(वॉश्ंिागटन)राष्ट्रपति ट्रंप ने डेटा सेंटर्स के लिए स्थानीय मंजूरी का किया समर्थन

 

(वॉश्ंिागटन)राष्ट्रपति ट्रंप ने डेटा सेंटर्स के लिए स्थानीय मंजूरी का किया समर्थन

वाशिंगटन ,25 अक्टूबर ,। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डेटा सेंटर्स को लेकर स्थानीय मंजूरी का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि जिन समुदायों में ये सेंटर्स लगते हैं, उन्हें अच्छा आर्थिक लाभ मिलना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि चीन से मुकाबला करने के लिए अमेरिका को इन सुविधाओं की जरूरत है। शनिवार को जॉर्जिया के पेरी में एक रैली से पहले डब्ल्यूएएनएफ-टीवी के अटलांटा न्यूज फर्स्ट को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने इस बात को खारिज किया कि डेटा सेंटर्स को लेकर रिपब्लिकन गवर्नर पद के उम्मीदवार रिक जैक्सन के साथ उनके विचार अलग हैं। इंटरव्यूअर एबी कौसौरिस से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, मैं इससे सहमत हूं और मुझे लगता है कि डेटा सेंटर्स के लिए स्थानीय लोगों को बहुत सारा पैसा मिलना चाहिए।

उनके इस जवाब ने डेटा सेंटर्स पर फैसले में स्थानीय भूमिका का समर्थन किया, लेकिन उन्होंने कोई मंजूरी प्रक्रिया नहीं बताई और न ही इसके लिए कोई संघीय उपाय घोषित किया। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि समुदायों को भुगतान कैसे तय किया जाएगा या कैसे बांटा जाएगा।

कौसौरिस ने यह मुद्दा तब उठाया जब उन्होंने कहा कि रिक जैक्सन का मानना है कि स्थानीय लोगों को डेटा सेंटर्स को मंजूरी देने का अधिकार होना चाहिए। इस पर ट्रंप ने कहा कि आर्थिक लाभ से समुदायों का नजरिया बदल सकता है।

उन्होंने कहा, मैंने देखा है कि जब कोई डेटा सेंटर बनता है। लोग बहुत नाखुश होते हैं। अचानक, एक डेटा सेंटर समुदाय को टैक्स के रूप में या किसी भी रूप में भुगतान करने का फैसला करता है और अचानक, वही लोग उनके काम को पसंद करने लगते हैं।

उन्होंने स्थानीय लाभ के समर्थन के साथ-साथ निर्माण जारी रखने की भी बात कही और चीन से प्रतिस्पर्धा का हवाला दिया। ट्रंप ने कहा कि चीन तेजी से डेटा सेंटर बना रहा है और दावा किया कि अमेरिका आगे है, हालांकि उन्होंने इसके लिए कोई आंकड़ा नहीं दिया। उन्होंने कहा, लेकिन डेटा सेंटर्स के पास पैसा है। वे स्थानीय समुदायों को बहुत कुछ दे सकते हैं।

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने और रिक जैक्सन ने किसी खास नियम पर चर्चा की है या उनमें मतभेद है, तो ट्रंप ने किसी प्रस्ताव का नाम नहीं लिया। इसके बजाय उन्होंने टैक्स या डिविडेंड जैसे भुगतान की संभावना पर जोर दिया।

उन्होंने अनुमान लगाया कि ऐसे लाभों से लोग डेटा सेंटर्स को लेकर ज्यादा सकारात्मक होंगे। उन्होंने यह साफ नहीं किया कि पैसा स्थानीय सरकारों को जाएगा, परिवारों को या दोनों को और भुगतान व्यवस्था के लिए कोई समय सीमा भी नहीं दी।

ट्रंप ने यह भी कहा कि ये केंद्र अपनी बिजली खुद पैदा करेंगे और ग्रिड को भी बिजली देंगे। इंटरव्यू के दौरान उन्होंने किसी प्रोजेक्ट का नाम या उत्पादन क्षमता का ब्योरा नहीं दिया। उन्होंने कहा कि लोगों को डेटा सेंटर्स से लाभ मिलना चाहिए।

व्हाइट हाउस के 4 मार्च के रेटपेयर प्रोटेक्शन प्लेज में हिस्सा लेने वाली टेक कंपनियों से कहा गया था कि वे अपने डेटा सेंटर्स के लिए जरूरी अतिरिक्त बिजली आपूर्ति और बुनियादी ढांचे का खर्च खुद उठाएं। इसमें स्थानीय भर्ती, वर्कफोर्स ट्रेनिंग और ग्रिड ऑपरेटरों के साथ समन्वय की प्रतिबद्धता भी शामिल थी। ये प्रतिबद्धताएं कंपनियों की प्रैक्टिस से जुड़ी हैं और खुद यह साबित नहीं करतीं कि घरों की बिजली लागत कम हुई है।

