न्यूनतम वेतनमान को लेकर नाराज शिक्षकों ने किया मुख्यमंत्री कैशलेस योजना का बहिष्कार
सुलतानपुर। अनुदानित महाविद्यालयों में स्ववित्त पोषित योजना के अंतर्गत काम कर रहे शिक्षकों ने अपनी मांगे न माने जाने पर मुख्यमंत्री कैशलेस योजना का बहिष्कार कर दिया है।
गनपत सहाय पीजी कालेज के असिस्टेंट प्रोफेसर व डॉ राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अनुदानित महाविद्यालय स्ववित्त पोषित शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ जीतेन्द्र तिवारी ने बृहस्पतिवार को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में लगभग पच्चीस वर्ष से अनुमोदित शिक्षक अत्यंत अल्प वेतन पर पूरी निष्ठा व समर्पण के साथ कार्य कर रहे हैं। इन शिक्षकों ने हमेशा न्यूनतम वेतनमान या विनियमितीकरण की मांग की है जिसे दरकिनार करते हुए सरकार ने कैशलेस का वह झुनझुना पकड़ा दिया है जिसे कभी हमने मांगा ही नहीं था। डॉ त्रिपाठी ने कहा कि वोट बैंक की राजनीति के लिए सरकार फ्री स्कूटी फ्री मोबाइल आदि बांटने में रुपये का दुरुपयोग कर रही है। इस तरह की योजनाओं में व्यय होने वाली धनराशि से काफी कम खर्च करके अनुदानित महाविद्यालयों के स्ववित्त पोषित शिक्षकों के भविष्य ,वेतन और सेवा सुरक्षा को लेकर योजना बनाई जा सकती है। पूरे प्रदेश के सरकारी डिग्री कालेजों में पढ़ा रहे स्ववित्त पोषित शिक्षकों ने अपनी मांगे न माने जाने तक कैशलेस योजना के बहिष्कार का निर्णय लिया है। संगठन के जिला अध्यक्ष और संत तुलसीदास पीजी कालेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ करुणेश भट्ट ने कहा कि एक तरफ शिक्षक जीने का आधार मांग रहा है तो दूसरी तरफ सरकार के नुमाइंदे बिना मांगे शिक्षकों को अस्पताल का रास्ता दिखा रहे हैं। जब सुचारू रूप से हमारे जीवन जीने पर ही संकट खड़ा हो तो हम कैशलेस कार्ड लेकर क्या करेंगे। राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष असिस्टेंट प्रोफेसर ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि ने कहा कि एक ही छत के नीचे सरकार से वेतन पाने वाले और स्ववित्त पोषित योजना में कार्य करने वाले शिक्षकों की कार्य प्रणाली और सेवा में वेतन को छोड़कर कोई अंतर नहीं है। अनुदानित महाविद्यालयों में वेतन को लेकर चल रही दोहरी व्यवस्था शीघ्र खत्म होनी चाहिए।

