(नई दिल्ली)सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्रों के लिए 31 अगस्त तक आवेदन, 51 केंद्रों को मिल चुकी है मान्यता

 

(नई दिल्ली)सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्रों के लिए 31 अगस्त तक आवेदन, 51 केंद्रों को मिल चुकी है मान्यता

सत्यापन का दायरा 23 श्रेणियों तक बढ़ा; बेहतर सुविधा, त्वरित अनुपालन और उपभोक्ता संरक्षण पर जोर

नई दिल्ली ,20 अगस्त ,(आरएनएस)। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के उपभोक्ता मामले विभाग ने विधिक मापन (सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्र) नियम, 2013 के तहत सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्र (जीएटीसी) के रूप में मान्यता के लिए पात्र संगठनों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। पात्र उद्योग, प्रयोगशालाएं, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) और अन्य परीक्षण सुविधाएं 31 अगस्त 2026 को शाम 5 बजे तक आवेदन कर सकती हैं।

आवेदन विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किए जा सकते हैं। पूरी प्रक्रिया डिजिटल है, जिसमें आवेदन जमा करने, शुल्क भुगतान, आवेदन की स्थिति देखने और विभाग के साथ संवाद की सुविधा उपलब्ध है। इससे आवेदन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और कारोबार के अनुकूल बनाने का प्रयास किया गया है।

51 जीएटीसी को मिल चुकी है मान्यता

सरकार के अनुसार अब तक 51 सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्रों को मान्यता दी जा चुकी है। विभाग का लक्ष्य जीएटीसी के नेटवर्क को और विस्तारित करना है, ताकि उद्योगों और कारोबारियों को उनके स्थान के नजदीक वजन एवं माप के सत्यापन की सुविधा मिल सके। इससे सत्यापन में लगने वाला समय कम होगा और नियामकीय अनुपालन में तेजी आएगी।

जीएटीसी व्यवस्था का उद्देश्य व्यापार और वाणिज्य में इस्तेमाल होने वाले निर्धारित वजन और माप के सत्यापन तथा पुन: सत्यापन में तकनीकी रूप से सक्षम निजी क्षेत्र के संस्थानों की भागीदारी बढ़ाना है।

राज्य विधिक मापन विभागों को भी मिलेगी मदद

अधिक संख्या में अनुमोदित परीक्षण केंद्र उपलब्ध होने से राज्य के विधिक मापन विभागों पर सत्यापन सेवाओं का दबाव कम होगा। इससे विधिक मापन अधिकारी बाजार निगरानी, नियमों के प्रवर्तन और उपभोक्ता शिकायतों के निवारण पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।

23 श्रेणियों के वजन-माप का हो सकेगा सत्यापन

जीएटीसी नियमों में हाल के संशोधनों के बाद मान्यता प्राप्त केंद्र अब 23 श्रेणियों के वजन और माप उपकरणों का सत्यापन और पुन: सत्यापन कर सकते हैं। इनमें स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा, परिवहन, खुदरा, विनिर्माण और बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले उपकरण शामिल हैं।

इन 23 श्रेणियों में जल मीटर, रक्तचाप मापने के यंत्र, नैदानिक थर्मामीटर, स्वचालित रेल तौल पुल, टेप माप, विभिन्न प्रकार के गैर-स्वचालित वजन यंत्र, लोड सेल, बीम स्केल, काउंटर मशीन, भार, गैस मीटर, ऊर्जा मीटर, नमी मीटर, वाहन गतिमापी, श्वास विश्लेषक, बहुआयामी मापन उपकरण और प्रवाह मीटर शामिल हैं।

इसके अलावा पेट्रोल एवं डीजल वितरण यंत्र, संपीड़ित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) वितरण यंत्र, तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) वितरण यंत्र, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) वितरण यंत्र तथा हाइड्रोजन वितरण यंत्र भी इसके दायरे में शामिल किए गए हैं।

ईंधन वितरण में माप की सटीकता पर जोर

पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन वितरण यंत्रों को जीएटीसी के दायरे में शामिल करना हालिया विस्तार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे ईंधन वितरण प्रणालियों के सत्यापन की क्षमता मजबूत होने के साथ ईंधन लेन-देन में सटीक माप और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा।

