सरकारी खरीद में एमएसएमई के लिए बढ़े अवसर, जेम पर 20 लाख करोड़ की खरीद और 25 हजार नए वेंडर पंजीकृत

सरकारी खरीद में एमएसएमई के लिए बढ़े अवसर, जेम पर 20 लाख करोड़ की खरीद और 25 हजार नए वेंडर पंजीकृत

लखनऊ, (आरएनएस )। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सरकारी खरीद और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) से जोड़ने के उद्देश्य से गोमती नगर स्थित पीएचडी हाउस में दो दिवसीय ‘वेंडर डेवलपमेंट कार्यक्रम-2026’ का शुभारंभ हुआ। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के एमएसएमई विकास कार्यालय, कानपुर और पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में 200 से अधिक उद्यमियों, औद्योगिक संगठनों के पदाधिकारियों तथा विभिन्न सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग के सचिव प्रांजल यादव ने कहा कि प्रदेश के औद्योगिक विकास में एमएसएमई की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि राज्य के औद्योगिक क्षेत्र में 98 प्रतिशत से अधिक इकाइयां एमएसएमई श्रेणी की हैं और करीब 90 प्रतिशत इकाइयां सूक्ष्म उद्यम हैं। उन्होंने युवाओं को उद्यमिता की ओर आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार एमएसएमई की प्रमुख जरूरतों जैसे औद्योगिक भूखंड, वित्त, सब्सिडी और प्रोत्साहन को ध्यान में रखकर लगातार काम कर रही है।उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश का निर्यात करीब दो लाख करोड़ रुपये है। इसमें नोएडा का योगदान करीब 98 हजार करोड़ रुपये और गाजियाबाद का करीब 18 हजार करोड़ रुपये है। कानपुर, मुरादाबाद, भदोही, उन्नाव, बरेली, आगरा और वाराणसी जैसे औद्योगिक केंद्र भी प्रदेश के निर्यात को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विभिन्न क्षेत्रों में एकीकृत विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।प्रांजल यादव ने कहा कि वेंडर विकास और सरकारी खरीद एमएसएमई के लिए बड़े अवसर हैं। सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) पर एमएसएमई की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत है और इसके तहत लगभग नौ लाख करोड़ रुपये की खरीद की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम के माध्यम से एमएसएमई ऑर्डर और चालान के आधार पर अपने बकाया भुगतान के बदले वित्त प्राप्त कर सकते हैं। इससे भुगतान में देरी की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने उद्यमियों से डिजिटल मंचों और सरकारी खरीद से जुड़ी योजनाओं की नियमित जानकारी लेने की अपील की।

