ब्यूरो चीफ/सत्य प्रकाश उपाध्याय
गौतमबुद्ध नगर : गौतमबुद्ध नगर में श्रमिक हितों की रक्षा के लिए श्रम विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 35 ठेकेदारों के लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। इस फैसले से करीब 15,000 श्रमिकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। अब कंपनियों और फैक्ट्री प्रबंधन को मजदूरों के बैंक खातों में बिना किसी कटौती के न्यूनतम मजदूरी और अन्य देय भुगतान सीधे ट्रांसफर करना होगा।
जांच में सामने आया कि कई ठेकेदार कंपनियों से श्रमिकों का वेतन लेकर खुद भुगतान करते थे, लेकिन इस प्रक्रिया में न्यूनतम मजदूरी से कटौती की जा रही थी। नई व्यवस्था के तहत अब यह मध्यस्थता खत्म कर दी गई है और भुगतान की जिम्मेदारी सीधे नियोक्ताओं को सौंपी गई है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
श्रम विभाग की जांच में यह भी पाया गया कि कई ठेकेदार कर्मचारी भविष्य निधि (PF) और कर्मचारी राज्य बीमा (ESIC) में अनियमितताएं बरत रहे थे। कई मामलों में श्रमिकों के नाम पर या तो अंशदान जमा नहीं किया जा रहा था या कम राशि जमा की जा रही थी। इन गंभीर अनियमितताओं के आधार पर शनिवार को 10 और मंगलवार को 25 ठेकेदारों के लाइसेंस रद्द किए गए।
इस कार्रवाई से पहले विभाग ने वेतन कटौती और श्रमिक योजनाओं में गड़बड़ी के आरोप में 245 ठेकेदारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। लगातार जांच के बाद अब तक 35 ठेकेदारों पर कार्रवाई की जा चुकी है।
प्रशासन के अनुसार, इस कार्रवाई से श्रमिकों के रोजगार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कंपनियां अब सीधे मजदूरी, ओवरटाइम, PF, ESIC और अन्य सुविधाएं श्रमिकों के खातों में जमा करेंगी, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और श्रमिकों को उनका पूरा हक मिल सकेगा।
यह कदम श्रम प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

