रिमझिम बरसा पानी, खिल उठीं धान की फसलें
किसानों के चेहरों पर लौटी रौनक, बोले इंद्रदेव की कृपा से बेहतर होगी पैदावार
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बल्दीराय/सुल्तानपुर। सावन माह के अंतिम सप्ताह से मौसम ने करवट ली है। क्षेत्र में रुक-रुककर हो रही रिमझिम बारिश से खेतों में खड़ी धान की फसलें लहलहा उठी हैं। बारिश की फुहारों ने जहां खेतों की प्यास बुझाई है, वहीं किसानों के चेहरों पर भी खुशहाली की उम्मीद दिखाई देने लगी है। किसानों का कहना है कि यदि मौसम इसी तरह मेहरबान रहा तो इस बार धान की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है।
देहली गांव निवासी किसान अनिल सिंह ने बताया कि बादर ऊपर बादर धावै, घाघ कहैं, पानी बरसावै। समय-समय पर हो रही बारिश धान की फसल के लिए बेहद लाभदायक साबित हो रही है। खेतों में पर्याप्त नमी होने से फसल तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इस बार इंद्रदेव की कृपा बनी रही तो मेहनत का अच्छा फल मिलने की उम्मीद है। तिरहुत ग्रामसभा निवासी मृत्युंजय सिंह ने कहा कि पहिला पवन पुरुब से आवै, बरसै मेघ, अन्न बरसावै। और ऐंजर निवासी किसान रूपेश द्विवेदी ने खेती-किसानी में मौसम के महत्व को बताते हुए घाघ की कहावतों का जिक्र करते हुए कहा कि छिन पुरवैया, छिन पछियांव, छिन छिन बरसै, बहै न पाव। किसानों के बीच प्रचलित कहावत है “सावन बरसे झमाझम, भादो बरसे आधा, किसान कहे दोनों बरसें, तो हो खेती में फायदा। किसानों का मानना है कि धान की फसल के महत्वपूर्ण समय में पर्याप्त वर्षा मिलना उत्पादन के लिए शुभ संकेत है।
ग्रामीण किसानों का कहना है कि बारिश से खेतों में सिंचाई का खर्च भी कम होगा और धान की फसल को आवश्यक नमी मिलती रहेगी। यदि आगे भी मौसम अनुकूल रहा और तेज आंधी या रोग-कीट का प्रकोप नहीं हुआ तो खेतों में धान की बालियां अच्छी तरह भरने की संभावना है। बारिश ने सिर्फ खेतों को ही नहीं, बल्कि किसानों की उम्मीदों को भी हरा कर दिया है। ग्रामीण अंचल में जगह-जगह लहलहाती धान की फसल देखकर किसानों को बेहतर उत्पादन और अच्छी आमदनी की आस बंधी है। किसानों की जुबान पर अब यही बात है, मेहनत हमारी, मेहर इंद्रदेव की, तो खुशहाल होगी खेती और किसान की जिंदगी ।
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