डेटा सेंटर्स क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी सेवाओं को सपोर्ट करते हैं। उनके सर्वर को लगातार चलने के लिए भरोसेमंद बिजली और कूलिंग की जरूरत होती है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग बिजली आपूर्ति और कंप्यूटिंग उपकरणों से गर्मी निकालने दोनों को इन सुविधाओं की मुख्य जरूरत बताता है।

00

 

(रियाद)यमन में फिर बढ़ा तनाव : हूती विद्रोहियों और सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच मिसाइल, ड्रोन और हवाई हमलें

रियाद/सना ,25 अक्टूबर ,। यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। हूती समूह ने दावा किया है कि उसने सऊदी अरब के कई शहरों में मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जबकि जवाब में गठबंधन ने यमन के हूती नियंत्रण वाले इलाकों पर भारी हवाई हमले किए, जिनमें कई लोगों की मौत और घायल होने की खबर है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारेया ने बयान जारी कर कहा कि शनिवार को समूह ने सात मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन हमलों का निशाना सऊदी अरब के रियाद, यनबू, राबिग, दम्माम, नज्रान और खमीस मुशैत शहरों के हवाई अड्डे, तेल प्रतिष्ठान और सैन्य ठिकाने थे। सारेया ने कहा कि रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को दो चरणों में निशाना बनाया गया। इसके अलावा यनबू में सऊदी अरामको की सुविधाओं और दम्माम के किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी हमले किए गए।

दूसरी तरफ, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि उसने हूती समूह की ओर से रियाद, ताइफ और यनबू की ओर दागी गई कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। साथ ही पूर्वी प्रांत में एक ड्रोन को भी मार गिराया गया।

सऊदी अरब के नागरिक सुरक्षा विभाग ने बताया कि दो इंटरसेप्ट की गई मिसाइलों का मलबा मक्का और मदीना क्षेत्रों में गिरा। हालांकि हूती समूह ने इन दोनों पवित्र शहरों को निशाना बनाने के आरोपों से इनकार किया और उन्हें झूठा और बेबुनियाद बताया।

हूती समूह का कहना है कि ये हमले पिछले 24 घंटों में उनके नियंत्रण वाले इलाकों पर किए गए लगभग 100 सऊदी हवाई हमलों के जवाब में किए गए। इनमें राजधानी सना और ताइज प्रांत के लाल सागर तट पर स्थित मोचा शहर भी शामिल थे।

हूती समूहों की ओर से संचालित अल-मसीरा टीवी के अनुसार, इन हवाई हमलों में कई लोग हताहत हुए। सना प्रांत के हमदान जिले में एक सीमेंट फैक्ट्री के कर्मचारियों के आवास पर हुए हवाई हमले में आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि 10 से अधिक लोग घायल हुए।

ये हमले ऐसे समय में हुए हैं जब सऊदी समर्थन प्राप्त यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेना हूतियों के खिलाफ डॉन ऑफ यमन अभियान को तेज कर रही है। इसके जवाब में हूती लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे हैं।

एक अलग बयान में याह्या सारेया ने कहा कि हूती बलों ने दक्षिणी बंदरगाह शहर अदन में सऊदी समर्थित सैन्य जमावड़ों को निशाना बनाया। अदन फिलहाल यमन सरकार का मुख्य ठिकाना है।

एक स्थानीय सुरक्षा अधिकारी ने समाचार एजेंसी सिन्हुआ को बताया कि हूतियों ने शहर पर करीब चार बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इनमें से कुछ मिसाइलें अदन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और खोरमक्सर जिले की महत्वपूर्ण सैन्य सुविधाओं के पास गिरीं, जबकि एक मिसाइल अल-तवाही जिले में कोस्ट गार्ड मुख्यालय पर लगी।

इस बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी विदेश विभाग ने शनिवार को मध्य पूर्व के कई देशों के लिए अपनी यात्रा सलाह (ट्रैवल एडवाइजरी) अपडेट की। इनमें सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, इराक, लेबनान और इजरायल शामिल हैं। विभाग ने हूती हमलों के खतरे को देखते हुए यह कदम उठाया।

यमन में संघर्ष 2014 के अंत से जारी है, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और देश के उत्तरी हिस्सों के बड़े क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाला गठबंधन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के समर्थन में युद्ध में शामिल हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *