मानहानि मामले में राहुल गांधी बरी, 16 मिनट में आया फैसला
कोर्ट ने कहा-झूठी वाहवाही के लिए मुकदमे न करें
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सुल्तानपुर। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सुल्तानपुर की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट ने मानहानि के एक मामले में बरी कर दिया है। यह मामला वर्ष 2018 में बेंगलुरु में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा था। भाजपा नेता विजय मिश्रा ने अगस्त 2018 में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।
राहुल गांधी सोमवार को कोर्ट में पेश हुए। वे करीब 11.16 बजे अदालत पहुंचे और लगभग 11.32 बजे फैसला सुनाया गया। करीब 16 मिनट की सुनवाई के बाद कोर्ट ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया। राहुल गांधी करीब 11.35 बजे अदालत से बाहर निकल गए।
कोर्ट ने मानी तीन अहम बातें- राहुल गांधी की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस चीमा और काशी शुक्ला ने अदालत में दलीलें पेश कीं। उनके मुताबिक, कोर्ट ने राहुल गांधी को बरी करने के पीछे तीन प्रमुख बातों को आधार माना। पहली वजह-राहुल गांधी की ओर से कोर्ट में पेश की गई उनके पूरे बयान की सीडी को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया। राहुल गांधी का पक्ष था कि बयान का उद्देश्य किसी व्यक्ति की मानहानि करना नहीं था। दूसरी वजह-अदालत ने मानहानि का मुकदमा दाखिल करने वाले भाजपा नेता विजय मिश्रा को इस मामले में प्रत्यक्ष रूप से पीड़ित व्यक्ति नहीं माना। यानि राहुल गांधी द्वारा दिए गए बयान का विजय मिश्रा से सीधा संबंध नहीं पाया गया। तीसरी वजह-कोर्ट ने राहुल गांधी के बयान को विजय मिश्रा की मानहानि के दायरे में नहीं माना। अदालत के अनुसार मामले में राहुल गांधी की ओर से मानहानि करने की मंशा साबित नहीं हुई।
जज ने मुकदमा दाखिल करने को लेकर जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत ने शिकायतकर्ता को भी फटकार लगाई। जज ने कहा कि झूठी वाहवाही पाने के लिए इस तरह के मुकदमे दायर नहीं किए जाने चाहिए। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों से न्यायालय का कीमती समय बर्बाद होता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति को मुकदमा दाखिल करने से पहले पर्याप्त सावधानी बरतनी चाहिए और बिना ठोस आधार के मामला अदालत में नहीं लाना चाहिए। इस मामले में भाजपा नेता विजय मिश्रा की ओर से अधिवक्ता संतोष कुमार पांडे ने पैरवी की।

