*पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत, चांद के दीदार के बाद पूरा हुआ पूजन”
अयोध्या(DKU Live ब्यूरो चीफ) सुरेंद्र कुमार। भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक करवा चौथ का पर्व गुरुवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सुहागिन व्रत महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ करवा चौथ का व्रत रखा। शाम को चंद्रमा के दर्शन और विधि-विधान से पूजन करने के बाद पानी पीकर अपना व्रत खोला। इस भावुक और आत्मीय पल में दंपती के बीच प्रेम, विश्वास और पारिवारिक समर्पण की झलक देखने को मिली।
करवा चौथ केवल उपवास का पर्व नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास, त्याग और समर्पण को और मजबूत करने का अवसर है। यह त्योहार भारतीय परंपराओं और पारिवारिक संस्कारों की खूबसूरती को दर्शाता है। हर दांपत्य जीवन में आपसी सम्मान, समझ और विश्वास बना रहना सबसे जरूरी है। यही रिश्ते की असली मजबूती है।
करवा चौथ का पर्व पति-पत्नी के बीच स्नेह और अटूट विश्वास का प्रतीक है। पत्नी द्वारा परिवार की खुशहाली और पति की दीर्घायु के लिए रखा जाने वाला व्रत उनके प्रेम और समर्पण को दर्शाता है। जीवनसाथी का साथ, सम्मान और विश्वास ही सुखी वैवाहिक जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। ऐसे पर्व हमें अपनी परंपराओं से जोड़ने के साथ रिश्तों की अहमियत भी समझाते हैं।
गौरतलब है कि करवा चौथ हिंदू महिलाओं के प्रमुख व्रत-त्योहारों में शामिल है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखकर भगवान गणेश, माता पार्वती और चंद्रदेव की पूजा करती हैं तथा पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देने और पति के हाथों जल ग्रहण करने के साथ व्रत पूरा किया जाता है। यह पर्व भारतीय संस्कृति में प्रेम, आस्था और वैवाहिक रिश्तों की मधुरता का सुंदर संदेश देता है।

