वाहनों के बढ़ते दबाव से अयोध्या में जाम, शाम होते ही सड़कों पर थमने लगते हैं पहिए

वाहनों के बढ़ते दबाव से अयोध्या में जाम, शाम होते ही सड़कों पर थमने लगते हैं पहिए

 

11 से 22 अक्टूबर के बीच ही निकले 2135 कई श्रेणी के वाहन – डॉ आर पी सिंह

 

(डॉ अजय तिवारी जिला संवाददाता)

 

अयोध्या।रामनगरी में यातायात व्यवस्था की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।शहर में शायद ही कोई ऐसा प्रमुख चौराहा हो,जहां लोगों को जाम से जूझना न पड़ता हो।खासकर शाम होते ही सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ने से यातायात की रफ्तार थमने लगती है।कहीं सड़क खोदकर छोड़ दी गई है तो कहीं निर्माण कार्य के चलते रास्ता संकरा हो गया है।ऐसे में ई-रिक्शा की बढ़ती आवाजाही समस्या को और गंभीर बना रही है।शहर वासियों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को रोजाना जाम से जूझना पड़ रहा है।शहर में यातायात बाधित होने के पीछे सड़क निर्माण कार्य, सड़कों की सीमित चौड़ाई और वाहनों की बढ़ती संख्या प्रमुख कारणों के रूप में सामने आ रहे हैं। कई स्थानों पर सड़क खोदने के बाद आवागमन के लिए पर्याप्त जगह नहीं बचती।वहीं, ई-रिक्शा की आवाजाही और चौराहों के आसपास वाहनों के रुकने से जाम की स्थिति बन जाती है।शाम के समय कार्यालयों से लौटने वाले लोगों, स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने से समस्या और विकराल हो जाती है।अयोध्या आरटीओ कार्यालय के मुताबिक इतना माह 11 से 22 अक्टूबर 2026 तक विभिन्न श्रेणियों के कुल 2135 वाहन निकले है।एआरटीओ प्रशासन डॉक्टर आरपी सिंह ने बताया कि इनमें 1640 मोटरसाइकिल और स्कूटर,219 मोटर कार, 99 तीन पहिया यात्री वाहन, 39 मालवाहक वाहन, 37 ई-रिक्शा तथा 36 कार्ट सहित ई-रिक्शा शामिल हैं।इसके अलावा 15 मोटर कैब, 24 मोपेड, दो बस, दो शैक्षणिक संस्थानों की बस, छह निर्माण उपकरण वाहन, एक मैक्सी कैब, 14 तीन पहिया मालवाहक वाहन और एक व्यावसायिक ट्रैक्टर का विवरण भी रिपोर्ट में दर्ज है।कहा कि उपलब्ध आंकड़ों में कई वाहन कम अवधि में ही दर्ज हुए हैं।इससे वाहनों की आवाजाही का अंदाजा लगाया जा सकता है।शहर में जाम से निजात दिलाने के लिए सड़क निर्माण कार्यों को समय से पूरा कराने, खोदी गई सड़कों की मरम्मत, प्रमुख चौराहों पर यातायात प्रबंधन और ई-रिक्शा के व्यवस्थित संचालन की जरूरत है।व्यस्त मार्गों पर अतिक्रमण और बेतरतीब पार्किंग पर नियंत्रण के साथ शाम के समय अतिरिक्त यातायात पुलिस की तैनाती भी राहत दे सकती है।वही रामनगरी में श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही के बीच यातायात व्यवस्था को सुचारु रखना बड़ी चुनौती है।

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