यूपी की 403 विधानसभाओं में विकसित होंगे 4030 आंबेडकर प्रतिमा स्थल, 403 करोड़ रुपये जारी

यूपी की 403 विधानसभाओं में विकसित होंगे 4030 आंबेडकर प्रतिमा स्थल, 403 करोड़ रुपये जारी
लखनऊ, (आरएनएस )। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में डॉ. बीआर आंबेडकर प्रतिमा स्थलों के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए 403 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की है। डॉ. बीआर आंबेडकर मूर्ति स्थल विकास योजना के तहत प्रदेश की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में स्थापित 10-10 प्रतिमा स्थलों का विकास कराया जाएगा। इस तरह प्रथम चरण में कुल 4,030 प्रतिमा स्थलों को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। 22 सितंबर 2026 को निदेशालय स्तर से सभी जिलाधिकारियों के निवर्तन पर धनराशि आवंटित की गई है।शासन के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के लिए 40,300 लाख रुपये यानी 403 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। प्रतिमा स्थलों के विकास पर औसतन 10 लाख रुपये प्रति स्थल खर्च किए जाने का अनुमान है, जबकि शासनादेश में किसी एक स्थल के विकास की अधिकतम लागत 40 लाख रुपये निर्धारित की गई है। वास्तविक खर्च स्थल की आवश्यकता और वहां प्रस्तावित कार्यों के आधार पर तय किया जाएगा।योजना का उद्देश्य सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित डॉ. आंबेडकर और अन्य महान विभूतियों की प्रतिमाओं को सुरक्षित, संरक्षित और सम्मानजनक स्वरूप प्रदान करना है। शासन के दस्तावेजों के अनुसार कई प्रतिमा स्थल छत और चहारदीवारी जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। ऐसे स्थलों को मौसम, अतिक्रमण और उपेक्षा से बचाने के साथ उनके आसपास के क्षेत्र का भी विकास और सौंदर्यीकरण कराया जाएगा।योजना के तहत प्रतिमा स्थलों पर रेलिंगयुक्त इस्पात की सीढ़ियां, प्रतिमा के लिए छत, चहारदीवारी, फिनिशिंग, हरियाली और प्रकाश व्यवस्था जैसे कार्य कराए जाएंगे। इसके अलावा प्रतिमा के नाम और उसके इतिहास की संक्षिप्त जानकारी वाला तीन गुणा ढाई फीट का सूचना बोर्ड भी लगाया जाएगा। बोर्ड को जिलाधिकारी से अनुमोदित कराया जाएगा। योजना में ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व वाली प्रतिमाओं के दीर्घकालीन संरक्षण के साथ उन्हें बेहतर सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है।शासनादेश में पुरानी अथवा क्षतिग्रस्त प्रतिमा के स्थान पर आवश्यकता के अनुसार संगमरमर की नई प्रतिमा स्थापित करने का भी प्रावधान किया गया है। इस तरह योजना में केवल स्थल का सौंदर्यीकरण ही नहीं, बल्कि प्रतिमाओं के संरक्षण और आवश्यक होने पर उनके प्रतिस्थापन की व्यवस्था भी शामिल है।योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और विभागों के बीच समन्वय के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय संचालन समिति गठित की गई है। इसमें न्याय, संस्कृति, पर्यटन, वित्त, ग्राम्य विकास, पंचायती राज, नगर विकास और समाज कल्याण सहित संबंधित विभागों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में अंतरविभागीय समन्वय समिति भी गठित की गई है, जो योजना की निगरानी और विभागों के बीच समन्वय का काम करेगी।प्रतिमा स्थल के विकास के लिए खंड विकास अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी अथवा जिलाधिकारी को आवेदन दिया जा सकता है। स्थल का निरीक्षण और विकास कार्यों का आगणन जिलाधिकारी द्वारा चिन्हित कार्यदायी संस्था से कराया जाएगा। निर्माण और सौंदर्यीकरण के कार्य निर्धारित तकनीकी एवं सुरक्षा मानकों के अनुरूप कराए जाएंगे। योजना का क्रियान्वयन संबंधित विभाग, नगरीय निकाय, जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत या ग्राम पंचायत के माध्यम से किया जा सकेगा।शासन ने परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए समयसीमा भी निर्धारित की है। प्रस्ताव और आवेदन प्राप्त करने, स्थल निरीक्षण, आगणन तैयार करने तथा निविदा संबंधी प्रक्रिया के बाद सभी चयनित परियोजनाओं को 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जिलों को धनराशि आवंटित होने के बाद अब कार्यदायी संस्थाओं के चयन और निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कार्यों के प्रशासनिक व वित्तीय अनुमोदन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।सरकार के अनुसार महान समाज सुधारकों और सांस्कृतिक विभूतियों की प्रतिमाएं देश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत का हिस्सा हैं। योजना के माध्यम से इन प्रतिमा स्थलों को सुरक्षित, स्वच्छ, व्यवस्थित और सम्मानजनक स्वरूप देने के साथ नागरिकों और नई पीढ़ी को उनके योगदान से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा। प्रदेश की 403 विधानसभाओं में 4,030 प्रतिमा स्थलों के विकास के लिए 403 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है और सभी कार्य दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

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