(संशोधित)(नईदिल्ली)दिवाली से पहले दिल्ली की हवा गंभीर, आधी रात को एक्यूआई 500 के पार पहुंचा

(संशोधित)(नईदिल्ली)दिवाली से पहले दिल्ली की हवा गंभीर, आधी रात को एक्यूआई 500 के पार पहुंचा

नई दिल्ली ,02 नवंबर (आरएनएस)। राजधानी दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत से पहले ही वायु प्रदूषण ने गंभीर रूप लेना शुरू कर दिया है। दिवाली से पहले ही दिल्ली की हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो गई है। सोमवार को राजधानी के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 350 के पार पहुंच गया, जबकि आधी रात के कुछ समय बाद यह 512 दर्ज किया गया। रविवार को दिल्ली का 24 घंटे का औसत एक्यूआई 261 था, जो खराब श्रेणी में आता है। सोमवार को इसमें और गिरावट दर्ज की गई और वायु गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गई।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार सुबह दिल्ली के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर चिंताजनक रहा। रोहिणी में एक्यूआई 396, अलीपुर में 375, विवेक विहार में 370 और नरेला में 363 दर्ज किया गया। आईटीओ और अक्षरधाम में यह 349, इंडिया गेट और जनपथ में 335 तथा चांदनी चौक में 358 रहा। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 343 और बुराड़ी में 308 एक्यूआई दर्ज किया गया।

वहीं, आया नगर में एक्यूआई 276, हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 पर 263 और आनंद विहार में 242 रहा। सोमवार सुबह पंजाबी बाग, जहांगीरपुरी और रोहिणी में प्रदूषण का स्तर 400 के पार पहुंच गया। दिल्ली से सटे नोएडा में भी स्थिति गंभीर रही। वहां सुबह 11 बजकर 1 मिनट पर एक्यूआई 409 दर्ज किया गया।

राजधानी में रविवार शाम छह बजे के बाद प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ना शुरू हुआ। रविवार शाम तक औसत एक्यूआई 272 था, जो रात 10 बजे बढ़कर 287 और 11 बजे 290 हो गया। आधी रात के कुछ समय बाद यह 512 तक पहुंच गया। पिछले 24 घंटों के दौरान इसका न्यूनतम स्तर भी 334 दर्ज किया गया। वायु गुणवत्ता सूचकांक 450 से अधिक होने पर हवा को अति गंभीर श्रेणी में रखा जाता है।

राजधानी के 57 निगरानी केंद्रों में से 50 पर सूक्ष्म कण पीएम 2.5 प्रमुख प्रदूषक रहे, जबकि शेष सात केंद्रों पर पीएम 10 का स्तर प्रमुख प्रदूषक के रूप में दर्ज किया गया। पीएम 2.5 के सूक्ष्म कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।

केंद्र के वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी तंत्र ने अनुमान जताया है कि सोमवार और मंगलवार को दिल्ली की वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में रह सकती है, जबकि बुधवार तक इसके बहुत खराब श्रेणी में पहुंचने की आशंका है। ऐसे में आने वाले दिनों में राजधानी के लोगों को प्रदूषण से और अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक नवंबर से शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण कार्ययोजना लागू कर दी गई है। इसके तहत भारत चरण-6 उत्सर्जन मानक से नीचे के वाहनों को, जो दिल्ली के बाहर पंजीकृत हैं, राजधानी में प्रवेश करने से रोक दिया गया है।

इसके अलावा, वायु प्रदूषण के स्तर को देखते हुए चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (ग्रैप) के तहत धूल फैलाने वाले निर्माण और तोड़फोड़ के कार्यों पर रोक लगा दी गई है। सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को ही कार्यालय बुलाने तथा शेष कर्मचारियों को घर से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन कराने के लिए दिल्ली सरकार और संबंधित विभागों ने अभियान के पहले ही दिन व्यापक जांच की। अधिकारियों के अनुसार, इस दौरान कुल 68.4 लाख रुपये का जुर्माना और पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया।

प्रवर्तन दलों ने करीब 15 हजार वाहनों की जांच की। इनमें से 1,539 वाहनों को दिल्ली की सीमाओं से वापस भेज दिया गया। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के नियमों का उल्लंघन करने पर 566 चालान जारी किए गए।

भारत चरण-6 उत्सर्जन मानक से कम वाले बाहरी वाहनों पर प्रतिबंध के तहत कुल 14,930 वाहनों की जांच की गई। इनमें से करीब 10.31 प्रतिशत वाहनों को दिल्ली में प्रवेश नहीं दिया गया।

दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति के आधार पर चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना के चार चरण लागू किए जाते हैं। वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 तक रहने पर हवा मध्यम श्रेणी में मानी जाती है और सामान्य तौर पर कोई विशेष पाबंदी लागू नहीं होती।

एक्यूआई 201 से 300 के बीच रहने पर खराब श्रेणी के तहत पहला चरण लागू किया जाता है। 301 से 400 के बीच बहुत खराब श्रेणी में दूसरा चरण प्रभावी होता है। 401 से 450 के बीच गंभीर श्रेणी में तीसरा चरण लागू किया जाता है, जबकि 450 से अधिक होने पर अति गंभीर श्रेणी के तहत चौथा चरण लागू होता है।

राजधानी में प्रदूषण का बढ़ता स्तर प्रशासन के लिए चुनौती बनता जा रहा है। सर्दियों के दौरान तापमान में गिरावट, हवा की कम गति और प्रदूषक कणों के वातावरण में जमा होने से स्थिति और बिगड़ने की आशंका रहती है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू प्रतिबंधों और नियमों का प्रभावी पालन कराना जरूरी हो गया है।

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