संक्रमण का खतराय जिम्मेदारों की सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल
बल्दीराय/सुलतानपुर। वलीपुर बाजार में कूड़े-कचरे और गंदगी का अंबार अब सिर्फ बदहाली की तस्वीर नहीं, बल्कि संक्रामक बीमारियों को न्योता देने वाला खतरा बनता जा रहा है। तहसील एवं विकासखंड बल्दीराय क्षेत्र की ग्रामसभा हेमनापुर के अंतर्गत आने वाले बाजार में एक ही स्थान पर लंबे समय से जमा कूड़ा-करकट, गंदगी और जलभराव ने बाजारवासियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दुर्गंध और गंदे पानी के बीच लोगों का आवागमन मजबूरी बन गया है।
शिकायत हुई, चौपाल में गुहार लगी फिर भी नहीं जागे जिम्मेदार
बाजारवासियों का कहना है कि समस्या को लेकर पहले ही उपजिलाधिकारी बल्दीराय के समक्ष चौपाल कार्यक्रम में लिखित शिकायत की जा चुकी है। शिकायत में जलभराव से निजात के लिए सड़क किनारे नाला निर्माण और कूड़े के ढेर को हटाने की मांग की गई थी। इसके बावजूद ग्राम प्रधान और विकासखंड स्तर के जिम्मेदारों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का आरोप है।
सफाईकर्मी हैं या निजी सफाई व्यवस्था के कर्मचारी ?
सबसे गंभीर सवाल विकासखंड की सफाई व्यवस्था को लेकर उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिन सफाईकर्मियों की जिम्मेदारी सार्वजनिक स्थानों और गांव की स्वच्छता व्यवस्था संभालने की है, उनकी कार्यप्रणाली की प्रभावी निगरानी नहीं हो रही। ग्रामीणों का आरोप है कि सफाईकर्मियों की जिम्मेदारी सार्वजनिक सफाई के बजाय प्रधान के घर तक सीमित होकर रह गई है। यदि यह आरोप सही है तो सवाल सिर्फ सफाई व्यवस्था का नहीं, बल्कि सरकारी संसाधनों और कर्मचारियों के दायित्वों के कथित दुरुपयोग का भी है। आखिर सरकारी वेतन पाने वाले सफाईकर्मियों की ड्यूटी का निरीक्षण कौन कर रहा है और उनकी उपस्थिति तथा कार्यों का सत्यापन किस स्तर पर किया जा रहा है। सरकार स्वच्छता को लेकर लगातार अभियान और जागरूकता कार्यक्रम चला रही है, लेकिन वलीपुर बाजार की तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े करती दिखाई दे रही है। कूड़े का ढेर, रुका हुआ पानी और उससे उठती दुर्गंध यह पूछने के लिए पर्याप्त है कि स्वच्छता अभियान का असर कागजों पर अधिक है या जमीन पर। सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि यदि लंबे समय से कूड़ा जमा है तो नियमित सफाई व्यवस्था की निगरानी करने वाले अधिकारी-कर्मचारी क्या कर रहे हैं। क्या सफाई व्यवस्था की जांच केवल कागजी रिपोर्टों तक सीमित है। स्थानीय लोगों के मुताबिक जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है। सड़क किनारे नाला नहीं होने से पानी रुकता है और गंदगी के साथ मिलकर दुर्गंध तथा संक्रमण का खतरा बढ़ाता है। बाजारवासियों ने तत्काल नाला निर्माण कराने और कूड़े के ढेर को हटवाकर नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित कराने की मांग की है।
थाने में सुलह के बाद भी नहीं लौटाए 1.21 लाख,
अस्पताल संचालक पर गोमती में फेंकने की धमकी का आरोप
बल्दीराय/सुल्तानपुर। हलियापुर चौराहे पर स्थित एक निजी अस्पताल के संचालक पर महिला कर्मी ने कार के नाम पर 1.21 लाख रुपये हड़पने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। पीड़िता ने थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।
उमरा गांव निवासी संगीता सिंह (45) ने बताया कि वह उक्त हॉस्पिटल में रिसेप्शनिस्ट के रुप में नौ माह तक कार्यरत थी। अस्पताल संचालक डॉ. शिव कुमार मिश्रा ने अपने नाम से एक कार फाइनेंस कराई थी, जिसकी सात किस्तें 19,500 रुपये प्रतिमाह उसने खुद जमा की थी। विवाद होने पर 4 जुलाई 2024 को हलियापुर थाने में ही दोनों पक्षों में लिखित सुलह-समझौता हुआ। तय हुआ था कि महिला गाड़ी संचालक को वापस कर देगी और संचालक एक माह के भीतर उसकी जमा राशि 1 लाख 21 हजार 500 रुपये लौटा देगा। आरोप है कि गाड़ी वापस लेने के बाद संचालक ने पैसा नहीं लौटाया। पीड़िता का आरोप है कि पैसा मांगने पर गालियां दी गईं और कहा गया कि गोमती नदी में मारकर फेंकवा देंगे। धमकी से वह दहशत में है। थानाध्यक्ष हलियापुर अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि तहरीर मिली है। दोनों पक्षों को आज शनिवार शाम को बुलाया गया है सुलह-समझौते के आधार पर पैसा वापस कराने का प्रयास किया जा रहा है। विपक्षी ने पैसा देने की बात स्वीकारी है अन्यथा मुकदमा दर्ज कार्रवाई की जाएगी।
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