रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

31 मई : रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

प्रनतपाल रघुनायक,
करुना सिंधु खरारि ।
गएँ सरन प्रभु राखिहैं,
तव अपराध बिसारि ।।
( सुंदरकांड , दो. 22)
जय सियाराम 🙏🙏
श्री हनुमान जी को मेघनाद नागपाश से बांध कर रावण के दरबार लाता है , रावण उनसे कुछ प्रश्न करता है, श्री हनुमान जी उसको जबाब देते हैं और समझाते हुए रावण से वे कहते हैं कि श्री राम जी शरणागत के रक्षक हैं , करुणा के सागर हैं , शरण में जाने पर श्री राम जी तुम्हारा अपराध भूल कर तुम्हें अपनी शरण में रख लेंगे ।
आत्मीय जन ! श्री राम जी शरणागत को स्वीकार कर लेते हैं , वे शरणागत के रक्षक हैं , शरणागत की पुरानी बातों पर वे ध्यान नहीं देते हैं , उनकी शरण लेकर , उनके आश्रय में आप अपना नवजीवन प्रारम्भ कर सकते हैं । अथ….. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम,जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम। सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

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