18 अप्रैल- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
मागी नाव न केवट आना ।
कहइ तुम्हार मरमु मैं जाना ।।
चरन कमल रज कहुँ सबु कहई
मानुष करनि मूरि कछु अहई।।
( अयोध्याकाण्ड 99/2)
राम राम 🙏🙏
श्री राम जी ने सुमंत्र को समझा कर वापस लौटाया है और गंगा पार जाने के लिए गंगा तट पर आते हैं । केवट से नाव मांगते हैं, केवट आता नहीं है , वह कहता है कि मैं आपका मर्म जानता हूँ । आपके चरणों की धूल में सब कहते हैं कि नारी बनाने की कोई जड़ी है, मेरी नाव भी यदि नारी बन जाएगी तो हमारा परिवार भूखों मर जाएगा। इसलिए पहले हम आपका पाँव पखारेंगे उसके बाद ही पार उतारेंगे।
भक्तों ! जिसने भी श्री राम चरणों में अपने को लगाया वह सच्चे अर्थों में मनुष्य बन गया । केवट सहित अन्य के बताने पर भी हम आप श्री राम चरणों में शरणागति के मर्म से अपरिचित हैं, विरत हैं । अतः श्री राम चरणों से विरत नहीं अनुरक्त हो जाए तो मानव बन जाएँ एवं मानव होने के वास्तविक अर्थ को समझ जाएं, तो बिना देर किये श्री सीताराम जी के चरणों में अपने मन चित्त बुद्धि को स्थिर करके निरन्तर श्री सीताराम नाम भजन करते रहिए…… श्री राम जय राम जय जय राम, श्री राम जय राम जय जय राम। सीताराम जय सीताराम, सीताराम जय सीताराम।। जय सियाराम जय जय सियाराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम।
जय श्री सीताराम चरण, जय श्री सीताराम चरण शरण ।
🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

