30 मई 2026 को ‘‘विश्व तम्बाकू निषेध दिवस‘‘ के उपलक्ष्य में जन जागरूकता फैलायें जाने हेतु हस्ताक्षर अभियान कार्यक्रम का आयोजन मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जौनपुर डा0 प्रभात सिंह की अध्यक्षता में किया गया।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जौनपुर द्वारा बताया गया कि 31 मई 2026 ‘‘विश्व तम्बाकू निषेध दिवस‘‘ पर इस वर्ष की थीम “Unmasking the Appeal: Countering Nicotine and addiction” है। तम्बाकू सेवन का ब्यापक दुष्प्रभाव है। तम्बाकू का सेवन टीबी एवं कैन्सर जैसी बीमारियों को आमंत्रित करता है। इसके सेवन से कई बीमारियां हो सकती है । लोगो को जागरुक करने के लिये प्रत्येक वर्ष 31 मई को ‘‘विश्व तम्बाकू निषेध दिवस‘‘ दिवस मनाया जाता है। तत्पश्चात गोष्ठी का आयोजन किया गया। नोडल अधिकारी तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम डा0 बी0सी0 पन्त द्वारा बताया गया कि इस वर्ष का थीम-आकर्षण का पर्दाफाश करनाः तम्बाकू और निकोटीन की लत का मुकाबला करना रखी गयी है। तम्बाकू सेवन से गम्भीर बिमारियां जैसे-मुख, फेफड़े का कैन्सर, बी0पी0, शुगर, नपुंसकता इत्यादि बीमारियो हो सकती है इस कारण कई लोग समय से पहले अपंग या मत्यु को प्राप्त करते है। उनके द्वारा युवांओ को तम्बाकू सेवन से दूर रहकर लोगो को जागरुक करने की अपील की गयी। उनके द्वारा बताया गया कि ‘‘विश्व तम्बाकू निषेध दिवस‘‘ के अवसर पर विभाग द्वारा जनपद में विभिन्न जागरुकता कार्यक्रम यथा शपथ अभियान, सभी सामु0/प्रा0स्वा0 केन्द्रो/हेल्थ एण्ड वेलनेस सेन्टरो/उपकेन्द्रो पर पर निःशुल्क एन0सी0डी0 जांच शिविरो का आयोजन किया जा रहा है। इस दिन का मुख्य उददेश्य सिगरेट और अन्य तरीको के माध्यम से तम्बाकू सेवन के हानिकारक स्वास्थ्य प्रभावों के बारे में लोगो मे जागरुकता फैलाना है। धूम्रपान करने की बुरी आदत से छुटकारा पाने में धूम्रपान करने वालों की मदद करना महत्वपूर्ण है। वालेन्ट्री हेल्थ एसोशियेशन के प्रतिनिधि श्री दिलीप पाण्डेय द्वारा बताया गया कि लोगो को तम्बाकू सेवन से मुक्त होने हेतु जिला पुरुष चिकित्सालय जौनपुर में तम्बाकू उन्मूलन केन्द्र क्रियाशील है। आकड़े बताते है कि प्रति वर्ष साठ करोड़ वृक्षो को काटकर सिगरेट बनाया जाता है और तम्बाकू जनित उत्पादो से लगभग आठ करोड़ चालीस लाख टन कार्बन डाई आक्साइड उत्सर्जित होती है जिससे वायुमण्डल का तापमान बढ़ता है इतना ही नही सिगरेट बनाने में लगभग बाइस अरब लीटर पानी का उपयोग किया जाता है इससे न केवल पर्यावरण का खतरा उत्पन्न होता है बल्कि जल की बर्बादी होती है। अगर ब्यक्ति दृढ़ इच्छाशक्ति बना ले तो वह नशा छोड़ सकता है। सभी को उक्त आभियान में सच्चे मन के साथ सक्रिय रुप से भाग लेने हेतु शपथ दिलायी गयी। उक्त कार्यक्रम में कुवर हरिबंश सिंह पैरामेडिकल कालेज की छात्र/छात्राओं द्वारा प्रतिभाग किया गया।
इस अवसर पर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकरी डा0 राजीव यादव, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा0 नरेन्द्र सिंह, डी0पी0एम0 एन0एच0एम0 सत्यव्रत त्रिपाठी, एम0एच0 कन्सलटेन्ट नीरज सिंह, एफ0एल0सी0 जय प्रकाश गुप्ता एवं एन0सी0 डी0 सेल के सभी अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहें।
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जौनपुर 30 मई, 2026 (सू0वि0) विज्ञप्ति संख्या-06
‘‘पर ड्राप मोर क्राप‘‘ योजनान्तर्गत सूक्ष्म सिंचाई पद्धति स्थापना हेतु जनपद को कुल 1644 हे0 का मिला लक्ष्य
जिला उद्यान अधिकारी द्वारा अवगत कराया गया है कि जनपद में जलस्तर में आ रही गिरावट और जल संसाधनो की कमी के कारण किसानो को समस्या का सामना करना पड रहा है, भूगर्भ जल का दोहन कम करने के लिए उद्यान विभाग की ओर से किसानो को ड्रिप, मिनी स्प्रिंलर, पोर्टेबल स्प्रिंकलर, रेनगन सिंचाई पद्धति अपनाने की सलाह दी गयी है। जिससे पानी व बिजली की बचत होगी इसके साथ ही किसान पराम्परागत खेती का तरीका बदलकर अपनी आय को भी दोगुनी कर सकते है। शहर सहित ग्रामीण इलाको में भूमिगत जलस्तर काफी नीचे पहुंच चुका है, जलस्तर को गिरने से बचाने के लिए उद्यान विभाग की ओर से ड्रिप, व स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति पर जोर दिया जा रहा है। ड्रिप सिंचाई पद्धति से बूंद-बूंद पानी पौधो की जडो में जाता है वही स्प्रिंकलर से फुव्वारे की तरह पानी की बौछार होती है। विशेषज्ञो का मानना है कि इससे पानी की 70 प्रतिशत बचत होती है। ड्रिप व स्प्रिंकलर से उर्वरक का तरल रूप से छिडकाव करने से 50 प्रतिशत की बचत होती हैं एंव खर पतवार पर नियत्रंण बना रहता है। ऊँची नीची भूमि पर भी सामान रूप से सिंचाई की जा सकती है। विभाग की ओर से किसानो को ‘‘पर ड्राप मोर क्राप‘‘ माइक्रोइरीगेशन योजनान्तर्गत अनुदान दिया जा रहा है, वित्तीय वर्ष 2026-27 वार्षिक कार्ययोजना में ‘‘पर ड्राप मोर क्राप‘‘ योजनान्तर्गत ड्रिप सिंचाई पद्धति स्थापना का लक्ष्य 499 हेक्टेयर, मिनी स्प्रिंकलर 168 हे0, माईक्रो स्प्रिंकलर 40 हे0, पोर्टेबल स्प्रिंकलर 741 हे0 एवं लार्ज वाल्यूम (रेनगन) 196 हेक्टेयर, का लक्ष्य प्राप्त है, कुल 1644 हे0 का लक्ष्य प्राप्त है। जिसमें 01 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर ड्रिप/मिनी स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति स्थापित करने पर 90 प्रतिशत का अनुदान लघु सीमांत/सीमांत कृषकों को तथा 80 प्रतिशत का अनुदान सामान्य कृषकों को दिया जाता है। इसी प्रकार पोर्टेबल स्प्रिंकलर तथा लार्ज वाल्यूम (रेनगन) प्रति हेक्टेयर स्थापित करने पर 75 प्रतिशत लघु सीमांत/सीमांत तथा 65 प्रतिशत सामान्य कृषकों को अनुदान दिया जा रहा है।
योजना का लाभ लेने हेतु इच्छुक कृषक ऑनलाईन upmip पोर्टल पर आवेदन कर सकते है। इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए कृषकों के प्रक्षेत्र पर सिंचाई व्यवस्था हेतु नलकूप लगा होना चाहिए, आवश्यक प्रपत्र के लिए कृषक की स्वयं की जमीन की खतौनी, आधार कार्ड, बैंक पासबुक की फोटो कॉपी एवं एक नवीनतम फोटो पासपोर्ट साइज के साथ किसी भी कार्य दिवस में कार्यालय जिला उद्यान अधिकारी में उपस्थित होकर अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
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जौनपुर 30 मई, 2026 (सू0वि0) विज्ञप्ति संख्या-07
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण जौनपुर द्वारा आंधी तूफान एवं वज्रपात से बचाव को लेकर एडवाइजरी जारी
आँधी तूफान के दौरान सावधानियों हेतु क्या करें- टिन की छत, होर्डिंग, क्षतिग्रस्त मकान, पेड़, बिजली के खंभे एवं मोबाइल टावर से दूर रहें। घर के बाहर या छत पर रखी हुई भारी वस्तुएं उड़ सकती हैं, इसलिये उन्हें बांधकर रख दें। यात्रा कर रहे हैं तो सुरक्षित स्थान देखकर रुक जाएं।
आँधी तूफान के दौरान सावधानियों हेतु क्या ना करें- धारदार एवं नुकीली वस्तुओं को खुले में ना रखें। धातु से बनी वस्तुओं का उपयोग न करें एवं पेड़ की शरण में ना जायें।
आकाशीय विद्युत के परिप्रेक्ष्य में सावधानियों हेतु क्या करें- पक्के मकान की शरण में चले जाएं। खिड़की, दरवाजे एवं बरामदे से दूर रहें। पेड़, मोबाइल टावर, बिजली के खंभों, कच्चे मकान, तालाब, जलाशय से दूरी बना कर रखें। खराब मौसम में बच्चों को बाहर न खेलने दें, लोहे की खिड़की, दरवाजे व हैण्डपम्प आदि को न छुएं। यदि खुले खेत में फंस गये हैं तो दोनों कानों को बंद कर पैरों को सटा लें तथा घुटनों का टेक लेकर उकड़ू बैठ जाएं। वर्षा, आंधी तूफान, आकाशीय बिजली एवं बदलते मौसम का सटीक पूर्वानुमान देगा बहुउपयोगी सचेत एप एवं दामिनी एप जिससे कि प्रशासन, स्वयंसेवक तथा जागरुक लोगों द्वारा पूर्व चेतावनियों एवं अलर्ट को आम जनमानस तक समय से पहुचांकर आपदा से होने वाली क्षति को कम किया जा सकता है। गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है दामिनी ऐप एवं सचेत एप स
आकाशीय विद्युत के परिप्रेक्ष्य में सावधानियों हेतु क्या ना करें- पेड़ के नीचे ना खड़े हों। दीवार के सहारे टेक न लगायें। धातु युक्त नल एवं फ्रिज को ना छुएँ। धातु से बने छाते का प्रयोग न करें। घरों में चलने वाले भारी विद्युत उपकरणों को प्लग से अलग कर दें। खुल वाहनों मे सवारी न करें, बचाव के लिए जमीन पर न लेटें तथा तैराकी या नौकायन न करें।
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