डिजिटल व्यवस्था से आवेदन प्रक्रिया आसान

जीएटीसी व्यवस्था को कारोबार सुगमता की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है। निर्माता, व्यापारी और उपयोगकर्ता अब सीमित सरकारी सुविधाओं पर निर्भर रहने के बजाय विस्तारित जीएटीसी नेटवर्क के माध्यम से अनुमोदित तकनीकी सुविधाओं तक पहुंच बना सकेंगे।

डिजिटल आवेदन व्यवस्था के कारण आवेदक ऑनलाइन आवेदन, शुल्क भुगतान और आवेदन की स्थिति की निगरानी कर सकेंगे। इससे सरकारी कार्यालयों में बार-बार जाने की आवश्यकता भी कम होगी।

मान्यता प्राप्त करने वाले संगठनों के पास राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आवश्यक परीक्षण एवं अंशांकन उपकरण, योग्य तकनीकी कर्मचारी और जीएटीसी नियमों के तहत निर्धारित बुनियादी ढांचा होना जरूरी है।

उद्योग, उपभोक्ता और सरकार के बीच साझेदारी

जीएटीसी व्यवस्था विधिक मापन के क्षेत्र में सरकार और तकनीकी रूप से सक्षम संस्थानों के बीच साझेदारी को बढ़ावा देती है। प्रयोगशालाओं, उद्योगों, शैक्षणिक संस्थानों और परीक्षण सुविधाओं को सत्यापन प्रणाली में शामिल करके सरकार विश्वसनीय सत्यापन सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने का प्रयास कर रही है, जबकि नियामकीय निगरानी की जिम्मेदारी विधिक मापन व्यवस्था के तहत बनी रहेगी।

इससे अधिक व्यापक, सुलभ और प्रभावी सत्यापन नेटवर्क तैयार होने की उम्मीद है, जिसका लाभ कारोबारियों के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी मिलेगा।

सटीक माप से मजबूत होगा उपभोक्ता विश्वास

निष्पक्ष व्यापार और उपभोक्ता विश्वास के लिए वजन और माप की सटीकता बेहद महत्वपूर्ण है। जीएटीसी नेटवर्क के विस्तार से सत्यापन और पुन: सत्यापन सेवाएं अधिक सुलभ और समयबद्ध होंगी। इससे कारोबारियों को नियामकीय आवश्यकताओं का पालन करने में सुविधा होगी और यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि व्यावसायिक लेन-देन में इस्तेमाल होने वाले माप सटीक और विश्वसनीय रहें।

विभाग के अनुसार इस सुधार का उद्देश्य कारोबार सुगमता और उपभोक्ता संरक्षण के बीच संतुलन कायम करना है। इससे ईमानदार कारोबारियों के लिए अनुपालन आसान होगा और रोजमर्रा के लेन-देन में इस्तेमाल होने वाले वजन एवं माप की विश्वसनीयता पर उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत होगा।

31 अगस्त शाम 5 बजे तक आवेदन

जीएटीसी के रूप में मान्यता प्राप्त करने के इच्छुक पात्र संगठन 17 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 शाम 5 बजे है।

पात्रता की विस्तृत शर्तें, आवश्यक दस्तावेज, निर्धारित तकनीकी मानक और आवेदन प्रक्रिया विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध हैं। विभाग ने पात्र संगठनों से समय सीमा समाप्त होने से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी करने का आग्रह किया है।

जीएटीसी व्यवस्था का विस्तार डिजिटल शासन, आत्मनिर्भर भारत और देश की गुणवत्ता अवसंरचना को मजबूत करने के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है। सरकार का लक्ष्य एक ऐसा व्यापक सत्यापन नेटवर्क तैयार करना है, जिससे उद्योगों को तेज और आसान सेवाएं मिलें तथा उपभोक्ताओं को व्यापारिक लेन-देन में इस्तेमाल होने वाले वजन और माप की सटीकता पर अधिक भरोसा हो।

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