लड़की को जीने दो

लड़की को जीने दो

 

भावना रावल

कक्षा 12वीं

सैलानी, उत्तराखंड

 

लोग कहते हैं, लड़की हो, कम हँसा करो,

हर दर्द को दिल में दबाकर जिया करो।

कपड़ों से लेकर हँसी तक पर पहरा क्यों है?

मेरी पसंद से दुनिया को परेशानी क्यों है?

 

मेरी हंसी मेरी खुशी है, मेरे आँसू मेरा दर्द,

मेरे सपनों पर क्यों लगाई जाती हैं बंदिशें हर बार?

मैं लड़की हूँ, कोई गलती नहीं,

मेरी आजादी कोई ज़िद नहीं।

 

मेरी भी पसंद है, मेरे भी अरमान हैं,

मेरी आँखों में भी खुला आसमान है।

मुझे कमजोर न समझो, मेरी खामोशी को हार नहीं,

मुझे अपनी तरह जीने दो, मे

रा भी यह अधिकार है।

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