्रकार की बयानबाजी की जा रही है, उसका कोई ठोस कानूनी आधार नजर नहीं आता। उन्होंने राजनीतिक दलों से तथ्यों और संसदीय प्रक्रियाओं के आधार पर चर्चा करने की अपील की।
निरुपम ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल में जब सांसद, विधायक और पदाधिकारी लगातार पार्टी छोड़ने लगते हैं, तो यह संगठन और नेतृत्व के लिए गंभीर चिंता का विषय होता है। उनके अनुसार वर्ष 2022 के बाद से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट को छोड़कर शिवसेना (शिंदे गुट) से जुड़े हैं।
इस दौरान उन्होंने सांसद संजय रावत पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनके बयान अक्सर आक्रामक और विरोधाभासी होते हैं। निरुपम ने कहा कि जिन सांसदों की कुछ समय पहले तक प्रशंसा की जा रही थी, आज उन्हीं के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया जा रहा है, जो राजनीतिक हताशा को दर्शाता है।
उन्होंने वर्ष 2022 के महाराष्ट्र राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी कई प्रकार की चेतावनियां और दावे किए गए थे, लेकिन बाद की परिस्थितियों ने उन दावों को गलत साबित कर दिया। निरुपम ने कहा कि लोकतंत्र में धमकी और भय की राजनीति की नहीं, बल्कि जनसमर्थन, संगठनात्मक क्षमता और जनता के विश्वास की अहम भूमिका होती है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनप्रतिनिधि अपने राजनीतिक भविष्य और जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेते हैं तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था में यही प्रक्रिया राजनीतिक दलों की वास्तविक स्थिति को स्प
ष्ट करती है।