एमएसएमई विकास कार्यालय, कानपुर के निदेशक वीके वर्मा ने बताया कि सरकारी खरीद में एमएसएमई की भागीदारी बढ़ाने के लिए 25 प्रतिशत खरीद का लक्ष्य निर्धारित है। विभिन्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों द्वारा एमएसएमई से खरीद किए जाने से छोटे उद्यमों के लिए बड़े कारोबारी अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने उद्यमियों से वेंडर पंजीकरण और सरकारी खरीद की प्रक्रिया को समझकर इन अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया।जेम के उत्तर प्रदेश राज्य नोडल एवं डिप्टी सीईओ कृष्ण मुरारी ने बताया कि वर्ष 2017 में जेम के शुरू होने के बाद से अब तक करीब 20 लाख करोड़ रुपये की खरीद हो चुकी है। इसमें एमएसएमई की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत यानी लगभग नौ लाख करोड़ रुपये है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भी करीब एक लाख करोड़ रुपये की खरीद की गई है। उनके अनुसार करीब 25 हजार नए वेंडर पंजीकृत हुए हैं और एमएसएमई की भागीदारी बढ़ाने में उत्तर प्रदेश के एमएसएमई विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।रेलवे अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन के कार्यकारी निदेशक स्टोर्स अकमल वदूद ने कहा कि लखनऊ और आसपास का रेलवे तंत्र एमएसएमई के लिए व्यापक कारोबारी अवसर उपलब्ध कराता है। रायबरेली स्थित आधुनिक कोच कारखाने में करीब 7 से 8 हजार करोड़ रुपये की खरीद होती है। उन्होंने एमएसएमई उद्यमियों से मशीनरी और संयंत्र उपकरणों के क्षेत्र में विनिर्माण के अवसर तलाशने पर जोर दिया।पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के उत्तरी क्षेत्र-3 के वरिष्ठ महाप्रबंधक गिरीश गुप्ता ने बताया कि एमएसएमई के लिए ट्रांसमिशन ट्रांसफॉर्मर, रिएक्टर, इंसुलेटर और छोटे उपकरणों के साथ-साथ मानवशक्ति, बागवानी, गेस्ट हाउस, फिटिंग और रखरखाव सेवाओं में भी अवसर मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि उत्तरी क्षेत्र में करीब 70 प्रतिशत खरीद एमएसएमई से की जा रही है और एमएसएमई से 250 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद की जा चुकी है।हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, लखनऊ के उप महाप्रबंधक आउटसोर्सिंग प्रमोद बरनवाल ने कहा कि लखनऊ में एचएएल की आउटसोर्सिंग में करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि सक्षम एमएसएमई के लिए गुणवत्ता और समयबद्ध आपूर्ति सबसे महत्वपूर्ण है। सेना और नौसेना की आवश्यकताओं से जुड़े करीब 2.5 लाख ऑर्डर संभाले जा रहे हैं, ऐसे में समय पर उत्पादन और आपूर्ति की क्षमता रखने वाले उद्यमियों के लिए बड़े अवसर उपलब्ध हैं।एएलआईएमसीओ, कानपुर के उप महाप्रबंधक आलोक ठाकुर ने बताया कि कानपुर में करीब 45 एकड़ में फैला एएलआईएमसीओ का संयंत्र उसका सबसे बड़ा संयंत्र है और करीब 50 से 60 प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं के साथ काम करता है। उन्होंने एमएसएमई इकाइयों से एएलआईएमसीओ की जरूरतों के अनुरूप अपनी उत्पादन क्षमता विकसित करने का आह्वान किया।पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के उत्तर प्रदेश राज्य अध्याय के सह-अध्यक्ष एवं टेक्निकल करम ग्रुप के अध्यक्ष राजेश निगम ने कहा कि यह कार्यक्रम एमएसएमई को पीएसयू के साथ सीधे संवाद और कारोबारी अवसरों को समझने का महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने उद्यमियों से बदलती सरकारी नीतियों, नियमों और खरीद प्रक्रियाओं की जानकारी से लगातार अपडेट रहने की अपील की।भारतीय मानक ब्यूरो के जितेंद्र कुमार ने ‘विपणन, तकनीक एवं गुणवत्ता’ विषय पर प्रस्तुति देते हुए गुणवत्ता और मानकीकरण के महत्व पर प्रकाश डाला। भारतीय पैकेजिंग संस्थान, लखनऊ के प्रोफेसर अंशुमान श्रीवास्तव ने कहा कि बेहतर पैकेजिंग उत्पाद की सुरक्षा के साथ उसकी पहचान, प्रस्तुति और बाजार में स्वीकार्यता को भी प्रभावित करती है। आधुनिक और मानकों के अनुरूप पैकेजिंग अपनाने से एमएसएमई उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सकती है।कार्यक्रम के पहले दिन के अंतिम सत्र में बी2बी बैठक और पीएसयू-एमएसएमई संवाद आयोजित किया गया। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रतिनिधियों और एमएसएमई उद्यमियों के बीच खरीद आवश्यकताओं, तकनीकी मानकों, वेंडर पंजीकरण और संभावित कारोबारी सहयोग पर सीधा संवाद हुआ।तकनीकी सत्रों में एचएएल, पावर ग्रिड, एएलआईएमसीओ, आरडीएसओ, एनटीपीसी और गेल के प्रतिनिधियों ने एमएसएमई के लिए उपलब्ध कारोबारी अवसरों और खरीद आवश्यकताओं की जानकारी साझा की। जेम प्रकोष्ठ, उत्तर प्रदेश के अमन सिंह ने सरकारी ई-मार्केटप्लेस पर वेंडर पंजीकरण और सरकारी खरीद प्रक्रिया की जानकारी दी।कार्यक्रम में 20 से अधिक स्टॉल लगाए गए, जिनमें एमएसएमई और प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने अपने उत्पादों, सेवाओं, तकनीकों और उपलब्धियों का प्रदर्शन किया। आयोजन में उद्यमियों को सरकारी खरीद व्यवस्था, वेंडर पंजीकरण, गुणवत्ता मानकों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की आवश्यकताओं की जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध कराई गई।कार्यक्रम के पहले दिन के समापन पर एमएसएमई विकास कार्यालय, कानपुर के सहायक निदेशक नीरज कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया। आयोजकों का कहना है कि इस प्रकार के वेंडर विकास कार्यक्रमों से छोटे और मध्यम उद्यमों को सरकारी खरीद व्यवस्था से जुड़ने, बड़े सार्वजनिक उपक्रमों के साथ कारोबारी संबंध स्थापित करने और अपने उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

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