ब्यूरो चीफ/सत्य प्रकाश उपाध्याय
नोएडा : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा में चल रहे श्रमिक आंदोलन के बीच बड़ा निर्णय लेते हुए न्यूनतम मजदूरी में लगभग 21 प्रतिशत की अंतरिम वृद्धि की घोषणा की है। यह फैसला सोमवार देर रात जारी आदेश के माध्यम से लागू किया गया।
नोएडा में लगातार चार दिनों से जारी श्रमिक प्रदर्शन सोमवार को उग्र हो गया, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने और श्रमिकों की मांगों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पूरे प्रदेश में सतर्कता बढ़ा दी। इसी के तहत मुख्यमंत्री द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों पर यह निर्णय लिया गया।
तीन श्रेणियों में लागू होगी बढ़ी हुई मजदूरी
सरकार ने संशोधित अंतरिम मजदूरी को तीन श्रेणियों में विभाजित किया है—
नोएडा और गाजियाबाद क्षेत्र
नगर निगम वाले शहर
प्रदेश के अन्य जिले
यह नई दरें 1 अप्रैल से प्रभावी मानी जाएंगी।
संशोधित वेतनमान के अनुसार:
अकुशल श्रमिक: ₹11,313 से बढ़ाकर ₹13,690 प्रति माह
अर्धकुशल श्रमिक: ₹12,445 से बढ़ाकर ₹15,059 प्रति माह
कुशल श्रमिक: ₹13,940 से बढ़ाकर ₹16,868 प्रति माह
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर ₹20,000 मासिक न्यूनतम वेतन की खबरें भ्रामक और निराधार हैं।
आंदोलन ने लिया हिंसक रूप
सोमवार को नोएडा और ग्रेटर नोएडा में प्रदर्शन हिंसक हो गया। श्रमिकों ने सड़कों पर उतरकर करीब 400 कंपनियों में तोड़फोड़ की और काम बंद कराया। इस दौरान लगभग 1,000 वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया और कई जगह आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 60 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि लगभग 250 श्रमिकों को हिरासत में लिया गया। इस दौरान एक सब-इंस्पेक्टर समेत पांच पुलिसकर्मी घायल हुए।
व्यापक असर और सुरक्षा उपाय
आंदोलन का प्रभाव नोएडा से बाहर भी देखने को मिला, जहां फरीदाबाद , Palwal और लखनऊ सहित अन्य क्षेत्रों में भी श्रमिकों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया।
हिंसा और विरोध के कारण नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली के बीच यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ, जिससे कई जगह लंबा जाम लग गया। पुलिस ने स्थिति संभालने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल कर भीड़ को तितर-बितर किया।
सरकार द्वारा घोषित अंतरिम वेतन वृद्धि का उद्देश्य श्रमिकों के असंतोष को कम करना और औद्योगिक क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करना है। हालांकि, हालात को पूरी तरह नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को अभी भी सतर्कता और संवाद की आवश्यकता बनी हुई है।

