बलरामपुर में 13,524 स्वयं सहायता समूहों से बदली ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी, ‘लखपति दीदी’ बनकर महिलाएं लिख रहीं आत्मनिर्भरता की नई कहानी

बलरामपुर में 13,524 स्वयं सहायता समूहों से बदली ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी, ‘लखपति दीदी’ बनकर महिलाएं लिख रहीं आत्मनिर्भरता की नई कहानी

बलरामपुर, (आरएनएस )। उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप ग्रामीण विकास के लिए संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बलरामपुर जिले में महिला सशक्तीकरण और स्वावलंबन का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब परिवारों की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें रोजगार और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास अब सामाजिक और आर्थिक बदलाव का आधार बन रहे हैं। जिले में वर्तमान में 13,524 महिला स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनके माध्यम से हजारों ग्रामीण परिवारों को आर्थिक मजबूती मिल रही है।परंपरागत रूप से घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं अब समूहों के माध्यम से वित्तीय प्रबंधन, उद्यमिता और सामाजिक विकास की मुख्यधारा में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। जिला प्रशासन के समन्वय से इन समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तीन स्तरीय वित्तीय एवं संस्थागत सहयोग प्रणाली लागू की गई है। समूहों को रिवॉल्विंग फंड, सामुदायिक निवेश निधि तथा बैंकों के माध्यम से सुगम ऋण की सुविधा समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जा रही है। इससे ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक जरूरतों के लिए साहूकारों पर निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल रही है।राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की वार्षिक आय में स्थायी वृद्धि करना और अधिक से अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में पहुंचाना है। इसके लिए परिवारों की कम से कम एक लाख रुपये वार्षिक आय सुनिश्चित करने की दिशा में कार्ययोजना तैयार की गई है। वित्तीय साक्षरता, कौशल विकास प्रशिक्षण और उद्यम स्थापना के माध्यम से महिलाओं को आय के विभिन्न स्रोतों से जोड़ा जा रहा है।बलरामपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के साधनों को बढ़ाने के लिए कृषि और गैर-कृषि दोनों क्षेत्रों में विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आधुनिक कृषि पद्धतियों, पशुपालन और डेयरी संचालन के साथ-साथ सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, किराना व्यवसाय, दोना-पत्तल निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय हस्तशिल्प जैसे छोटे उद्यम सफलतापूर्वक संचालित कर रही हैं।ग्राम पंचायत हंसुवाडोल की शीतला देवी की कहानी इस बदलाव की प्रेरक मिसाल है। करीब दो वर्ष पहले स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें वित्तीय सहायता के रूप में लगभग 70 हजार रुपये मिले। इस धनराशि और परिवार के सहयोग से उन्होंने किराना दुकान तथा ब्यूटी पार्लर का काम शुरू किया। कारोबार में निरंतर प्रगति के बाद शीतला देवी ने आधुनिक दोना-पत्तल निर्माण मशीन स्थापित कर अपने व्यवसाय का विस्तार किया।आज शीतला देवी का उद्यम न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहा है, बल्कि उन्होंने गांव के चार अन्य लोगों को भी नियमित रोजगार उपलब्ध कराया है। उनकी सफलता ने उन्हें जिले में एक सफल और अनुकरणीय ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान दिलाई है। उनका उदाहरण यह बताता है कि उचित वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं स्वयं रोजगार हासिल करने के साथ-साथ दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकती हैं।जिले में स्थापित 13,524 स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था का स्वरूप भी बदल रहा है। जिला प्रशासन ने स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संगठनों और संकुल स्तरीय संघों का मजबूत नेटवर्क तैयार किया है। इसके माध्यम से अंतिम पायदान पर खड़ी महिलाओं तक विकास योजनाओं और वित्तीय सेवाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित की जा रही है।महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ ही उन्हें बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं से भी जोड़ा गया है। समूह की महिलाओं को बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट और विद्युत सखी जैसी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। ये महिलाएं घर-घर जाकर डिजिटल वित्तीय सेवाएं, पेंशन वितरण, छात्रवृत्ति निकासी, बिजली बिल भुगतान और राजस्व संग्रह जैसे कार्यों को कुशलतापूर्वक अंजाम दे रही हैं।डिजिटल सेवाओं के विस्तार से दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को घर पर ही पारदर्शी बैंकिंग सेवाएं मिल रही हैं। वहीं इन सेवाओं से जुड़ी महिलाओं को नियमित मानदेय और आय के रूप में सम्मानजनक आर्थिक लाभ प्राप्त हो रहा है। इससे महिलाओं की परिवार में निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक प्रतिष्ठा में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।उद्यमिता विकास के तहत महिलाओं को आधुनिक विपणन तकनीकों और उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग की जानकारी भी दी जा रही है। स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए मेलों, प्रदर्शनियों और विशेष बिक्री केंद्रों की व्यवस्था की जा रही है। इससे ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को उचित बाजार और बेहतर मूल्य मिल रहा है।आर्थिक स्वावलंबन ने बलरामपुर की ग्रामीण महिलाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामूहिकता की भावना को भी मजबूत किया है। अब महिलाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता जैसे पारिवारिक एवं सामुदायिक विषयों पर सक्रिय भूमिका निभाते हुए निर्णय लेने में भागीदारी कर रही हैं। यह बदलाव केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे ग्रामीण परिवेश को सकारात्मक दिशा दे रहा है।बलरामपुर में लागू आजीविका संवर्धन मॉडल यह दर्शाता है कि लक्षित वित्तीय सहायता, संस्थागत मार्गदर्शन और महिलाओं की मेहनत एवं लगन के माध्यम से पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में भी व्यापक आर्थिक बदलाव लाया जा सकता है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अब केवल सरकारी योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की सक्रिय संचालक बन रही हैं।प्रदेश और केंद्र सरकार के साझा प्रयासों से संचालित यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों से गरीबी उन्मूलन और महिला नेतृत्व आधारित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। जिला प्रशासन के निरंतर प्रयासों से बलरामपुर की ‘लखपति दीदियां’ आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को धरातल पर साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।


 

 

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