आईआईटी मद्रास ने ‘कदम’ प्रोस्थेटिक घुटने के लिए स्पार्क मिंडा फाउंडेशन के साथ टेक्नोलॉजी लाइसेंस समझौता किया
दिव्यांगजनों के लिए सुलभ गतिशीलता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
नवाचार और उद्योग के बीच सेतु
आईआईटी मद्रास और स्पार्क मिंडा फाउंडेशन ने अंग-विच्छेदन का सामना कर चुके लोगों के लिए स्वदेशी सहायक तकनीक को बड़े स्तर पर उपलब्ध कराने के लिए मिलाया हाथ
लखनऊ: सुलभ और स्वदेशी सहायक तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत, आईआईटी मद्रास टेक्नोलॉजी ट्रांसफर ऑफिस (TTO) और प्रमुख ऑटोमोटिव कंपोनेंट निर्माता स्पार्क मिंडा की कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) शाखा स्पार्क मिंडा फाउंडेशन (SMF) ने ‘कदम’ नामक अभिनव प्रोस्थेटिक घुटने की तकनीक के हस्तांतरण के लिए एक गैर-अनन्य टेक्नोलॉजी लाइसेंस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। ‘कदम’ को असमान भू-भाग पर बेहतर गतिशीलता में सहायता के लिए विकसित किया गया है।
यह समझौता सहायक एवं पुनर्वास तकनीकों के क्षेत्र में आईआईटी मद्रास की शोध एवं इंजीनियरिंग विशेषज्ञता को स्पार्क मिंडा फाउंडेशन की उत्पाद विकास, विनिर्माण और बड़े स्तर पर उत्पादन की क्षमताओं से जोड़ता है। इस साझेदारी का उद्देश्य ‘कदम’ प्रोस्थेटिक घुटने को शोध एवं विकास के चरण से आगे ले जाकर अधिक लोगों तक पहुंचाना है, ताकि अंग-विच्छेदन का सामना कर चुके लोग इस स्वदेशी मोबिलिटी समाधान का लाभ उठा सकें।
यह साझेदारी स्पार्क मिंडा फाउंडेशन के उन्नत और स्वदेशी प्रोस्थेटिक समाधान विकसित करने तथा 2030 तक 50,000 प्रोस्थेटिक अंगों की फिटमेंट का लक्ष्य हासिल करने के व्यापक विजन के अनुरूप है। यह पहल तकनीक, सुलभता और बड़े स्तर पर प्रभाव पैदा करने की दिशा में फाउंडेशन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए डॉ. सुरेश डी., ग्रुप CTO, स्पार्क मिंडा ग्रुप एवं CEO, स्पार्क मिंडा टेक्निकल सेंटर (SMIT) ने सामाजिक विकास में योगदान देने वाले समाधान तैयार करने के लिए तकनीक और नवाचार के इस्तेमाल के प्रति स्पार्क मिंडा की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर स्पार्क मिंडा फाउंडेशन की चेयरपर्सन सुश्री सारिका मिंडा ने कहा:
«“टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग समझौता केवल तकनीक हस्तांतरण की उपलब्धि नहीं है, बल्कि एक मजबूत इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जहां अकादमिक नवाचार, उद्योग की क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी एक साथ मिलकर अधिक समावेशी समाज के लिए समाधान तैयार करते हैं।”»
आईआईटी मद्रास के नेशनल सेंटर फॉर असिस्टिव हेल्थ टेक्नोलॉजीज (NCAHT) और TTK सेंटर फॉर रिहैबिलिटेशन रिसर्च एंड डिवाइस डेवलपमेंट (R2D2) की प्रमुख एवं ‘कदम’ घुटने के विकास का नेतृत्व करने वाली प्रो. सुजाता श्रीनिवासन ने कहा:
«“हमें ऐसे समान विचारधारा वाले साझेदारों के साथ सहयोग करने की खुशी है, जो मानते हैं कि दिव्यांगजनों को ऐसी सही तकनीकों तक पहुंच मिलनी चाहिए, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनने में सक्षम बनाएं।”»
यह सहयोग उद्योग और अकादमिक जगत के बीच एक महत्वपूर्ण साझेदारी का प्रतिनिधित्व करता है, जिसका उद्देश्य शोध और इंजीनियरिंग उत्कृष्टता को बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले सहायक समाधानों में बदलना है। आईआईटी मद्रास की तकनीक और शोध क्षमताओं को स्पार्क मिंडा फाउंडेशन के विनिर्माण एवं आउटरीच नेटवर्क के साथ जोड़कर यह साझेदारी भारत में सुलभ प्रोस्थेटिक तकनीकों को बड़े पैमाने पर विकसित और उपलब्ध कराने की क्षमता को मजबूत करने की दिशा में काम करेगी।
स्पार्क मिंडा के बारे में
मिंडा कॉरपोरेशन (BSE: 538962; NSE: MINDACORP)
1958 में स्वर्गीय श्री शादीलाल मिंडा द्वारा स्थापित स्पार्क मिंडा भारत के प्रमुख ऑटोमोटिव कंपोनेंट निर्माताओं में से एक है। कंपनी यात्री वाहनों, कमर्शियल वाहनों, दोपहिया वाहनों, ऑफ-रोड वाहनों और आफ्टरमार्केट सेगमेंट में प्रमुख OEMs और Tier-1 सप्लायर्स को सेवाएं प्रदान करती है।
छह दशकों से अधिक की इंजीनियरिंग विशेषज्ञता के साथ यह समूह एक वैश्विक मोबिलिटी टेक्नोलॉजी कंपनी के रूप में विकसित हुआ है, जो स्मार्ट, कनेक्टेड और टिकाऊ ऑटोमोटिव समाधान उपलब्ध कराने पर केंद्रित है।
स्पार्क मिंडा के भारत, इंडोनेशिया, वियतनाम, जापान, उज्बेकिस्तान और पोलैंड सहित छह देशों में 42 मैन्युफैक्चरिंग प्लांट और कार्यालय हैं तथा इसके साथ 23,000 से अधिक पेशेवर जुड़े हैं। समूह के मजबूत R&D इकोसिस्टम में 1,000 से अधिक इंजीनियर, पुणे और बेंगलुरु में दो एडवांस्ड स्पार्क मिंडा टेक्निकल सेंटर, भारत में नौ इंजीनियरिंग सेंटर और 11 वैश्विक तकनीकी साझेदारियां शामिल हैं।
कंपनी के व्यापक उत्पाद पोर्टफोलियो में व्हीकल एक्सेस सिस्टम, स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक्स, एडवांस्ड ऑटोमोटिव सेंसर, इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, टेलीमैटिक्स, वायरिंग हार्नेस, डाई-कास्टिंग समाधान, इंटीरियर प्लास्टिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल मोबिलिटी समाधान, स्टार्टर मोटर्स और अल्टरनेटर आदि शामिल हैं।
स्पार्क मिंडा इलेक्ट्रॉनिक्स, मेक्ट्रॉनिक्स, सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल्स, कनेक्टेड मोबिलिटी, EV तकनीकों और इंटेलिजेंट सेफ्टी सिस्टम पर विशेष ध्यान देते हुए एडवांस्ड इंजीनियरिंग, डिजिटल तकनीकों और रणनीतिक साझेदारियों में लगातार निवेश कर रहा है। समूह स्पार्क मिंडा फाउंडेशन के माध्यम से ESG और सामुदायिक विकास के प्रति भी प्रतिबद्ध है।अगर आप चाहें तो मैं इसका 350–400 शब्दों का छोटा, अखबार में सीधे प्रकाशित होने योग्य समाचार संस्करण भी बना सकता हूँ।

