मानसून की बारिश व अतिवृष्टि से सजग रहने की जरुरत – सीएमओ
(डाक्टर अजय तिवारी जिला संवाददाता)
अयोध्या।मानसून की बारिश व अतिवृष्टि से हम सभी को सजग रहने की जरुरत है।मानसून की बारिश के साथ ही संक्रमण, जलजनित रोगों और मच्छरजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।जिससे एक तरफ बाढ़ से जन जीवन तो प्रभावित होता ही साथ-साथ बीमारियों से भी आमजन के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।यह बाते सीएमओ डाक्टर देवेंद्र सिंह भिटौरिया ने कही।उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में अपने अपने परिवार की बाढ़ से बचाव एवं स्वास्थ्य की रक्षा के लिये जनपदवासियों से अपील की जाती है कि आप सावधानी और कुछ उपायों को अपना कर अपना एवं अपने परिवारजन को सुरक्षित रख सकते हैं।बाढ़ आने से पहले अफवाहों पर ध्यान न दें, शांत रहें, घबरायें नही।आपातकालीन संपर्क के लिये मोबाइल फोन सदैव चार्ज रखें।टी०वी० / समाचार पत्रों के माध्यम से मौसम की ताजा जानकारी रखें।मवेशियों / पालतू जानवरों के लिये उन्हे बांध कर न रखें।सुरक्षा एवं जीवन रक्षा के लिये आवश्यक वस्तुओं की इमरजेंसी किट / प्राथमिक उपचार किट तैयार कर लें।बताया कि बाढ़ के पानी में वाहन न चलायें।बाढ़ के पानी में जाने से बचें और यदि जरूरी हो तो उचित जूते पहन कर ही जायें। सीवर लाइनों, गटरों, नालों, पुलियों आदि से दूर रहें साथ ही बिजली के खम्भों/तारों से भी दूर रहें। ताजा पका हुआ अथवा सूखा खाना खायें व खाने को हमेशा ढंक के रखें। पानी उबाल कर पियें। कीटनाशकों / डिसइंफेक्टेंट के उपयोग से अपने घर एवं आस पास की जगहों को साफ व स्वच्छ रखें। गहरे पानी में मत उतरें, यदि आवश्यक हो तो पहले एक डंडे से पानी की गहराई का अनुमान लगा लें।इस समय आप पर्याप्त मात्रा में पानी पियें, ताजा और स्वच्छ भोजन खायें, अपने घरों/कूलर / कंटेनर/नालियों / गढ्ढों व आस-पास पानी को इकट्ठा न होने दें क्योंकि रूका हुआ पानी मच्छरों के पनपने के प्रमुख स्रोत होते हैं जो मच्छरजनित रोगों से लोगों में बीमारियां फैलाते हैं ऐसी स्थिति में समस्त रूके हुए पानी के निस्तारण व साफ-सफाई के प्रयासों से मच्छरजनित बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ायें, मच्छरों के काटने से बचाव करें।इस मौसम में मच्छरों का प्रकोप सबसे ज्यादा होता है और मच्छर सुबह व शाम सबसे अधिक सक्रिय होते हैं, मच्छरजनित बीमारियों जैसे मलेरिया, डेगू, चिकनगुनिया से बचाव के लिये शरीर को ढकें व पूरी आस्तीन वाले कपड़े पहने, खिडकियों पर जाली लगवायें और सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें, कोशिश करें कि नियमित व्यायाम की आदत अपनायें, तुरन्त चिकित्सा सहायता लें क्योंकि बीमारियों से होने वाली जटिलताओं को शीघ्र निदान द्वारा रोका जा सकता है जैसे लगातार बुखार, गंभीर दस्त, चकत्ते या सांस लेने में कठिनाई की स्थिति में तत्काल अपने नजदीकी सरकारी चिकित्सा ईकाई पर चिकित्सक से परामर्श करें व ईलाज करायें स्वंय से दवा लेने से बचें।बाढ एवं स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव हेतु स्वास्थ्य विभाग की तैयारी जनपद के भौगोलिक स्थिति के अनुसार बाढ़ का सर्वाधिक प्रभाव सरयू नदी से होता है। सरयू नदी में नेपाल द्वारा पानी छोड़े जाने के कारण कभी-कभी बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। सरयू नदी की बाढ़ का प्रभाव सामु० स्वा० केन्द्र सोहाबल, रुदौली, पूराबाजार, मसौधा एवं मयाबाजार के कुछ क्षेत्रों तथा अयोध्या नगर एवं अयोध्या नगर के कुछ क्षेत्रों में होता है। कुछ भीतरी क्षेत्र में अतिवृष्टि के कारण जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है। इन क्षेत्रों की बाढ़ चौकियाँ पूर्ववत् निर्धारित है, इन स्थानों पर विशेष ड्यूटी हेतु चिकित्सा अधिकारियों / कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है। विभाग का पूर्ण प्रयास है कि पूर्वानुमान के आधार पर इन चौकियों पर ड्यूटी हेतु कर्मचारियो को सही समय पर सचेत कर दिया जाय, सभी सम्बन्धित अधिकारी / कर्मचारीगण का यह दायित्व होगा कि प्रत्येक दशा में बाढ़ प्रभावित परिवारों को संक्रामक रोगों से बचाव एवं उपचार व्यवस्था तत्काल करना सुनिश्चित करेंगे। इसके अतिरिक्त किसी भी आपात स्थिति से निपटने हेतु सा०स्वा० केन्द्र / प्रा०स्वा० केन्द्रों पर एक-एक सचल चिकित्सीय दल एम्बुलेंस के साथ तैनात रहेगा जो कि राहत शिविरों में जा कर बीमार लोगो का उपचार करेंगे। प्रत्येक विकास खण्ड के सा०स्वा० केन्द्र / प्रा०स्वा० केन्द्रों के अधीक्षक / प्रभारी चिकित्सा अधिकारी बाढ़ राहत कार्य के नोडल अधिकारी नामित है, जो अपने क्षेत्र में आवश्यक कार्यवाही हेतु सीधे उत्तरदायी होगें।

