प्रोजेक्ट अधूरा छोड़ना उद्यमी के साथ अन्याय- रजनीकांत श्रीवास्तव

प्रोजेक्ट अधूरा छोड़ना उद्यमी के साथ अन्याय- रजनीकांत श्रीवास्तव

ओडीओपी और एमएसएमई के रिवाइवल एवं रिस्ट्रक्चरिंग पर गंभीरता से विचार करे बैंक — उद्यमियों को प्रोत्साहन देने के बजाय कर्ज के दबाव में डालना चिंताजनक

प्रयागराज। के.पी. ट्रस्ट के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी रजनीकांत श्रीवास्तव ने कहा कि किसी उद्यमी के प्रोजेक्ट को बीच में अधूरा छोड़ देना उसके वर्षों के परिश्रम, पूंजी निवेश और भविष्य की योजनाओं के साथ अन्याय है।

उन्होंने कहा कि एक उद्यमी अपने व्यापार को खड़ा करने के लिए वर्षों तक मेहनत करता है, एक-एक पैसा जोड़ता है और बैंक से मिले वित्तीय सहयोग के आधार पर रोजगार सृजन एवं आर्थिक विकास का सपना देखता है। लेकिन यदि प्रोजेक्ट पूरा होने से पहले ही वित्तीय सहायता बाधित हो जाए, तो उद्यमी के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।

श्री श्रीवास्तव ने कहा कि बैंक से ऋण लेकर प्रोजेक्ट स्थापित करने वाला उद्यमी कारोबार शुरू होने के बाद होने वाली आय से बैंक की किस्तों और ब्याज का भुगतान करने की योजना बनाता है। ऐसे में यदि प्रोजेक्ट समय पर पूरा ही नहीं हो पाता, तो उद्यमी की आय का स्रोत विकसित होने से पहले ही उस पर ऋण का दबाव बढ़ने लगता है। ऐसी परिस्थितियों में बैंक को केवल बकाया वसूली पर ध्यान देने के बजाय प्रोजेक्ट की वास्तविक स्थिति, उसके पूरा होने की संभावनाओं और उद्यमी की पुनर्भुगतान क्षमता पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *