राम मंदिर ट्रस्ट मामले में संजय सिंह का बड़ा दावा, SIT रिपोर्ट का ‘गायब पन्ना नंबर 6’ सार्वजनिक करने का आरोप
लखनऊ, (आरएनएस )। आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने गुरुवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में गंभीर आरोप लगाते हुए पूर्व में गठित विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट का कथित रूप से गायब पन्ना नंबर छह सार्वजनिक किया। संजय सिंह ने दावा किया कि इस पन्ने में ट्रस्ट से जुड़े लोगों की भूमिका और मंदिर परिसर में हुई कथित चोरी तथा गबन को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि यदि पहले की SIT रिपोर्ट में जिम्मेदारी तय की गई थी तो बाद में कुछ लोगों को क्लीन चिट दिए जाने का आधार सार्वजनिक किया जाना चाहिए।संजय सिंह ने कहा कि 17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने जांच में देरी पर नाराजगी जताते हुए SIT से स्थिति रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी दिन समाचार पत्रों में आरोपियों को क्लीन चिट दिए जाने से संबंधित खबरें सामने आईं। आप नेता ने इसे जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाला घटनाक्रम बताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही प्रक्रिया के बीच इस तरह की खबरें सामने आना गंभीर विषय है। उन्होंने वर्तमान SIT अध्यक्ष किरन एस. को पत्र भेजकर मुलाकात का समय मांगा है और कहा कि वह जांच के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराना चाहते हैं।संजय सिंह ने प्रेस वार्ता में SIT रिपोर्ट की एक प्रति दिखाते हुए दावा किया कि विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली SIT रिपोर्ट से पन्ना नंबर छह गायब कर दिया गया था। उनके अनुसार, अब प्राप्त इस पन्ने में डॉ. अनिल मिश्रा द्वारा बैंक के निर्धारित नियमों और मानक संचालन प्रक्रिया को शिथिल किए जाने का उल्लेख है। उन्होंने दावा किया कि रिपोर्ट में इससे मंदिर परिसर में चोरी और गबन की परिस्थितियां पैदा होने की बात कही गई है। संजय सिंह के मुताबिक, रिपोर्ट में 40 दिनों के दौरान 70 बार चोरी होने और करीब 81 लाख रुपये की बरामदगी का उल्लेख है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जांच रिपोर्ट में पदाधिकारियों की जिम्मेदारी की ओर संकेत किया गया था तो चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट किस आधार पर दी गई।आप सांसद ने आरोप लगाया कि कथित भ्रष्टाचार का दायरा केवल जमीन के लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि चंदे, चढ़ावे, आभूषणों और मंदिर निर्माण से जुड़े कार्यों तक फैला हुआ है। उन्होंने इंजीनियर दीनानाथ वर्मा के हवाले से आरोप लगाया कि अनिल मिश्रा निर्माण कार्यों में 40-40 प्रतिशत कमीशन लेते थे। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में प्रस्तुत दस्तावेजों और संबंधित पक्षों की स्वतंत्र पुष्टि का विवरण प्रेस वार्ता में सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया।संजय सिंह ने कहा कि उन्होंने वर्तमान SIT अध्यक्ष किरन एस. को ईमेल भेजकर मिलने का समय मांगा है। उनके मुताबिक, वह पहले जांच एजेंसी को दिए गए 13 दस्तावेजों के अलावा 13 नए दस्तावेज भी सौंपना चाहते हैं। इस तरह कुल 26 दस्तावेज SIT के समक्ष रखने का दावा किया गया है। उन्होंने कहा कि इन दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष और प्रभावी जांच नहीं हुई तो वह सभी दस्तावेज लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।जमीन के कथित सौदे का उल्लेख करते हुए संजय सिंह ने आरोप लगाया कि करीब दो करोड़ रुपये की जमीन को महज कुछ मिनटों के अंतराल में साढ़े 18 करोड़ रुपये में खरीदने का सौदा किया गया। उन्होंने इस मामले में चंपत राय के हस्ताक्षर और अनिल मिश्रा की गवाही का हवाला देते हुए इसे कथित भ्रष्टाचार का महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया। उन्होंने सवाल किया कि यदि जमीन के सौदे में इतनी बड़ी राशि का अंतर सामने आता है तो इसकी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं की जानी चाहिए।प्रेस वार्ता में संजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के नाम पर जुटाए गए चंदे और उसके इस्तेमाल को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर के नाम पर बनाए गए चंदा संग्रह अभियान के माध्यम से बड़ी रकम जुटाई गई, लेकिन उसके उपयोग और हिसाब-किताब को लेकर पारदर्शिता नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इसी धन का इस्तेमाल आरएसएस और भाजपा के कार्यालयों के निर्माण में किया गया। साथ ही उन्होंने मंदिर निर्माण के अनुमानित बजट में कथित रूप से कई गुना बढ़ोतरी पर भी सवाल उठाते हुए पूरे वित्तीय लेन-देन का सार्वजनिक लेखा-जोखा उपलब्ध कराने की मांग की।संजय सिंह ने कहा कि भगवान राम के मंदिर के नाम पर प्राप्त धन के उपयोग में यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से सवाल किया कि कथित भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई करने के बजाय आरोपियों को क्लीन चिट दिए जाने की खबरें क्यों सामने आ रही हैं।प्रेस वार्ता के दौरान आप सांसद ने उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी भाजपा सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल बंद किए गए हैं और कई विद्यालयों में बिजली, शौचालय तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए भाजपा पर शिक्षा संस्थानों के खिलाफ राजनीतिक कार्रवाई करने का आरोप लगाया। संजय सिंह ने तंज कसते हुए भाजपा की शिक्षा नीति पर सवाल उठाए और कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के बजाय सरकार राजनीतिक मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है।राष्ट्रवाद और वंदे मातरम के मुद्दे पर भी संजय सिंह ने भाजपा और आरएसएस को निशाने पर लिया। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हिंदू महासभा और उससे जुड़े नेताओं की भूमिका का उल्लेख करते हुए भाजपा के राष्ट्रवाद के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के तत्कालीन राजनीतिक रुख और मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन की राजनीति का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा को देशभक्ति का प्रमाणपत्र बांटने से पहले इतिहास के उन अध्यायों पर भी चर्चा करनी चाहिए।प्रयागराज में बाढ़ और जलभराव के मुद्दे पर भी संजय सिंह ने प्रदेश सरकार पर हमला बोला। उन्होंने केंद्र, राज्य और नगर निकाय की संयुक्त व्यवस्था को लेकर ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि यदि तीनों स्तरों पर एक ही राजनीतिक दल की सरकार है तो फिर जनता को जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याओं से राहत क्यों नहीं मिल रही है। उन्होंने रोजगार के मुद्दे पर भी सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि रोजगार की मांग करने वाले युवाओं को समाधान के बजाय विरोध प्रदर्शन के दौरान लाठियां मिल रही हैं।संजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके पास मौजूद दस्तावेजों में कई महत्वपूर्ण तथ्य हैं और वह उन्हें जांच एजेंसी तथा आवश्यकता पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट के सामने रखेंगे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि मंदिर के नाम पर जुटाए गए धन और उससे जुड़े प्रत्येक लेन-देन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित कराना है।उन्होंने दोहराया कि SIT को उपलब्ध कराए जाने वाले 26 दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने मांग की कि जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं और यदि किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

