मरणोपरांत मेजर ध्यानचंद को मिले भारत रत्न: प्रो. आशीष प्रताप सिंह
-मेजर ध्यानचंद खेल उत्थान समिति ने आयोजित किया वृहद रक्तदान शिविर
अयोध्या। हॉकी के जादूगर एवं महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद जी की जयंती के अवसर पर शनिवार को जिला चिकित्सालय, अयोध्या स्थित ब्लड बैंक में वृहद रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का आयोजन मेजर ध्यानचंद खेल उत्थान समिति के तत्वावधान में किया गया। शिविर का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या के क्रीड़ा सचिव प्रो. आशीष प्रताप सिंह ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर उन्होंने रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि रक्त का कोई विकल्प नहीं है। रक्तदान से बढ़कर कोई नेक और पुनीत कार्य नहीं हो सकता। इसकी वास्तविक अहमियत तब समझ में आती है, जब किसी अपने को जीवन बचाने के लिए रक्त की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि मेजर ध्यानचंद भारतीय खेल जगत के गौरव हैं। उन्होंने अपने अद्भुत खेल कौशल से भारत को विश्व पटल पर गौरवान्वित किया और ओलंपिक खेलों में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय हॉकी को नई पहचान दिलाई। उन्होंने भारत सरकार से मांग की कि हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद जी को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया जाए, जिससे देश के महानतम खिलाड़ियों में से एक को उचित राष्ट्रीय सम्मान मिल सके। समिति के अध्यक्ष आकाश गुप्ता ने कहा कि मेजर ध्यानचंद खेल उत्थान समिति खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ लगातार जनहित एवं सामाजिक सेवा के कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि मेजर ध्यानचंद जी को भारत रत्न देने की मांग को लेकर राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री को स्पीड पोस्ट के माध्यम से पत्र भी प्रेषित किया गया है। समिति के महासचिव विजय वर्मा एवं लोको पायलट संजय यादव ने कहा कि संस्था का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराकर उनका जीवन बचाना है। इसी उद्देश्य से संस्था द्वारा निरंतर रक्तदान शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि किसी भी मरीज अथवा उसके परिजन को रक्त के लिए परेशान न होना पड़े। शिविर में रक्तदाताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए रक्तदान किया। कार्यक्रम के समापन पर सभी रक्तदाताओं को प्रमाणपत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।
धोखा देकर कोर्ट से स्टे लेने के मामले में रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश
-मामला एक करोड़ 90 लाख रुपए के स्टे आदेश का
अयोध्या। धोखा देकर कोर्ट से स्टे आदेश प्राप्त करने के मामले में कोर्ट ने आरोपी सुशील चतुर्वेदी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करके विवेचना करने का आदेश कोतवाली नगर के प्रभारी को दिया है यह आदेश अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन आशुतोष सिंह की अदालत से हुआ है। अधिवक्ता एखलाक अहमद तथा श्रवण यादव ने बताया कि साधना तिवारी निवासी फ्रेंड्स कॉलोनी थाना फ्रेंड्स कॉलोनी जिला इटावा के साथ प्लाट देने के नाम पर ठगी हुई थी। इस पर उन्होंने सुशील चतुर्वेदी तथा उनकी पत्नी ममता जायसवाल सहित पांच लोगों के खिलाफ करीब 10 करोड रुपए ठगी की रिपोर्ट लिखाई थी। दोनों के खाते में 2 करोड़ 45 लाख 38877 रुपए जमा था। इस रकम में से एक करोड़ 90 लाख रुपए अवमुक्त कर साधना तिवारी के खाते में ट्रांसफर किए जाने के लिए न्यायालय से 22 जनवरी 2026 को आदेश हुआ था। इस आदेश को सुशील चतुर्वेदी ने रिट याचिका के माध्यम से उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी लेकिन वहां से कोई स्टे का आदेश नहीं पारित हो सका। जिस पर इस तथ्य को छुपाते हुए सुशील ने जिला जज के न्यायालय में निगरानी शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत किया और धोखे से आदेश दिनांक 22 जनवरी 2026 के विरुद्ध अंतरिम स्टे आदेश भी प्राप्त कर लिया। आरोप है कि उसी दिन उच्च न्यायालय लखनऊ में उपस्थित होकर फोटो भी खिंचवाया। इसी मामले में कोर्ट ने सुशील जायसवाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करके विवेचना करने का आदेश दिया है।

