26 दिसंबर.श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
पूँछेहु मोहि कि रहौ कहँ,
मैं पूँछत सकुचाउँ ।
जहँ न होहु तहँ देहु कहि,
तुम्हहि देखावौं ठाउँ ।।
(अयोध्याकाण्ड, दो. 127)
राम राम जी🙏🙏
वन जाते हुए श्री राम जी महर्षि बाल्मीकि जी के आश्रम आए हैं, वे महर्षि बाल्मीकि जी से अपने रहने का स्थान पूछते हैं । श्री वाल्मीकि जी कहते हैं कि मुझसे आप पूछते हैं कि मैं कहाँ रहूँ, परंतु मैं आपसे यह पूछते हुए संकोच करता हूँ कि जहाँ आप न हों, वह स्थान बता दीजिए तब मैं आपके रहने का स्थान बता दूँ ।
बंधुवर ! श्री राम जी सर्वव्यापी हैं, हर कण कण में उनका वास है। हमारे आपके अंदर यह भाव ही विकसित नहीं है कि श्री सीताराम जी की सर्वव्यापकता को अनुभव कर सकें, इसीलिए उनको हम तीर्थों आदि में ढूंढते फिरते हैं। अतः अपनी अन्तर दृष्टि बढ़ाएं और हर जगह श्री राम जी की सत्ता अनुभव करें, इसके लिये सतत श्री सीताराम नाम का भजन करते रहें। अथ…..श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

