(चंडीगढ़)डीए मामले में पंजाब सरकार को हाईकोर्ट की फटकार, मुख्य सचिव को लगाया 1 लाख रुपए का जुर्माना
चंडीगढ़ ,28 अक्टूबर ,(आरएनएस)। कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते से जुड़े मामले में अदालती आदेशों की अनदेखी और जवाब दाखिल न करने पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के खिलाफ बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। अदालत के पूर्व निर्देशों की अवहेलना को लेकर दायर अवमानना याचिका पर करीब एक घंटे तक चली मैराथन सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जवाब न मिलने पर गहरी नाराजगी जताई। अदालत ने कड़ा संज्ञान लेते हुए पंजाब के मुख्य सचिव पर एक लाख रुपये का जुर्माना ठोक दिया है। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई पर मुख्य सचिव व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होकर अपनी स्थिति स्पष्ट करें।
न्यायिक आदेशों के प्रति उदासीनता पर अदालत सख्त, 1 लाख रुपये का जुर्माना ठोका
महंगाई भत्ते के भुगतान को लेकर हाईकोर्ट ने पूर्व में पंजाब सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद सरकार की ओर से न तो आदेशों का पालन किया गया और न ही इस संबंध में कोई ठोस जवाब दाखिल हुआ। इस पर दायर अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए बेंच ने सरकार की कार्यप्रणाली और ढुलमुल रवैये पर कड़ा एतराज जताया। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायिक आदेशों के पालन में अनावश्यक देरी और तय न्यायिक प्रक्रियाओं के प्रति उदासीनता को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इसी लापरवाही के चलते मुख्य सचिव पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश सुनाया गया।
3 नवंबर को अदालत में खुद हाजिर हों मुख्य सचिव, पेश करें पूरी टाइमलाइन
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में मुख्य सचिव को निर्देशित किया है कि वह 3 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष पेश हों। अदालत ने कहा कि मुख्य सचिव को हलफनामा दायर कर यह बिंदुवार बताना होगा कि हाईकोर्ट के मूल आदेशों के अनुपालन के लिए प्रशासनिक स्तर पर अब तक क्या-क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। इसके अलावा, अदालत ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि कर्मचारियों के डीए बकाए से जुड़े आदेशों को पूरी तरह धरातल पर लागू करने के लिए कितनी समय-सीमा तय की गई है और इसका अंतिम क्रियान्वयन कब तक सुनिश्चित किया जाएगा।

