विजयदशमी आज: तीन पीढ़ियों से निभ रही रावण बनने की परंपरा
पिता से मिली विरासत को आगे बढ़ा रहे अमर सिंह, हनुमान की भूमिका में राजीव भी निभा रहे पारिवारिक परंपरा
बाराबंकी। दशहराबाग की ऐतिहासिक रामलीला में किरदार केवल निभाए नहीं जाते, बल्कि पीढ़ियों की आस्था और पारिवारिक विरासत के रूप में संजोए जाते हैं। रावण की भूमिका इसका जीवंत उदाहरण है। यहां तीन पीढ़ियों से रावण का किरदार निभाने की परंपरा चली आ रही है। विजयदशमी पर होने वाले रावण दहन से पहले इस परंपरा की कहानी रामलीला को खास बना देती है। समिति के महामंत्री शिवकुमार वर्मा ने करीब 26 वर्षों तक रावण की भूमिका निभाई। उनसे पहले उनके पिता स्वर्गीय रामचंद्र इस किरदार को जीवंत करते थे। पिता की प्रेरणा से शिवकुमार ने यह परंपरा आगे बढ़ाई और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से बाद में इसकी जिम्मेदारी अपने पुत्र अमर सिंह वर्मा को सौंप दी। अमर सिंह पिछले नौ वर्षों से रावण बन रहे हैं। वह किरदार निभाने से पहले भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर क्षमा याचना करते हैं। व्रत रखने के साथ मुकुट धारण करने से पहले उसकी विधिवत पूजा भी करते हैं। इसी रामलीला में व्यास पंडित प्रमोद पाठक के ज्येष्ठ पुत्र राजीव पाठक हनुमान और उनके छोटे पुत्र अंगद की भूमिका निभाते हैं। पेशे से अधिवक्ता राजीव भी व्रत रखकर और पूजा-अर्चना के बाद ही कपि रूप धारण करते हैं। लीला समाप्त होने तक फलाहार पर रहते हैं। इन कलाकारों के लिए रामलीला महज अभिनय नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और बड़ों से मिली विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प है।

