शरीफाबाद में तेंदुए की दहशत! वन विभाग ने लगाया पिंजरा
मवेशियों पर ताबड़तोड़ हमलों से सहमे ग्रामीण
बाराबंकी। सुबेहा थाना क्षेत्र के शरीफाबाद गांव में पिछले कई दिनों से कथित तौर पर तेंदुए की मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का दावा है कि इलाके में घूम रहा जंगली जानवर अब तक कई मवेशियों और जंगली जानवरों पर हमला कर चुका है। रात के समय ग्रामीण खेतों की ओर जाने से बच रहे हैं, वहीं छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी परिवार चिंतित हैं। हालांकि, वन विभाग ने अभी तेंदुए की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। विभागीय टीम लगातार क्षेत्र में कांबिंग कर रही है और जानवर को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाकर निगरानी की जा रही है। ग्रामीण राम पदारथ तिवारी के मुताबिक, शाम करीब 7 बजे उनके घर के सामने बने शौचालय के पास कुछ छुट्टा मवेशी बैठे हुए थे। इसी दौरान मवेशी अचानक तेजी से भागने लगे और एक जंगली जानवर उनके दरवाजे के सामने आकर दिखाई दिया। राम पदारथ तिवारी का कहना है कि उन्हें शक हुआ तो उन्होंने टॉर्च लेकर घर से कुछ आगे जाकर देखा। उनके मुताबिक, एक बड़ा अज्ञात जंगली जानवर एक बछड़े को पकड़े हुए था। शोर मचाने पर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचने लगे। ग्रामीणों की भीड़ देखकर जानवर जंगल की तरफ भाग गया। ग्रामीणों के अनुसार बछड़े के शरीर पर कई जगह दांत के निशान मिले हैं। जिला उपाध्यक्ष रामबरन यादव ने दावा किया कि इलाके में पिछले करीब 15 दिनों से जंगली जानवर देखे जाने की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों के अनुसार कई स्थानों पर नीलगाय और बंदरों पर भी हमला किया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि अखिलेश तिवारी के खेत के पास एक नीलगाय पर हमला किया गया, जहां उसके अवशेष और कंकाल पड़े मिले। इसी तरह इलाके में अन्य जंगली जानवरों के अवशेष मिलने की भी बात कही जा रही है। हालांकि, इन घटनाओं में हमला करने वाला जानवर तेंदुआ ही था या कोई अन्य जंगली जानवर, इसकी पुष्टि अभी वन विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगी। ग्रामीणों से लगातार मिल रही सूचना के बाद वन विभाग की टीम शरीफाबाद और आसपास के तराई क्षेत्र में पहुंची। टीम ने संभावित स्थानों पर कांबिंग अभियान चलाया। बताया गया कि वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी रातभर क्षेत्र में निगरानी करते रहे, लेकिन जंगली जानवर का कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिल सका। जानवर की गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग ने उसे पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया है और संभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगली जानवर की दहशत का सबसे ज्यादा असर तराई क्षेत्र में रहने वाले किसानों पर पड़ा है। रात के समय किसान अक्सर खेतों की रखवाली और सिंचाई के लिए बाहर जाते हैं, लेकिन डर के कारण अब लोग अकेले खेतों की ओर जाने से बच रहे हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि वास्तव में तेंदुआ इलाके में मौजूद है तो छोटे बच्चों और अकेले लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता है।
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वन विभाग ने नहीं की तेंदुए की पुष्टि
फिलहाल पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वन विभाग ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि शरीफाबाद में दिखाई देने वाला जानवर तेंदुआ ही है। विभाग की टीम जंगली जानवर की पहचान और उसकी गतिविधियों का पता लगाने के लिए लगातार निगरानी कर रही है। पिंजरा लगाने के साथ ही संभावित रास्तों और जंगल के आसपास के क्षेत्रों में कांबिंग की जा रही है। वन विभाग का प्रयास है कि जानवर की पहचान होने के बाद उसे सुरक्षित तरीके से पकड़कर ग्रामीण आबादी से दूर किया जा सके। लगातार जंगली जानवर दिखाई देने और मवेशियों पर हमले के दावों के बीच शरीफाबाद और आसपास के गांवों में चिंता बढ़ गई है। ग्रामीण प्रशासन और वन विभाग से जल्द से जल्द जानवर को पकड़ने तथा गांव में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
रेलवे स्टेशन पर मिली पांच बालिकाएं सकुशल परिजनों को सौंपी गईं
बाराबंकी। चाइल्ड हेल्पलाइन बाराबंकी की तत्परता और बाल कल्याण समिति के सक्रिय हस्तक्षेप से रेलवे स्टेशन पर लावारिस अवस्था में मिली पांच बालिकाओं को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। सभी बच्चियां पूर्वी चंपारण (बिहार) की निवासी हैं। जानकारी के अनुसार मंगलवार को चाइल्ड हेल्पलाइन बाराबंकी को सूचना मिली कि पांच बालिकाएं बाराबंकी रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या-4 पर अकेली और असहाय स्थिति में बैठी हैं। सूचना मिलते ही चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और बच्चियों से बातचीत कर उनकी स्थिति की जानकारी प्राप्त की। पूछताछ के दौरान बालिकाओं ने बताया कि वे सभी पूर्वी चंपारण, बिहार की रहने वाली हैं। इसके बाद टीम ने रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) बाराबंकी के सहयोग से बालिकाओं को अपनी सुपुर्दगी में लिया तथा पूरे प्रकरण से बाल कल्याण समिति को अवगत कराया। बच्चियों का सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया गया और उनके परिजनों से संपर्क स्थापित किया गया। मंगलवार को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रकरण की सुनवाई हुई। समिति ने बच्चियों एवं उनके परिजनों से विस्तार से बातचीत कर तथ्यों का सत्यापन किया। सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने और समिति के संतुष्ट होने के बाद पांचों बालिकाओं को उनके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया। इस दौरान चाइल्ड हेल्पलाइन, आरपीएफ तथा बाल कल्याण समिति की समन्वित कार्यवाही की सराहना की गई। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी बच्चे के संकट में होने या लावारिस अवस्था में मिलने की सूचना तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर देकर उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

